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अंग्रेजों ने रोकनी चाही थी देवभूमि की ये परंपरा, डर के वापस लिया आदेश

Fri, 19 Aug 2016 08:01 AM IST
नवल जोशी/ अमर उजाला, देवीधुरा (चंपावत)
नवल जोशी/ अमर उजाला, देवीधुरा (चंपावत) Updated Fri, 19 Aug 2016 08:01 AM IST
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Britishers tried to stop bagwal stone war.
bagwal war - फोटो : AmarUjala

मां बाराही धाम देवीधुरा में आषाढ़ी कौतिकी को होने वाला बग्वाल मेला उत्तर भारत में खासा मुकाम रखता है। आज 18 अगस्त को होने वाले बग्वाल को देखने के लिए हजारों लोग यहां जुट रहे हैं।

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bagwal war - फोटो : AmarUjala

चंपावत जिला मुख्यालय से 60 किमी दूर 7000 फीट ऊंचाई पर स्थित मां वज्र बाराही के धाम देवीधुरा का जिक्र साहसिक शिकारी और लेखक जिम कार्बेट ने अपनी मैन इटर ऑफ कुमाऊं नामक पुस्तक में किया है।

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bagwal war - फोटो : AmarUjala

कहा जाता है कि अंग्रेजी हुकूमत के दौरान पत्थर युद्ध को रोकने के लिए चारों खामों को रबड़ या गोबर की गेंद से बग्वाल खेलने का आदेश दिया गया था। आदेश देने वाले तत्कालीन अंग्रेज अधिकारी जब बीमारियों से ग्रस्त हुआ, तो उसने दैवीय शक्ति को मानते हुए आदेश वापस ले लिया।

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bagwal war - फोटो : AmarUjala

लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक मां बाराही धाम में प्राचीनकाल से बग्वाल की परंपरा चली आ रही है। यह प्रथा कब से प्रारंभ हुई, इस बारे में कोई पुख्ता तिथि कहीं भी अंकित नहीं है। मेला समिति के मुख्य संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया और मंदिर के पीठाचार्य आचार्य कीर्ति बल्लभ जोशी बताते हैं कि यहां पर बग्वाल की परंपरा महाभारत काल से चल रही है। मेले में लाखों लोग इस अद्भुत नजारों को देखने के लिए यहां एकत्र होते हैं।

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bagwal war - फोटो : AmarUjala

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक चम्याल, लमगड़िया खाम, गहड़वाल और वालिक खाम के लोगों में हर साल नर बलि दिए जाने की प्रथा थी। कहते हैं कि चम्याल खाम की एक मात्र वृद्धा के पौत्र की बलि देने की बारी आने पर उसने मां बाराही की उपासना की।

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