देश में अब तक हुए जघन्य अपराधों में से 1857 की क्रांति में मारे गए भारतीय सैनिकों की घटना को वैज्ञानिकों ने पहले नंबर पर माना है। वैज्ञानिक तरीके से उन्होंने यह साबित किया है कि इस घटना के जरिए मानवाधिकार को तार-तार किया गया। 282 सैनिकों की हत्या कर उनके शव एक कुएं में डाल दिए गए जबकि मानवाधिकारों के तहत इन सैनिकों के शवों का बाकायदा अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए था।
इस कुएं में दफना दिए गए थे 282 भारतीय सैनिक, अंग्रेजों ने की थी बर्बरता, शोध में चौंकाने वाले खुलासे
इतना ही नहीं, मारे गए सभी लोग सैनिक थे और सेना के नियम के तहत सजा देने से पहले इन सभी के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। सभी को सीधे गोली मार दी गई। अब वैज्ञानिकों ने 1857 की क्रांति में मारे गए इन सैनिकों के अवशेष उनके परिवारों तक पहुंचाने का जिम्मा उठाया है। फिलहाल यह रिसर्च जर्नल फॉरेंसिक साइंस रिव्यू की ओर से स्वीकार कर लिया गया है।
पंजाब विश्वविद्यालय के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के डॉ. जेएस सहरावत और दीक्षा सांख्यान ने 1857 की क्रांति में मारे गए 282 सैनिकों के प्रकरण का तुलनात्मक अध्ययन किया। उन्होंने दुनिया के दस जघन्य अपराधों को सामने रखा। यह अपराध सर्बिया, रवांडा, साइप्रस, पेरू, स्पेन, इराक, ग्वाटेमाला आदि देशों के थे। इन देशों में क्रांति व दंगों के जरिए लोगों को मारा भी गया और मरवाया भी गया लेकिन मारे गए लोगों की बाकायदा कब्रें खोदी गईं और उन्हें दफनाया गया।
इन देशों की संस्थाओं व कुछ सरकारों ने इन कब्रों को फिर से खोदा और पूरे कंकाल बरामद किए। एंथ्रोपोलॉजिस्ट के जरिए यह पूरा कार्य करवाया गया, जिन पर शोध चल रहे हैं। टीम ने अध्ययन के बाद पाया कि दुनिया भर में जगह-जगह भले ही लोगों को मारा गया हो लेकिन उनका अंतिम संस्कार किया गया लेकिन 1857 की क्रांति में सैनिकों को मारकर अमृतसर के अजनाला स्थित एक कुएं में डाल दिया गया। इन सैनिकों को कूड़े की तरह समझा गया। इनका अंतिम संस्कार तक नहीं किया गया, जो मानवाधिकार की श्रेणी में आता है। यही नहीं देश में इतनी बड़ी संख्या में एक जगह से कंकालों का मिलना भी अपने आप में पहली घटना है।
ये थी पूरी घटना
1857 की क्रांति में अंग्रेजों ने 282 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था। मारने से पहले सभी को गोला बनाकर खड़ा किया गया और सिर में गोली मारी गई। इनके नायक आलम बेग का सिर तो तोप से उड़ाया गया और उस सिर को रानी विक्टोरिया को भेंट किया गया। मारे गए सभी सैनिकों के शवों को अमृतसर के अजनाला स्थित एक कुएं में डाल दिया गया। ब्रिटिश कमिश्नर हेनरी कूपर की किताब जब यहां के लोगों को हाथ लगी तो अजनाला का कुआं वर्ष 2014 में खुदवाया गया, जिसमें से इन सैनिकों के कंकाल बरामद हुए।
