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अमर उजाला संवाद 2026: जब एक मंच पर जुटीं देश की नामचीन हस्तियां, विचारों का संगम, तस्वीरों में देखें खास पल
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
Published by: Renu Saklani
Updated Thu, 25 Jun 2026 03:02 PM IST
सार
अमर उजाला संवाद 2026 में राजनीति, फिल्म, खेल, अध्यात्म और व्यापार जगत की चर्चित हस्तियां एक मंच पर जुटीं। देवभूमि में सजे इस विचार मंच पर विकास, रोजगार, स्टार्टअप और भविष्य के रोडमैप जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर मंथन हुआ। तस्वीरों में देखिए अमर उजाला संवाद 2026 के यादगार पल, खास सत्र और चर्चित चेहरों की झलक।
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अमर उजाला संवाद 2026
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला संवाद के मंच पर देश व दुनियाभर में अलग पहचान रखने वाली शख्सियतों ने बेबाकी से अपनी बातें रखीं। संवाद उत्तराखंड में देवभूमि के विकास, स्टार्टअप, युवाओं के लिए रोजगार समेत भविष्य के रोडमैप पर मंथन के लिए राजनीति, अध्यात्म, फिल्म, खेल और व्यापार जगत की हस्तियां जुटीं। सभी ने अपने जीवन के मूल्यवान अनुभव साझा किए और भविष्य का मार्ग दिखाया।
अमर उजाला संवाद के चौथे संस्करण में आध्यात्म, फिल्म, खेल, विकास से लेकर निवेश और स्वास्थ्य पर मंथन हुआ। यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भविष्य के उत्तराखंड के रोडमैप को बताया तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्वस्थ भारत के संकल्प को दोहराया। फिल्मों पर बात पर्दे के जमील जमाली (राकेश बेदी) ने अपने चिरपरिचित अंदाज में की। बातों बातों में बेदी कभी मजाकिया अंदाज में नजर आए तो अपने संघर्ष और फिल्म जगत की बारिकियों पर उन्होंने गंभीर मुद्रा में अपनी बात रखी। आगामी कुंभ पर संतों से लेकर शासन के अधिकारियों ने तैयारियों को लोगों को बताया।
सुरक्षित उत्तराखंड बनाने का संकल्प
होटल गेटवे के सभागार में सुबह नौ बजे से ही अपने पसंदिदा लोगों को सुनने के लिए दर्शकों की भीड़ जमा होना शुरू हो गई। सबसे पहले सुप्रभात देवभूमि में आध्यात्मिक वक्ता देवी चित्रलेखा ने आध्यात्म की शक्ति को सरलता से बताया। उन्होंने आम जीवन के विभिन्न उदाहरणों से भगवान और मनुष्य के रिश्ते को समझाया। उत्तराखंड के भविष्य पर बात कल आज और कल विषय पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की। उन्होंने सुरक्षित उत्तराखंड बनाने का संकल्प दोहराया।
मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने आगामी कुंभ में शासन प्रशासन की तैयारियों के संबंध में संतों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा की। हरिद्वार कुंभ को सफल बनाने के लिए सरकार की इच्छाशक्ति पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। इस बार की थीम हरित उत्तराखंड थी तो इसके लिए सौर उर्जा पर बात करने के लिए ऊर्जा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम उपस्थित थे। उनके साथ सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमियों और अन्य अधिकारियों ने सौर उर्जा के क्षेत्र में उत्तराखंड के भविष्य को बताया।
