अरुण जेटली के निधन के बाद टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने भावुक ट्वीट किया है। सहवाग ने जेटली की मौत के बाद अपने क्रिकेटिंग करियर के राज से पर्दा उठाया। वीरू ने 20 साल पुराना वाकया और उससे जुड़ी घटना याद की।
जेटली के निधन के बाद सहवाग का खुलासा, 20 साल बाद बोले- टीम में नहीं मिलती जगह
सहवाग ने 20 साल पुराने इस राज से पर्दा उठाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। जेटली की मौत पर भावुक ट्वीट करते हुए सहवाग ने अपने और कई नवोदित क्रिकेटर्स के लिए किए गए जेटली के कामों को याद किया। साथ-साथ ऐसी बात बताई, जिससे शायद ही कोई क्रिकेट फैन या आम आदमी परिचित हो। सहवाग की बातों पर गौर करें तो उनका साफ तौर पर यही कहना है कि बिना जेटली शायद वह इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू नहीं कर पाते।
सहवाग ने लिखा कि,
एक वक्त था, जब दिल्ली के क्रिकेटरों को हाई लेवल तक जाने का चांस नहीं मिल पाता था, लेकिन डीडीसीए की लीडरशिप के दौरान उन्होंने दिल्ली के क्रिकेटरों को यह मौके दिलवाए। वह खिलाड़ियों की जरुरतें सुनते थे और उन्हें हल भी करते थे। मैं निजी तौर पर उनके साथ एक बेहद खूबसूरत रिलेशनशिप शेयर करता हूं। मेरी प्रार्थना और संवेदना उनके परिवार के साथ है।
अरुण जेटली खेल प्रेमी इंसान थे। बीसीसीआई के उपाध्यक्ष भी रहे। इंडियन प्रीमियर लीग में स्पॉट फिक्सिंग कांड के बाद उन्हें एन श्रीनिवासन को हटाकर अध्यक्ष बनाने की बात भी चली, लेकिन बोर्ड में मचे उथल-पुथल के माहौल में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दिल्ली राज्य क्रिकेट संघ के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने दिल्ली के युवा खिलाड़ियों बेहतरी के लिए काम किया, उनकी दिक्कतों को सुलझाया, जिसके कारण गंभीर, सहवाग, शिखर धवन, आशीष नेहरा और विराट कोहली जैसे खिलाड़ी टीम इंडिया के लिए खेले।
अरुण जेटली के निधन पर गौतम गंभीर गमगीन हो गए और बेहद ही भावुकता के साथ ट्वीट कर लिखा,
एक पिता हमें बोलना सिखाता है, लेकिन एक पिता तुल्य इंसान बात करना सिखाता है। एक पिता हमें को चलना सिखाता है लेकिन एक पिता तुल्य इंसान हमें मार्च करना सिखाता है। एक पिता आपको एक नाम देता है, लेकिन एक पिता तुल्य इंसान आपको पहचान देता है। मेरे पिता श्री अरुण जेटली जी के साथ मेरा एक हिस्सा चला गया। श्रद्धांजलि सर।