मिल्खा सिंह को उड़न सिख का खिताब पाकिस्तान में मिला था। पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने उन्हें उड़न सिख (फ्लाइंग सिख) की पदवी से नवाजा था। साल 1960 में मिल्खा को पाकिस्तान की ओर से लाहौर में दौड़ने का आमंत्रण मिला लेकिन भारत-पाक बंटवारे के बाद हुए दंगों से दुखी मिल्खा सिंह ने निमंत्रण ठुकरा दिया। उनकी आंखों के सामने दंगों में मारे गए लोगों की लाशों के दृश्य घूम रहे थे। पाकिस्तान न जाने की खबर अगले दिन अखबारों की सुर्खियां बनी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने मिल्खा को बुलाया और समझाया कि पुरानी बातें भूलकर लाहौर जाओ। इसके बाद मिल्खा बाघा बार्डर के रास्ते पाकिस्तान पहुंचे। उन्हें खुली जीप में लाहौर ले जाया गया। बताया जाता है कि रास्ते भर सड़क के दोनों तरफ भारी भीड़ थी और उनके हाथों में भारत और पाकिस्तान के झंडे लहरा रहे थे। इसमें उनका मुकाबला एशिया का तूफान नाम से मशहूर पाकिस्तानी धावक अब्दुल खालिक से था। पूरा स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था।
महान मिल्खा सिंह: भारत में नहीं पाकिस्तान में मिला था 'उड़न सिख' का खिताब, रोचक है लाहौर का ये किस्सा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 19 Jun 2021 02:17 AM IST
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