राष्ट्र रक्षा की बात करने के लिए आए सेवानिवृत्त लेफि्टनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता ने अपने जीवन के संघर्ष से लेकर वर्तमान में चल रहे घटनाक्रमों और भविष्य के भारत की रक्षा तैयारियों पर बेबाकी से अपनी बात रखी। शिक्षा, एआई और भविष्य विषय पर भी विशेषज्ञों के साथ चर्चा की गई। इसके बाद पिच की गपशप पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद के साथ कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने की। मोहम्मद कैफ ने गिरते फिल्डिंग के स्तर चिंता जताई और कई मामलों में बीसीसीआई से सुधारात्मक प्रयासों की अपेक्षा भी की। इस दौरान सोशल मीडिया से स्टारडम, नए दौर का सिनेमा और ओटीटी जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अमर उजाला के एमडी तन्मय माहेश्वरी
- फोटो : अमर उजाला
किस्से, किरदार और सिनेमा में अभिनेता राकेश बेदी ने साझा किए अनुभव
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के किस्से, किरदार और सिनेमा विषय वाले सत्र में बॉलीवुड अभिनेता राकेश बेदी ने अपने फिल्मी और निजी जीवन से जुड़े कई दिलचस्प और भावुक अनुभव साझा किए। बातचीत के दौरान उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि बीवी को खुश करना सबसे मुश्किल काम है और यह भी जोड़ा कि एक कलाकार को कभी-कभी अपने ही घर में छछूंदर बनकर रहना पड़ता है। इस सत्र का संचालन आरजे प्रवीण ने किया। अपनी सुपरहिट फिल्म धुरंधर के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि फिल्म में उनके जासूस के किरदार के बारे में उनकी पत्नी के अलावा किसी को जानकारी नहीं थी। प्रीमियर के दौरान जब यह सीन सामने आया तो उनकी दोनों बेटियां दूसरे हॉल में फिल्म देख रहीं थीं और यह जानकर भावुक हो गईं। उन्हें गुस्सा भी आया कि पापा इतना बड़ा किरदार निभा रहे थे और हमें बताया भी नहीं। हम एक ही घर में रहते हैं और पापा ने हमें बताया ही नहीं। बेदी ने स्वीकार किया कि एक अभिनेता के लिए अपने किरदार को छिपाकर रखना चुनौतीपूर्ण होता है।
परदे के पीछे का जासूस : जब किरदार बना राज और तालियों ने बदल दी जिंदगी
इस फिल्म के बाद आपकी जिंदगी कितनी बदल गई इस सवाल पर अभिनेता राकेश बेदी ने कहा कि यह सवाल आजकल लोग मुझसे पूछ रहे हैं लेकिन सच यह है कि मेरी जिंदगी बहुत बार बदली। मुझे अभी भी याद है जब मैं कुछ नहीं था। इसी बीच मेरी एक फिल्म के बाद जब मैं मुंबई में गाड़ी से बाहर आया तो लोगों ने मेरा ऑटोग्राफ लेना शुरू कर दिया तो हैरान हो गया कि अचानक यह क्या हो गया। कल तक तो मुझे कोई नहीं जान रहा था आज सब मेरा ऑटोग्राफ क्यों ले रहे हैं तो पता चला मेरी एक फिल्म काफी हिट हो गई। उसके बाद ऐसा बहुत बार हुआ लेकिन बदलते समय के साथ हमारी पहुंच भी ज्यादा लोगों तक पहुंची है। यह फिल्म सुपर-डुपर हिट है।
उन्होंने अपने काम को लेकर एक दिलचस्प दृष्टिकोण भी साझा किया, कहा कि मैंने अपनी फिल्म एक बार भी नहीं देखी। अगर मैं बार-बार अपना काम देखूंगा तो दूसरों का काम नहीं देख पाऊंगा। जब भी मैं यह फिल्म देखूंगा उसे सिर्फ एक दर्शक की तरह देखना चाहता हूं। ऐसा ही हाल टीवी धारावाहिक का भी रहा। मैंने करीब सात-आठ हजार टीवी धारावाहिक किए हैं उसमें से सिर्फ 40-50 ही देखे हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि उनकी फिल्म धुरंधर के बाद उनकी पत्नी उनसे काफी परेशान हैं और अक्सर उनसे पूछती हैं कि आखिर तुम्हारे कितने बच्चे हैं।
कलाकार को हर दिन कुछ सिखाता है थिएटर
थिएटर के महत्व पर बात करते हुए बेदी ने कहा कि उन्होंने कभी थिएटर नहीं छोड़ा, क्योंकि यही वह माध्यम है जो कलाकार को हर दिन कुछ नया सिखाता है। यहां जिंदगी के बहुत तजुर्बे मिलते हैं। अपने नाटक मसाज के बारे में कहा कि दुनिया के सबसे महानतम नाटककार विजय तेंदुलकर के लिखे इस नाटक का मंचन कर रहे थे। यह नाटक बड़े शहर में एक आम आदमी के संघर्ष और सपनों की एक हास्यपूर्ण और मार्मिक कहानी है। नाटक देखने के बाद 80 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि वह अपनी जिंदगी से बेहद परेशान थे और आत्महत्या तक का विचार कर चुके थे लेकिन नाटक देखने के बाद उनका नजरिया बदल गया। तब समझ आया कि कला सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि किसी की जिंदगी भी बदल सकती है। बताया कि बुजुर्ग ने अपने आत्महत्या करने वाले फैसले को बदला और मेज पर खड़े होकर तालियां बजाईं। वह मेरे लिए सबसे खास पल था।
