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एक साल में दूसरी बार चुनाव कैसे हारे पहलवान योगेश्वर दत्त, यहां पढ़ें- हार के पांच कारण

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 11 Nov 2020 11:34 AM IST
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Know the five reasons behind defeat of Yogeshwar Dutt in Baroda Bypoll
Yogeshwar Dutt - फोटो : फाइल फोटो

हरियाणा के बरोदा उपचुनाव में कांग्रेस अपना गढ़ बचाने में कामयाब रही। बरोदा सीट पर कांग्रेस के इंदुराज नरवाल ने भाजपा के पहलवान योगेश्वर दत्त को 10566 वोटों से हरा दिया। इस तरह एक साल में योगेश्वर दत्त दोबारा बरोदा से चुनाव हारे हैं और इस बार हार का अंतर भी दोगुने से ज्यादा हो गया। योगेश्वर दत्त को जहां 50070 वोट मिले, वहीं इंदुराज नरवाल 60636 वोट लेने में कामयाब रहे। आइए जानते हैं हार के पीछे के पांच बड़े कारण...

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योगेश्वर दत्त (फाइल फोटो) - फोटो : pti

भाजपा ही नहीं, बरोदा उपचुनाव में संजीवनी मिलने की उम्मीद जता रही इनेलो को बड़ा झटका लगा है। उसके प्रत्याशी जोगेंद्र मलिक को केवल 5003 वोट मिले और वह अपनी जमानत गंवा बैठे। इनेलो से ज्यादा लोसुपा के राजकुमार सैनी 5611 वोट पाने में कामयाब रहे लेकिन वह भी अपनी जमानत जब्त होने से नहीं बचा सके।  

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इंदुराज नरवाल, योगेश्वर दत्त, जोगेंद्र मलिक। - फोटो : अमर उजाला

बरोदा हलके के चुनावी दंगल में भाजपा ने पहलवान योगेश्वर दत्त पर दांव खेला था। वहीं कांग्रेस ने नए चेहरे इंदुराज नरवाल को मैदान में उतारा था। इनेलो ने भी अपने पुराने प्रत्याशी जोगेंद्र मलिक को प्रत्याशी बनाया था। उपचुनाव होने के कारण पूरे प्रदेश की राजनीति का बरोदा पर फोकस था। कांग्रेस यहां से लगातार चौथी बार जीत दर्ज करना चाहती थी, ताकि उसका गढ़ बरोदा बचा रहे। 

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योगेश्वर दत्त।

इसके लिए ही पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा व उनके बेटे राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा ने पूरा जोर लगा दिया था। वहीं बरोदा से भाजपा पहली बार जीत दर्ज करके इतिहास रचना चाहती थी। इसके लिए सरकार के सभी मंत्रियों के साथ ही सीएम मनोहर लाल व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला तक प्रचार में जुटे थे। 

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इंदुराज नरवाल पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के साथ। - फोटो : अमर उजाला

भाजपा ने नेताओं की पूरी फौज मैदान में उतारी थी, लेकिन पहले ही राउंड में भाजपा के योगेश्वर दत्त पीछे हो गए। पहले ही राउंड से पिछड़े योगेश्वर दत्त कभी आगे नहीं निकल सके और इंदुराज नरवाल जीत दर्जकर कांग्रेस का गढ़ बचाने में कामयाब रहे। इस तरह बरोदा विधानसभा सीट पर इतिहास रचते हुए कांग्रेस ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की। 

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