{"_id":"67c3c9e75d7fbdc79d0f10ad","slug":"badrinath-dham-where-conches-are-not-blown-due-to-fear-of-avalanches-hammers-are-being-used-there-2025-03-02","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Badrinath: हिमस्खलन के डर से जहां नहीं बजता है शंख, वहां चल रहे हथौड़े...माणा हादसे पर वैज्ञानिकों की चिंता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Badrinath: हिमस्खलन के डर से जहां नहीं बजता है शंख, वहां चल रहे हथौड़े...माणा हादसे पर वैज्ञानिकों की चिंता
प्रमोद सेमवाल, बदरीनाथ (चमोली)
Published by: अलका त्यागी
Updated Sun, 02 Mar 2025 08:57 AM IST
सार
Badrinath Dham: वैज्ञानिकों का मानना है कि माणा घाटी बेहद संवेदनशील है। मौजूदा समय में बदरीनाथ मास्टर प्लान के साथ ही सड़कों के निर्माण में हथौड़े से लेकर जेसीबी तक गरज रही है।
विज्ञापन
1 of 5
बदरीनाथ
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
बदरीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित है। सर्वविदित है कि विष्णु भगवान को शंख प्रिय है, लेकिन बदरीनाथ मंदिर में शंख ध्वनि वर्जित है। इसके धार्मिक के साथ ही वैज्ञानिक कारण भी हैं। कहा जाता है कि शंख ध्वनि के कंपन से हिमस्खलन न हो जाए, इसके लिए मंदिर में शंख नहीं बजाया जाता है।
लेकिन मौजूदा समय में बदरीनाथ मास्टर प्लान के साथ ही सड़कों के निर्माण में हथौड़े से लेकर जेसीबी तक गरज रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि माणा घाटी बेहद संवेदनशील है। यहां मानवीय गतिविधियां कम से कम हो, जिससे ग्लेशियरों पर इसका बुरा असर न पड़े।
बदरीनाथ धाम में नीलकंठ पर्वत, नर-नारायण, कंचन गंगा, सतोपंथ, माणा और कुबेर पर्वत स्थित हैं। इसके अलावा कई अन्य चोटियां भी हैं जो बर्फ से ढकी रहती हैं। पूर्व में बदरीनाथ से लेकर माणा क्षेत्र में अधिक बर्फबारी होती थी। यहां हिमाच्छादित चोटियों से हिमस्खलन न हो, इसकी डर से बदरीनाथ मंदिर में शंख ध्वनि नहीं होती थी।
3 of 5
बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल का कहना है कि बदरीनाथ में शंख से अभिषेक पूजा संपन्न की जाती है और बदरीनाथ के भोग को पवित्र किया जाता है। लेकिन यहां शंख बजाना वर्जित है। संभवत: हिमस्खलन की घटना न हो, इसके लिए यहां शंख बजाना वर्जित हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 5
देश का प्रथम गांव माणा
- फोटो : अमर उजाला
भू वैज्ञानिक डॉ. एसपी सती का कहना है कि बदरीनाथ से माणा तक पूरी घाटी संवेदनशील है। पहले इस क्षेत्र में मानवीय आवाजाही कम थी। बदरीनाथ धाम में भी शंख न बजने के पीछे वैज्ञानिक कारण यही था कि हिमाच्छादित चोटियों में कंपन न हो। लेकिन अब धाम में मानवीय गतिविधियां बढ़ रही हैं। यहां बेतहाशा निर्माण हो रहे हैं। जिस कारण हिमस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं।
विज्ञापन
5 of 5
माणा कैंप
- फोटो : अमर उजाला
सदियों पूर्व बदरीनाथ मंदिर का निर्माण जब हुआ होगा तो पहले उस स्थान का अच्छे से अध्ययन हुआ होगा। वैज्ञानिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर बनाया गया है। बदरीनाथ मंदिर के ठीक ऊपर मानव आंख की भाैं की तरह एक चट्टान है। वहां जब भी हिमस्खलन होता है तो वह बामणी गांव की तरफ डायवर्ट हो जाता है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।