अभिनेता राकेश बेदी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अभिनेता राकेश बेदी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया। इस मौके पर अभिनेता बेदी ने अपनी खुशी का इजहार भी किया।
उत्तराखंड से है पुराना नाता
अपनी बातचीत की शुरुआत में अभिनेता राकेश बेदी ने कहा कि उत्तराखंड से उनका पुराना नाता है। बचपन में वह अक्सर देहरादून आया करते थे और देहरादून में बहुत ज्यादा बचपन गुजारा है। डोईवाला में उनके दादा का कारोबार हुआ करता था। उस दौरान भी उनका देहरादून आने का सिलसिला रहता था। यहां पर लीची के बाग हुआ करते थे जब तक माली डंडा मारकर नहीं भगाता था हम बाग से नहीं निकलते थे।
पुलिस के सामने करना पड़ गया था नाटक का मंचन
अपने थिएटर के दिनों की बात करते हुए अभिनेता राकेश बेदी ने बताया कि शुरुआती दिनों में खुद ही पोस्टर छापकर लगाते थे। एक रोज सर्दियों की रात में दिल्ली की सड़कों पर वह अपने दोस्त के साथ अपने नाटक जहर के पोस्टर लगाने निकले थे। सुनसान सड़क एक खाली दीवार पर वह पोस्टर लगा ही रहे थे कि सामने से आती पुलिस की गाड़ी रुकी और पुलिसकर्मी ने बंदूक निकाली और पूछा कौन हो आप लोग। हम पुलिस को देख डर गए और हमने बताया कि हम कलाकार हैं और इस नाम से हमारा नाटक है। जब वह नहीं माने तो हमने फिर उस नाटक का एक सीन करके उन्हें दिखाया और तब हमें पुलिस ने छोड़ा।
50 पैसे में छह केले खाकर गुजारी थी रात
अभिनेता राकेश बेदी ने अपने संघर्ष के दिनों की बात करते हुए बताया कि एक समय ऐसा आया कि खाने के लिए पैसे नहीं थे लेकिन मैंने तय किया था कि मेरी मजबूरियां और जो सीमा है उन्हें परिवार तक कभी नहीं जाने दूंगा। यही वजह रही कि मैंने अपने माता-पिता को कभी नहीं बताया कि एक दिन जब पैसे नहीं थे तो 50 पैसे के छह केले खाकर भी वो सोए हैं। उस समय मैंने यह तय किया कि इस वक्त मेरे लिए क्या महत्वपूर्ण है। ये आज की भूख या फिर मेरा कॅरिअर। इस दौरान उन्होंने एक शेर माना कि लौट कर आना है नामुमकिन, गर पलटा बयांबा से बहारें साथ लाऊंगा... सुनाते हुए कहा कि अगर आप अपने लक्ष्य से फोकस हटा देंगे तो बहुत जल्दी हार जाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि जो काम आप कर रहे हैं वह आना चाहिए इससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
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केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को सम्मानित करते अमर उजाला के एमडी तन्मय माहेश्वरी और प्रेसिडेंट वरुण माह
- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अमर उजाला संवाद में खुलकर की बात
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि स्वस्थ भारत ही विकसित भारत की नींव है। हमारी सरकार 61 करोड़ देशवासियों को आयुष्मान योजना से सीधे पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज दे रही है। अब जहां सियासत के मायने बदल गए हैं तो वहीं जनता के बीच की जागरूकता व सरकार की नीतियों का असर ही है कि लोग एंटीबायोटिक खाने के बजाए परहेज और पौष्टिक आहार पर फोकस कर रहे हैं। बुधवार को हरिद्वार बाईपास स्थित एक होटल में आयोजित अमर उजाला संवाद उत्तराखंड में केंद्रीय मंत्री नड्डा ने स्वस्थ भारत का संकल्प विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत अब एक नई विकास यात्रा पर अग्रसर है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी प्राप्त हो सकता है, जब देश का नागरिक स्वस्थ हो, क्योंकि स्वस्थ शरीर से ही बेहतर विचार प्रक्रिया जन्म लेती है।
