सूर्यग्रहण मेलाः पवित्र ब्रह्मसरोवर में हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई मोक्ष की डुबकी, देखिए तस्वीरें
विज्ञान की दृष्टि से सूर्यग्रहण भले खगोलीय घटना हो मगर प्रचंड ठंड में श्रद्धालुओं ने साबित कर दिया कि युगों पुरानी परंपरा से उन्हें किसी भी दौर में नहीं हटना। यही कारण है कि कड़कड़ाती ठंड के बीच लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। दरअसल सूर्यग्रहण का संयोग 8 बजकर 15 मिनट पर स्पर्श और 10 बजकर 55 मिनट पर मोक्ष की अवधि थी। ठंड पिछले 19 साल के रिकॉर्ड पर थी तो पुरातन संस्कृति में आस्था रखने वाले श्रद्धालु धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के सन्निहित सरोवर और ब्रह्मसरोवर के बर्फ जैसे ठंडे पानी में मोक्ष की डुबकियां लगाने से नहीं चूके। भारी पुलिस प्रशासनिक अमले के बीच नागा साधुओं का शाही स्नान भी हुआ।
पिहोवा रोड श्री पंचदशनामी अखाड़े और थानेसर के श्री पंचायती उदासीन बड़ा अखाड़ा से दो शाही यात्राएं परंपरागत ढंग से निकलीं और सन्निहित एवं ब्रह्मसरोवर तक पारंपरिक तरीके से पहुंची, जहां मोक्ष की अवधि में इन्होंने स्नान किया। यही नहीं गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज, स्वामी मुक्तानंद महाराज, नागा साधुओं, संत सन्यासियों, श्रीमहंत, महामंडलेश्वर व दूसरी परंपराओं के महंतों संतों के अलावा सांसद नायब सैनी, न्यायाधीश डॉ. निलिमा शांगला, पूर्व विधायक डा.पवन सैनी सहित कई गणमान्य लोगों ने भी मोक्ष की डुबकी लगाई। मेले की भीड़ में एक खास चेहरा पड़ोसी देश नेपाल से आई 110 वर्षीया देबादेवी का भी रहा, जिन्होंने परिवार संग मोक्ष की डुबकी लगाई।
प्रशासन के दावे के अनुसार भले संख्या 15 लाख ना रही हो, मगर बगैर ब्रांडिंग के जितनी संख्या श्रद्धालुओं की यहां दिखी वो मौसम की मार के आगे काफी ज्यादा थी। तड़के पांच बजे से ही ब्रह्मसरोवर पर चहल-पहल दिखने लगी थी। एक ओर ड्यूटी पर तैनात स्टाफ तो दूसरी ओर आस्था के समंदर में डुबकी लगाने वालों का रेला सरोवरों की ओर कूच करते दिखा। उत्सवों और मेलों की नगरी कुरुक्षेत्र में इस बार 10 साल बाद सूर्यग्रहण मेले का संयोग बना है। स्थानीय पंडा समाज की माने तो पहले के दौर और वर्तमान में काफी अंतर आ चुका है। पहले देश-दुनिया में कहीं भी बसने वाले लोग अपने कुल पुरोहितों और ब्राह्मणों के अलावा पंचांग में सूर्यग्रहण जैसे ऐसे संयोग के बारे में जानकारी रखते थे, मगर वर्तमान दौर में लोग अपनी संस्कृति से थोड़ा दूर हुए हैं।
भागदौड़ की जीवन शैली में लोगों का अपने पुराने रीति-रिवाजों और मान्यताओं से ध्यान घटा है। ऐसे में पुरानी परंपराओं और युगों-युगों से चल रहे ऐसे मेलों की जागृत रखने के लिये नये दौर के माध्यमों से इसका प्रचार प्रसार होना चाहिये। सूर्यग्रहण पर सन्निहित और ब्रह्मसरोवर के पवित्र जल में नागा साधुओं और अन्य संत जनों ने आस्था की डुबकी लगाई। इस मौके पर नागा साधुओं ने भागवान दत्तात्रेय और चांदी की चरण पादुका और शाही छड़ी को परंपरा अनुसार सरोवर में स्नान कराया। पिहोवा रोड स्थित श्रीपंच दशनामी अखाड़ा और श्री पंचायत उदासीन बड़ा अखाड़ा से शाही यात्राएं बैंड बाजों के साथ परंपरागत ढंग से रवाना हुई।

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