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रेलवे ने सवा करोड़ खर्च कर 55 आइसोलेशन कोच बनाए, कोरोना में काम न आए
दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 13 Feb 2021 04:34 PM IST
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रेलवे ने कोरोना मरीजों के लिए बनाए थे आइसोलेशन कोच।
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए रेलवे का एक भी आइसोलेशन कोच काम नहीं आया जबकि कोरोना काल में चंडीगढ़ और कालका रेलवे के इंजीनियरिंग विंग ने आपात स्थिति से निपटने के लिए एक करोड़ दस लाख रुपये की लागत से 55 आइसोलेशन कोच तैयार किए थे। अब इनमें से छह कोच कुंभ मेले के लिए पटरी पर दौड़ा दिए गए हैं, लेकिन बाकी के 49 कोच बीते दस महीने से कालका और जगाधरी रेलवे यार्ड में खुद ‘आइसोलेशन’ में हैं। खास बात यह है कि यहां पर खड़े-खड़े यह खराब होने लगे हैं।
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कालका स्टेशन पर खड़ा आइसोलेशन कोच।
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए रेलवे ने चंडीगढ़ के लिए 30 और कालका के लिए 25 आइसोलेशन कोच तैयार किए गए थे। रेलवे अधिकारियों से के मुताबिक प्रत्येक कोच को तैयार करने में करीब दो लाख रुपये की लागत आई थी। इस हिसाब से 55 आइसोलेशन कोच तैयार करने में एक करोड़ दस लाख रुपये खर्च किए गए थे। दिन-रात काम कर महज एक सप्ताह में तैयार किए गए इन आइसोलेशन कोचों की अब तक राज्य सरकारों को जरूरत ही नहीं पड़ी। इसका नतीजा यह रहा कि यह सभी कोच अब खुद आइसोलेशन की पीड़ा झेल रहे हैं। हालांकि अभी कोरोना संक्रमण पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है लेकिन संक्रमितों की संख्या घटने के बाद सरकारी भवनों में बने आइसोलेशन केंद्र भी खाली हो चुके हैं लेकिन यार्ड में खड़े इन 49 कोचों को पटरी पर लाने की कवायद अब तक नहीं की जा रही।
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आइसोलेशन कोच।
- फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की राय तक नहीं ली रेलवे ने
रेलवे ने कोचों को आइसोलेशन केंद्र में तब्दील करने का फैसला खुद ही ले लिया था और यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी। शिवालिक विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष विजय बंसल ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेलवे को आइसोलेशन कोच बनाने से पहले राज्यों से जुड़े स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से उनकी व्यवस्था जान लेनी चाहिए थी। इसके बाद आइसोलेशन कोच बनाने का फैसला लेना चाहिए था। यह सवाल भी आम लोगों के मन में है कि आखिरकार इतने बड़े संकट में एक करोड दस लाख रुपये की लागत से बने इन आइसोलेशन कोचों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। ढकोली निवासी राजेश पठानिया ने बताया कि अगर इनका इस्तेमाल ही नहीं करना था तो इन्हें बनाया ही क्यों गया। अगर समय रहते आइसोलेशन केंद्र बनाने के बजाय अपने घर लौट रहे श्रमिकों में इन पैसों का बंटवारा किया होता तो कोविड के मरीज पूरे देश में नहीं बढ़ते और इनकी संख्या भी नहीं बढ़ती।
रेलवे ने कोचों को आइसोलेशन केंद्र में तब्दील करने का फैसला खुद ही ले लिया था और यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी। शिवालिक विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष विजय बंसल ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेलवे को आइसोलेशन कोच बनाने से पहले राज्यों से जुड़े स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से उनकी व्यवस्था जान लेनी चाहिए थी। इसके बाद आइसोलेशन कोच बनाने का फैसला लेना चाहिए था। यह सवाल भी आम लोगों के मन में है कि आखिरकार इतने बड़े संकट में एक करोड दस लाख रुपये की लागत से बने इन आइसोलेशन कोचों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। ढकोली निवासी राजेश पठानिया ने बताया कि अगर इनका इस्तेमाल ही नहीं करना था तो इन्हें बनाया ही क्यों गया। अगर समय रहते आइसोलेशन केंद्र बनाने के बजाय अपने घर लौट रहे श्रमिकों में इन पैसों का बंटवारा किया होता तो कोविड के मरीज पूरे देश में नहीं बढ़ते और इनकी संख्या भी नहीं बढ़ती।
आइसोलेशन कोच।
- फोटो : अमर उजाला
रेलवे को मिल सकेंगे 49 अतिरिक्त स्लीपर कोच
अंबाला रेल मंडल ने चंडीगढ़ और कालका के लिए 55 स्लीपर कोच को आइसोलेशन केंद्र बनाया था। इसके लिए स्लीपर कोच की बीच वाली सीट खोलकर हटा दी थी। प्रत्येक कोच में 16 मरीजों को आइसोलेट करने की क्षमता है। कोच के एक ओर के टॉयलेट को स्नान घर बनाया गया था और मरीजों के लिए दो चादरें, एक तौलिया और एक तकिया रखा गया था। ऑक्सीजन सिलेंडर समेत आपात परिस्थितियों में इलाज की अन्य तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं थीं। फिलहाल इनमें से 6 कोच का इस्तेमाल कुंभ मेले के लिए किया जा रहा है। इनके अलावा अगर इस्तेमाल किए जाएं तो रेलवे को 49 अतिरिक्त स्लीपर कोच मिल जाएंगे।
अंबाला रेल मंडल ने चंडीगढ़ और कालका के लिए 55 स्लीपर कोच को आइसोलेशन केंद्र बनाया था। इसके लिए स्लीपर कोच की बीच वाली सीट खोलकर हटा दी थी। प्रत्येक कोच में 16 मरीजों को आइसोलेट करने की क्षमता है। कोच के एक ओर के टॉयलेट को स्नान घर बनाया गया था और मरीजों के लिए दो चादरें, एक तौलिया और एक तकिया रखा गया था। ऑक्सीजन सिलेंडर समेत आपात परिस्थितियों में इलाज की अन्य तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं थीं। फिलहाल इनमें से 6 कोच का इस्तेमाल कुंभ मेले के लिए किया जा रहा है। इनके अलावा अगर इस्तेमाल किए जाएं तो रेलवे को 49 अतिरिक्त स्लीपर कोच मिल जाएंगे।
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आइसोलेशन कोच।
- फोटो : अमर उजाला
कोविड-19 के मरीजों के लिए तैयार किए गए 30 आइसोलेशन कोच जगाधरी में खड़े हैं। चंडीगढ़ में जगह नहीं होने की वजह से इन कोचों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। - अनिल अग्रवाल, रेलवे स्टेशन अधीक्षक चंडीगढ़