स्वस्थ भारत ही विकसित भारत की नींव, 61 करोड़ को दे रहे आयुष्मान योजना का लाभ
नड्डा ने पिछले 10-12 वर्षों में देश की राजनीति में आए बड़े बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले की सरकारें तुष्टिकरण और परिवारवाद में सिमटी थीं लेकिन आज की सरकार परफॉर्मेंस के आधार पर चुनी जाती है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने एक नया पॉलिटिकल कल्चर पैदा कर दिया है, अब एंटी इनकंबेंसी नहीं, बल्कि प्रो-इनकंबेंसी (सरकार का दोबारा चुनकर आना) ही देखी जाती है। उन्होंने कहा कि एक समय जनता के मन में भाव होता था कि कुछ नहीं बदलने वाला। सरकारें आएंगी और जाएंगी लेकिन पिछले 10-12 वर्षों में राजनीतिक सोच प्रक्रिया बदल गई है। आज आम नागरिक के मन में यह विश्वास है कि हम कर सकते हैं और हम करेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारी पूर्व की सरकारों की नीतियों के कारण ही मानसिक स्वास्थ्य लगातार नजरअंदाज होता रहा है। हमें मालूम है कि मानसिक बीमारी किसी व्यक्ति ही नहीं पूरे परिवार के लिए कितनी मुसीबत होती है। इसके लिए हमने टेलीमेडिसिन शुरू किया। पोलियो आज अमेरिका जैसे देश में लौटकर आ रहा है लेकिन हमारे अभियान का असर ही है कि आज तक पोलियो बेअसर है। हर बच्चे को लगातार पोलियो की वैक्सीन दी जा रही है। आज बच्चों और माताओं को वैक्सीन कोविन एप के माध्यम से दी जा रही है।
2017 की स्वास्थ्य नीति, आरोग्य मंदिर ने बदली सूरत
नड्डा ने कहा कि 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति ने बुनियादी ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने बताया कि अब प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शियरी हेल्थ केयर को एक-दूसरे से जोड़कर एक बैलेंस्ड अप्रोच अपनाई गई है। देशभर में एक लाख 81 हजार से अधिक आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं, जहां प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य, आंखों व दांतों की जांच और कैंसर-डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों की स्क्रीनिंग की जा रही है। आयुष्मान योजना से महंगी सर्जरी (जैसे बाईपास) का बोझ आम आदमी पर कम हुआ है। अमृत सेंटर्स और जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से कैंसर समेत हजारों दवाएं आधी कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि कभी केवल एक एम्स था लेकिन आज देश में 23 एम्स काम कर रहे हैं। मेडिकल सीटों की संख्या 1.20 लाख तक पहुंच गई है।
आगे बढ़ रहा उत्तराखंड
उत्तराखंड का जिक्र करते हुए नड्डा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य तेजी से मुख्यधारा में शामिल हुआ है। उन्होंने एम्स ऋषिकेश में क्रिटिकल केयर ब्लॉक, ऊधमसिंह नगर में एम्स के सैटेलाइट सेंटर और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में सीटों की बढ़ोतरी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में उड़ानों की बढ़ती संख्या विकास का स्पष्ट प्रमाण है।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कलाकार राकेश बेदी
- फोटो : अमर उजाला
देवभूमि का देवत्व बचा नई पीढ़ी को सुरक्षित उत्तराखंड देना हमारी प्राथमिकता : सीएम धामी
