देहरादून के ऐतिहासिक झंडे जी के आरोहण को बारिश के बीच आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भले ही पहली बार में झंडे जी का ध्वज दंड खंडित होने के कारण आरोहण संपन्न नहीं हो पाया, लेकिन दूसरी बार हुए आरोहण में श्रद्धालुओं ने दोगुनी ऊर्जा के साथ आरोहण में हिस्सा लिया। दिनभर बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह और जोश देखने को मिला। देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालु इस पवित्र रस्म के साक्षी बने।
झंडे जी के आरोहण में देहरादून के परमजीत सिंह को दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का सौभाग्य हासिल हुआ। परमजीत लकड़ी कारोबारी हैं। सहारनपुर चौक के समीप उनका व्यवसाय है। परमजीत के पिता ने करीब 104 साल पहले दर्शनी गिलाफ चढ़ाने की बुकिंग कराई थी, जिनका अब नंबर आया।
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झंडे जी
- फोटो : अमर उजाला
सुबह आठ बजे श्री गुरूराम राय दरबार साहिब के महंत देवेंद्र दास जी महाराज की उपस्थिति में संगतों ने झंडेजी को उतारने की प्रक्रिया शुरू की। करीब साढ़े नौ बजे झंडे जी को दही, घी, गंगाजल, पंचामृत से स्नान कराना शुरू किया गया। सुबह 10.15 बजे से झंडे जी को सादा गिलाफ, सनील गिलाफ चढ़ाना शुरू हुआ।
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झंडे जी
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दोपहर 2.30 बजे महंत जी महाराज ने संगतों को दर्शन दिए और संगतों ने महाराज जी का आशीर्वाद लिया। तीन बजे से झंडे जी का आरोहण शुरू किया गया। सैकड़ों संगतों ने आरोहण के ऐतिहासिक क्षण में हिस्सा लिया। श्रद्धा व विधि-विधान के साथ झंडे जी का आरोहण शुरू हुआ। शाम 4.40 बजे तक झंडे जी के ध्वज दंड का हिस्सा खंडित हो गया। जिसके कारण आरोहण कार्यक्रम कुछ समय के लिए टाल दिया गया।
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झंडे जी
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शाम करीब 6 बजे दोबारा झंडे जी का आरोहण कार्यक्रम विधिवत शुरू किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने और अधिक ऊर्जा के साथ हिस्सा लिया। देर शाम करीब 6.30 बजे के बाद झंडे जी को स्थापित किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं की तालियों की गड़गड़ाहट और महाराज जी के जयकारों से पूरा माहौल गूंज उठा। आरोहण के बाद से झंडेजी का एक महीने का मेला शुरू हो गया है।