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एल. शिवरामकृष्णन का दर्दनाक अनुभव: कैसे लगी थी शराब की लत, क्यों बोले- नींद खुलती थी तो लगता था कि मर जाऊंगा?

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: Swapnil Shashank Updated Wed, 25 Mar 2026 01:11 PM IST
सार

लक्ष्मण शिवरामकृष्णन के ये व्यक्तिगत अनुभव क्रिकेट की दुनिया में नस्लवाद और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों की गंभीरता को उजागर करते हैं। यह दर्शाता है कि कैसे बाहरी रंगभेद और भेदभाव एक व्यक्ति के आत्म-सम्मान, मानसिक स्थिरता और जीवन के प्रति दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं।

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'Whenever I was awake I thought I was going to die'; Shivaramakrishnan on Depression, Liquor habits and racism
लक्ष्मण शिवरामकृष्णन - फोटो : Twitter
भारतीय क्रिकेट के पूर्व लेग-स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने अपने खेल करियर के दौरान और उसके बाद झेले नस्लीय भेदभाव और मानसिक पीड़ा के बारे में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे एक होटल के गेटकीपर ने रंग के आधार पर उन्हें भारतीय टीम का सदस्य मानने से इनकार कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि कैसे इस तरह की घटनाओं ने उनके आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला और उन्हें शराब की लत लग गई थी। शिवरामकृष्णन के इन चौंकाने वाले खुलासों ने भारतीय क्रिकेट को हिला कर रख दिया है।
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'Whenever I was awake I thought I was going to die'; Shivaramakrishnan on Depression, Liquor habits and racism
लक्ष्मण शिवरामकृष्णन - फोटो : Twitter
होटल में अपमान, रंग देखा और मना कर दिया
शिवरामकृष्णन ने बताया कि जब वह केवल 16 वर्ष के थे, तब मुंबई के एक होटल के गेटकीपर ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया था। वह भारतीय टीम का हिस्सा थे, लेकिन गेटकीपर ने उनके रंग और उम्र को देखकर कहा कि वे भारतीय क्रिकेटर नहीं हो सकते। उन्हें एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा था। शिवरामकृष्णन ने बताया कि जब तक टीम के एक साथी ने आकर उनकी पहचान की पुष्टि नहीं की, तब तक वह बाहर खड़े रहे। इस घटना ने उन पर गहरा मानसिक घाव छोड़ा। उन्होंने कहा, 'इसके बाद मुझे एहसास हुआ कि मुझे चाबियां अपने साथ ले जानी चाहिए। लेकिन मैं गेट के पास जाते ही कांपने लगता था, इस डर से कि कहीं मुझे फिर से अस्वीकार न कर दिया जाए और बाहर न निकाल दिया जाए।'

यह भी पढ़ें: Racism in Cricket: भारत के पूर्व क्रिकेटर का बड़ा आरोप, बोले- भारतीय खिलाड़ी ही मुझ पर करते थे नस्लीय टिप्पणी
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लक्ष्मण शिवरामकृष्णन - फोटो : Twitter
आत्म-सम्मान की कमी और अंधेरी रातें
इन घटनाओं के कारण, शिवरामकृष्णन ने खुद को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पाया जिसका आत्म-सम्मान बहुत कम था। उन्होंने कहा, 'इन सब चीजों ने मुझे एक व्यक्ति के रूप में बहुत कम आत्म-सम्मान की स्थिति में डाल दिया। और जब आपके पास इतनी कम उम्र में इतना कम आत्म-सम्मान होता है, तो आत्मविश्वास की बात करना, आत्मविश्वास बनाना बहुत मुश्किल होता है। मैं हमेशा हर बात को भूलना, भूलना और भूलना चाहता था, लेकिन आपके मन में यह हमेशा जड़ जमाए रहता है और बाहर आ ही जाता है।' उन्होंने बताया कि वे पूरी तरह से टूट चुके थे और खुद को आईने में देखना नहीं चाहते थे। उन्हें नींद लाने के लिए शराब का सहारा लेना पड़ता था। जब भी वह जागते थे, उन्हें लगता था कि वह मरने वाले हैं। शराब ही वह एकमात्र चीज थी जो उन्हें सोने में मदद करती थी।
'Whenever I was awake I thought I was going to die'; Shivaramakrishnan on Depression, Liquor habits and racism
लक्ष्मण शिवरामकृष्णन - फोटो : Twitter
शिवरामकृष्णन को लगी थी शराब की आदत
आईपीएल के दौरान दुबई की यात्राओं का जिक्र करते हुए, शिवरामकृष्णन ने बताया कि कैसे तेज रफ्तार वाहनों में यात्रा करते समय उनके मन में अचानक दरवाजे खोलकर कूद जाने का ख्याल आता था। उन्होंने कहा, 'कभी-कभी जब हम दुबई में आईपीएल के दौरान यात्रा कर रहे होते थे, तो कोई गति सीमा नहीं होती थी। अगर गाड़ी बहुत तेज चलती थी, तो मेरे दिमाग में कुछ कहता था कि बस दरवाजा खोलो और कूद जाओ। किसी तरह, कुछ ने मुझे ऐसा कुछ भी मूर्खतापूर्ण करने से रोक दिया।'
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लक्ष्मण शिवरामकृष्णन - फोटो : Twitter
'आंखें खोलते ही नींद उड़ जाती थी'
रात में उन्हें हैलूसिनेशन (मतिभ्रम) भी होते थे। वे बताते हैं, 'आप आंखें बंद करते हैं, आपको ऐसी छवियां दिखती हैं जिनकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। सब कुछ बहुत डरावना होता है। आप आंखें खोलते हैं, तो कुछ नहीं होता। लेकिन आप इतने थके हुए होते हैं कि सोना चाहते हैं। आप आंखें बंद करते हैं - भयानक चीजें। आंखें खोलते हैं - कुछ नहीं। फिर से आप आश्वस्त हो जाते हैं कि कुछ भी गलत नहीं है। आंखें बंद करते हैं। थोड़ी देर के लिए। फिर से। आंखें खोलते हैं। तो आपकी नींद उड़ जाती है।' शराब ने उनके डिप्रेशन को और बढ़ा दिया और डिप्रेशन ने शराब पीने की लत को। उन्होंने कहा, 'हर बार आप खुद को और कसकर उलझाते जाते हैं। और आपके पास बाहर की पूरी दुनिया कहती है, देखो, हमने तुमसे कहा था। शराब ही कारण है। हमने तुमसे कहा था।'
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