अमर उजाला संवाद में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के भविष्य, विकास के मॉडल, चुनौतियों और कड़े फैसलों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनका संकल्प राज्य के मूल स्वरूप और देवत्व को कायम रखते हुए इसे आधुनिकता और विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित उत्तराखंड सौंपना हमारी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड में इकोलॉजी, इकोनॉमी और टेक्नोलॉजी का समन्वय हमारा मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि हमारा विकास मॉडल अगले 25 से 50 साल को ध्यान में रखकर बनाया गया है। राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हम आपदाओं से सबक लेकर सुरक्षित और स्थायी विकास की ओर बढ़ रहे हैं। सीएम ने अवैध अतिक्रमण और अवैध कब्जे के खिलाफ जारी अभियान को भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि यह किसी को टारगेट करने के लिए नहीं बल्कि देवभूमि के स्वरूप को बचाने के लिए है। अभी तो ये ट्रेलर था, आगे और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
रिवर्स पलायन बदलने लगा है पहाड़ की सूरत
एक सवाल के जवाब में चारधाम यात्रा को आस्था और श्रद्धा का प्रतीक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यात्रियों की सुगमता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ऑल वेदर रोड और मास्टर प्लान के बाद यात्रा सुगम हुई है। इस साल यात्रा ने रिकॉर्ड कायम किया है। अब राज्य में 12 महीने पर्यटन की संभावनाएं विकसित हो रही हैं। रिवर्स पलायन पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना, होम स्टे व राज्य की अन्य योजनाओं ने गांवों की तस्वीर बदल दी है, जिससे 44 प्रतिशत लोग वापस अपने गांवों की ओर लौटे हैं।
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अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के दौरान डमरू बजाते डमरू दल के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
सख्त नकल कानून से व्यवस्था पर बढ़ा भरोसा
युवाओं और रोजगार के सवाल पर मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट कहा कि पिछले चार वर्षों में प्रदेश में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हमने देश का सबसे सख्त नकल कानून लागू किया है। बिना पर्ची-बिना खर्ची के 33,000 नियुक्तियां दी हैं। 100 से अधिक नकल माफियाओं को जेल भेज हमने व्यवस्था के प्रति युवाओं का विश्वास बहाल किया है।
अंकिता मामले पर भावुक होकर बोले, राजनीति नहीं सख्त कार्रवाई
अंकिता भंडारी प्रकरण पर सीएम धामी ने भावुक होते हुए कहा कि सरकार ने घटना के तत्काल बाद एसआईटी का गठन किया और आरोपियों को कड़ी उम्रकैद की सजा दिलाई है। उन्होंने बताया कि परिवार की मांग पर मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश भी की गई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
यूसीसी और मदरसों में सुधार
यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को एक भारत-श्रेष्ठ भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए सीएम ने कहा कि यह पूरे देश के लिए एक नजीर बनेगा। वहीं, मदरसों में सुधार और मदरसा एक्ट समाप्त करने के फैसले पर उन्होंने स्पष्ट किया कि देवभूमि में शिक्षा के मंदिरों में आधुनिक शिक्षा अनिवार्य है। उन्होंने ये भी कहा कि तमाम ऐसे मदरसे संचालित हो रहे थे, जिनके माध्यम से अवैध रूप से लोग यहां बस रहे थे। 250 से ज्यादा मदरसों की सरकार जांच करा रही है। अब मदरसे उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेकर आधुनिक पाठ्यक्रम ही पढ़ाएंगे।
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