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10 हजार अफगान पठानों को 21 सिखों ने चटाई थी धूल, अब इंग्लैंड में लगेगी 'नायक' की प्रतिमा

अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़/फिरोजपुर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 10 Nov 2020 06:27 PM IST
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Battle of Saragarhi : Statue of Havildar Ishar Singh will install in England
सारागढ़ी की लड़ाई - फोटो : फाइल फोटो

विश्व की महानतम लड़ाइयों में शुमार सारागढ़ी की लड़ाई के नायक हवलदार ईशर सिंह की नौ फुट की प्रतिमा इंग्लैंड के वाल्वरहैम्पटन में स्थापित की जाएगी। हवलदार ईशर सिंह ने सारागढ़ी की लड़ाई में दस हजार अफगान सैनिकों के सामने 21 सिख सैनिकों का नेतृत्व किया था। सारागढ़ी की लड़ाई 12 सितंबर 1897 को उत्तर पश्चिम फ्रंटियर प्रोविंस (अब खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान) में ब्रिटिश आर्मी की 36 सिख रेजीमेंट और पठानों के बीच हुई थी। यहां 1897 में बगावत चल रही थी।

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सारागढ़ी गुरुद्वारा - फोटो : फाइल फोटो

अगस्त 1897 में लेफ्टिनेंट कर्नल जॉन हॉटन के नेतृत्व में 36 सिख रेजीमेंट की पांच कंपनियों को ब्रिटिश भारत (अब खैबर पख्तूनख्वा) की उत्तर-पश्चिम सीमा पर भेजा गया था और इन्हें समीर हिल्स, कुराग, संगर, सहटॉप धर और सारागढ़ी में तैनात किया गया था। यहां लोकहार्ट और गुलिस्तान दो किले थे और सारागढ़ी चौकी इनमें बीच में मौजूद थी। इस चौकी की कमांड हवलदार ईशर सिंह के अलावा नायक लाभ सिंह व लांस नायक चंद सिंह तथा 18 अन्य जवान कर रहे थे। 

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Battle of Saragarhi : Statue of Havildar Ishar Singh will install in England
फिरोजपुर छावनी स्थित सारागढ़ी गुरुद्वारा परिसर। - फोटो : फाइल फोटो

उस दौरान ले. कर्नल हॉटन लोकहार्ट के कमांडिंग अधिकारी थे, जिन्होंने पठानों के हमले के बाद सारागढ़ी चौकी से संपर्क किया जहां हैलियोग्राफिक सिग्नल मिल रहे थे। इस चौकी में चार कंपनियां मौजूद थी। 3 सितंबर व 9 सितंबर को गुलिस्तान किले पर पठानों ने हमला कर दिया, जिसमें उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद पठानों ने हार का बदला लेने के लिए दस हजार की संख्या में 12 सितंबर को सारागढ़ी चौकी पर हमला बोल दिया। उस समय चौकी में 21 सिख जवान मौजूद थे जिन्होंने पठानों का डट कर हमला किया। छह घंटे चली लड़ाई में सिख जवानों ने दो सौ से ज्यादा पठानों को मौत के घाट उतारा।

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फिरोजपुर छावनी स्थित सारागढ़ी गुरुद्वारे के पास लगा शहीदों के नाम का बोर्ड। - फोटो : फाइल फोटो

लड़ाई के दौरान नायक लाभ सिंह, सिपाही भगवान सिंह और सिपाही जीवन सिंह ने चौकी से बाहर निकलकर पठानों पर फायरिंग शुरू कर दी। सिख जवान दुश्मन पर भारी पड़ रहे थे कि तभी भगवान सिंह वीरगति पा गए और लाभ सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। लाभ सिंह और जीवन सिंह मिलकर भगवान सिंह के शरीर को चौकी के भीतर लाए। घायल लाभ सिंह ने तब तक सांस नहीं छोड़ी, जब तक उन्होंने कई लोगों को मार नहीं गिराया। इसके बाद एक-एक कर सिख जवान शहीद होते गए।

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सारागढ़ी चौकी में पठानों के साथ युद्ध करते सिख जवान। - फोटो : फाइल फोटो

गोला बारूद भी खत्म हो गया, तब सिख जवानों ने तलवारों व संगीनों से पठानों का सामना किया। इन्हीं वीरों की शहादत की याद में फिरोजपुर छावनी में गुरुद्वारा साहिब की स्थापना की गई। यहां अब हर साल शहीद जवानों को याद करने के लिए राज्यस्तरीय समागम आयोजित किया जाता है और शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।

सितंबर 2021 में किया जाएगा प्रतिमा का अनावरण 
वाल्वरहैम्पटन के श्री गुरु नानक देव जी गुरुद्वारा के पास इस प्रतिमा को स्थापित किया जाना है। इसके लिए भूमि पट्टे पर देने के प्रस्ताव पर वाल्वरहैम्पटन नगर परिषद में बुधवार को प्रस्ताव पेश किया जाएगा। हवलदार ईशर सिंह की प्रतिमा का अनावरण सितंबर 2021 में किए जाने की संभावना है। सारागढ़ी की लड़ाई में मारे गए 21 सैनिकों को भारतीय ऑर्डर ऑफ मेरिट से नवाजा गया था। यह 1911 तक अंग्रेजों द्वारा भारतीय सैनिकों को दी जाने वाली सर्वोच्च उपाधि थी। इसे परमवीर चक्र के बराबर माना जाता है।

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