वर्ल्ड विंटर स्पेशल ओलंपिक में दो स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले साइक्लिस्ट राजवीर सिंह का लोहड़ी की रात पंजाब के लुधियाना के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। राजवीर सिंह का लुधियाना के दीपक अस्पताल में कई दिनों से इलाज चल रहा था। इस दौरान पूरा परिवार पाई-पाई को मोहताज हो गया लेकिन उनकी सुध लेने के लिए कोई आगे नहीं आया।
मुफलिसीः ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट की मौत... इलाज में बिके गहने, घर हुआ गिरवी
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राजवीर सिंह के परिवार वाले इलाज के लिए घर का सबकुछ बेच चुके थे। एक संस्था की मदद से राजवीर को इलाज के लिए निजी अस्पताल दाखिल कराया था। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। राजवीर की मौत के बाद खेल जगत में शोक का माहौल है। खेल जगत से जुड़े लोगों ने राजवीर की मौत पर दुख जताया है। जुलाई 2020 में सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने घोषणा की थी कि पंजाब सरकार राजवीर सिंह को लाखों रुपये देगी। इसके बावजूद अब तक उनके परिवार को कोई मदद नहीं मिली।
बता दें कि 2015 में अमेरिका के लॉस एंजिल्स में हुए वर्ल्ड विंटर स्पेशल ओलंपिक में राजवीर सिंह ने दो स्वर्ण पदक जीते थे। लुधियाना के गांव सियाड़ निवासी बलवीर सिंह ने बताया कि बड़ा बेटा राजवीर सिंह जब पांच साल का था तो बीमार हो गया। उसका इलाज पीजीआई में करवाया गया और पेट का ऑपरेशन हुआ। वहां के डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि अब यह सामान्य बच्चों की तरह नहीं रह पाएगा। लेकिन उन्हें अपना बेटा कभी दिव्यांग नहीं लगा।
घर गिरवी रख लिया तीन लाख का कर्ज, पत्नी ने बेचे गहने
राजवीर सिंह के पिता बलवीर सिंह ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं। उन्हें प्रतिदिन 350 रुपये दिहाड़ी मिलती है। जनवरी में राजवीर सिंह की सेहत खराब हो गई थी। लुधियाना के सीएमसी अस्पताल के डॉक्टरों ने सिर का ऑपरेशन किया। इसके बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ। बीते सप्ताह हालत ज्यादा खराब होने के कारण राजवीर को दीपक अस्पताल में भर्ती कराया गया।
बेटे के इलाज के लिए घर गिरवी रखकर तीन लाख रुपये का कर्ज लिया था। घर में जो गहने थे, उन्हें भी बेच दिया। इसके बाद मनुख्ता दी सेवा संस्था के प्रधान गुरप्रीत सिंह मदद कर रहे थे। इलाज पर संस्था की तरफ से खर्च किया जा रहा था। तंगी के कारण छोटे बेटे आकाशदीप सिंह की पढ़ाई भी छूट गई। 25 जुलाई 2020 को सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था कि राजवीर सिंह को पंजाब सरकार अन्य खिलाड़ियों की तरह उचित इनाम देगी लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला।