फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

बड़ी खबरः उत्तराखंड के हर गांव पर मंडरा रहा है आपदा का खतरा!

Fri, 14 Oct 2016 09:27 AM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Fri, 14 Oct 2016 09:27 AM IST
विज्ञापन
Each village is under the risk of disaster in Uttarakhand
बस्तड़ी गांव में रेस्क्यू करते जवान - फोटो : अमरउजाला

एक जुलाई, 2016 को पिथौरागढ़ में बस्तड़ी की आपदा के बाद अब प्रदेश के अन्य सुरक्षित गांव भी अब खतरे की जद में माने जा रहे हैं। राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र की हाल की एक भू अध्ययन रिपोर्ट इस ओर इशारा भी कर रही है।


 

Each village is under the risk of disaster in Uttarakhand
बस्तड़ी जाने वाले सड़क मलबे में तब्दील हो चुकी है। - फोटो : अमरउजाला

रिपोर्ट में कुछ समय पहले ही बस्तड़ी के आसपास सड़क निर्माण से पहाड़ी के कमजोर होने और पोर प्रेशर सहन न कर पाने से ढहने की आशंका जताई गई है। केंद्र ने इस रिपोर्ट में बस्तड़ी और आसपास के प्रभावित दर्जन भर गांवों में पिछले पांच सालों में भू उपयोग में किए गए बदलाव की पड़ताल करने का सुझाव दिया है।
 

Each village is under the risk of disaster in Uttarakhand
बस्तड़ी गांव में मलबे में लापता लोगों को तलाशते जवान - फोटो : अमरउजाला

रिपोर्ट के मुताबिक बस्तड़ी पूरी तरह से सेफ जोन में था। पहले भी यहां पर भारी बरसात हुई पर लोगों को कभी भूस्खलन का सामना नहीं करना पड़ा। बस्तड़ी गांव के ऊपर ही करीब 50 डिग्री का ढाल है और एक जुलाई को हुई भारी बारिश से यह पहाड़ी दरक गई। ढाल के कारण बस्तड़ी तक मलबे को पहुंचने में बेहद कम समय लगा।
 

विज्ञापन
विज्ञापन
Each village is under the risk of disaster in Uttarakhand
बस्तड़ी में खोजबीन करते जवान - फोटो : अमरउजाला

रिपोर्ट में कहा गया है कि  बस्तड़ी से आए मलबे ने नरोला गांव के निकट कुमालगांव को भी अपनी जद में लिया। इससे पाथेरकोट मल्ला और तल्ला, उरमा, औझा मल्ला, सिरोली, मझेरा, ताल, सूनाकोट, अमथल, दाफिला, कलाशिला, पंतसेरा, डीडीहाट कस्बा भी प्रभावित हुआ।
 

विज्ञापन
Each village is under the risk of disaster in Uttarakhand
ajay tamta in bastari - फोटो : अमरउजाला

इस क्षेत्र में हुए भूस्खलन का एक कारण सड़क निर्माण  और अन्य भू उपयोग परिवर्तन भी हो सकता है। इससे पहाड़ी कमजोर हुई और भारी बारिश के कारण पहाड़ी पोर प्रेशर (रिस गए पानी का दबाव) को सहन नहीं कर पाई। रिपोर्ट में बस्तड़ी और आसपास के गांवों के पिछले पांच साल में भू उपयोग परिवर्तन, सड़क निर्माण, पानी की निकासी के रास्तों में बदलाव, नए मकान, पिछले पांच साल में हुए अन्य बदलावों के अध्ययन पर जोर दिया गया है।
 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed