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कभी गुरुद्वारे में लंगर खाकर मिटाई भूख, टीम इंडिया में हुआ शामिल अब IPL में शतक ठोक रचा इतिहास
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 14 May 2018 05:23 PM IST
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सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ अपने होम ग्राउंड पर गुरुवार शाम आईपीएल 2018 के एक मुकाबले में ऋषभ पंत ने कमाल कर दिया। 63 गेंदों पर नाबाद 128 रन ठोंकते हुए ऋषभ ने आईपीएल में अपना पहला शतक ठोंकते हुए कई रिकॉर्ड्स ध्वस्त कर डाले। टीम इंडिया के लिए बल्लेबाजी कर चुके इस 20 वर्षीय युवा विकेटकीपर बल्लेबाज को ये कामयाबी ऐसी ही हाथ नहीं लगी, इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत और संघर्ष किया है। अच्छे प्रदर्शन के बल पर भारतीय टी-20 क्रिकेट टीम में जगह बनाने वाले ऋषभ पंत को रणजी क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज शतक जमाने वाले बल्लेबाज के नाम से भी जाना जाता है।
U-19 टीम इंडिया कप्तान इशान किशन और ऋषभ पंत (बाएं)
इस युवा बल्लेबाज की असल प्रतिभा अंडर-19 विश्व कप के दौरान सामने आई। 2016 में बांग्लादेश में खेले गए उस वि्श्व कप में ऋषभ पंत का बल्ला जमकर बोला था। हालांकि फाइनल में युवा टीम इंडिया को वेस्टइंडीज के हाथों हार झेलनी पड़ी थी। मगर टीम इंडिया को ऋषभ पंत में भविष्य का उभरता सितारा नजर आ चुका था। इसके बाद आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम में पंत को जगह मिली तो 2016 में उन्होंने अपना पहला रणजी सीजन खेला।
इस कामयाबी से पहले ऋषभ पंत ने काफी बुरे दिन भी देखें। एक दौर था जब पंत को गुरूद्वारे में रात गुजारनी पड़ती थी और वहीं लंगर का खाना खाकर वह क्रिकेट की प्रेक्टिस करने जाया करते थे। फरवरी 2017 में टीम इंडिया के लिए महज 19 साल 120 दिन की उम्र में इंग्लैंड के खिलाफ हुए टी-20 मैच में डेब्यू करने से पहले पंत ने बहुत कुछ सहा और कड़ी मेहनत की। इसके बाद जाकर वह आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं।
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दिल्ली के मशहूर क्रिकेट क्लब सोनेट में ही पंत ने क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। कई इंटरनेशनल खिलाड़ी देने वाले इस क्लब के कोच तारक सिन्हा ने बताया था कि वो एक टैलेंट हंट कराते थे जिसके बारे में पंत ने सुना था, जिसके बाद वह रूड़की से दिल्ली सिर्फ इस टैलेंट हंट में भाग लेने चला आया।
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दिल्ली शहर में उनकी जान पहचान का कोई नहीं था, इसलिए वह मोतीबाग गुरूद्वारे में ही रूकते थे वहीं लंगर खाकर प्रेक्टिस के लिए आते-जाते। सोनेट क्लब में सिलेक्ट होने के बाद पंत कुछ दिन तक गुरूद्वारे से ही आना जाना करते थे। कई महीनों तक ऐसा चला धीरे-धीरे पंत ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अपना नाम बना लिया।