नक्सली हमले में शहीद हुए योगेश परगांई ने शहीद होने से 10 घंटे पहले अपने बड़े भाई मुकेश को फोन कर यह बात कही थी। बोला था, ‘भइया मैं बिल्कुल ठीक हूं, दो माह बाद घर आऊंगा। तुम मां का ध्यान रखना।’ लेकिन जब घरवालों ने बेटे के शहीद होने की खबर सुनी तो कोहराम मच गया।
भाई को फोन पर कहा 'मां का ध्यान रखना, मैं जल्दी आउंगा', शहादत की खबर आई तो मच गया कोहराम, तस्वीरें
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घर में सबसे छोटा होने की वजह से वह सबके लाडले थे। मां तारी देवी ने उनके बहू की तलाश शुरू कर दी थी। बहू की तलाश पूरी नहीं हो लेकिन बेटा खो गया। योगेश की शहादत की खबर सुनते ही मां बेसुध हो गईं। परिजन बार-बार संभालने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उन्हें संभाल नहीं पा रहे हैं। लाडले भाई को खोने के बाद दोनों बड़े भाई भी मौन हो गए हैं किसी से कोई बातचीत नहीं सिर्फ आंखों में आंसू थे।
बचपन के साथी भदरकोट के भास्कर परगांई ने बताया कि योगेश पढ़ाई से लेकर खेलकूद और सामाजिक कार्यों में हमेशा आगे रहते थे। बचपन में उन्हें तैराकी, क्रिकेट, वॉलीबाल, कबड्डी, खोखो आदि का शौक था। उन्हें बचपन के प्रिय साथी को इतनी जल्दी खोने का गम है।
भाई मुकेश के अनुसार उनका भाई उनसे बहुत प्यार करता था। उनकी बात मानता था। चार साल पहले उन्होंने कहा कि था कि बनबसा में भर्ती चल रही है, जा कर देख ले। वह गांव के 18-19 लड़कों के साथ चले गए। आकर बताया कि वह दौड़ और कूद में सबसे आगे रहा। पहले तो यकीन नहीं हुआ जब गांव के लड़कों ने चयन होने की बात बताई तो बहुत खुशी हुई। फूट-फूट कर रो रहे मुकेश ने बताया कि योगेश को उनके पांच साल के बेटे कृष्णा से बड़ा लगाव था। जब भी वह आते कृष्णा उनके साथ ही रहता था।
योगेश के ताऊ केशव दत्त परगांई भी सूबेदार मेजर के पद से रिटायर हुए थे। उन्होंने तीन लड़ाई लड़ी थी। ताऊ को देखकर योगेश के मन में भी सेना में भर्ती होने का जज्बा था। वह सुबह से शाम तक दौड़भाग और कसरत में जुटे रहते। यही वजह थी कि उन्हें कमांडो ट्रेनिंग के लिए चुना गया था।