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नारी निकेतन मामला: कोर्ट में मुंह छिपाकर बिलखता रहा आरोपी, सजा सुनने के बाद माथा पकड़कर खूब रोया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 03 Sep 2019 08:20 AM IST
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देहरादून नारी निकेतन में मूक बधिर संवासिनी से दुष्कर्म के प्रयास का आरोपी ललित बिष्ट सजा से पहले और सजा के बाद बिलखता रहा। सजा पर बहस के दौरान ललित को कोर्ट परिसर में लाया गया तो वह मुंह छिपाकर रो रहा था। मां ने उसे ढांढस बंधाया। सजा सुनाए जाने के बाद ललित विचलित हो गया। वो बराबर पुलिसकर्मियों से पूछता रहा कि उसे कितनी सजा हुई है। पांच साल की सजा का पता लगने पर वह माथा पकड़कर रोता रहा।
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वहीं, दूसरे के अपराध पर्दा डालने की कोशिश नारी निकेतन की महिला कर्मचारियों पर भारी पड़ गई। उस समय किसी को नहीं पता था कि आखिर मूक बधिर संवासिनी के पेट में किसका भ्रूण है। सिर्फ फजीहत से बचने को महिला कर्मचारी अपराध में भागेदारी बनती गईं। सोमवार का सजा का ऐलान हुआ तो अदालत में मौजूद परिजनों को झटका लगा।
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आपसी बातचीत में वो बोल रहे थे कि उस समय इनकी अक्ल पर पत्थर पड़ गए थे, जो दूसरे के अपराध को अपने गले में डाल लिया। उस समय ही पुलिस को सच बता दिया जाता तो कम से कम ये दिन तो नहीं देखना पड़ता। नारी निकेतन प्रकरण में मुख्य आरोपी गुरदास था। दुष्कर्म के चलते संवासिनी गर्भवती हुई थी। होमगार्ड ललित बिष्ट और केयर टेकर हाशिम ने भी संवासिनी से दुष्कर्म का प्रयास किया था।
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जब संवासिनी के गर्भवती होने का पता चला तो नारी निकेतन की अधीक्षिका समेत अन्य महिला कर्मचारियों को कोई राह नहीं सूझी। उस समय उन्होंने कानून का सहारा लेने के बजाय इस अपराध पर पर्दा डालना ज्यादा मुफीद समझा और संवासिनी का गर्भपात कराकर भ्रूण का जंगल में दबा दिया गया। पुरानी कहावत है कि जुर्म छिपाए नहीं छिपता।
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हुआ भी ऐसा ही। पुलिस ने एक-एक कर अपराध के भागीदारों को चुन-चुन कर दबोच लिया। सोमवार का सजा का दिन होने के कारण काफी संख्या में दोषियों से जुड़े परिजन और नाते रिश्तेदार अदालत परिसर में जमा थे। सजा सुनाई गई तो मामले में दोषी महिला कर्मचारियों के परिजन बोल उठे...इनकी अक्ल पर पत्थर पड़ गए थे, तभी दूसरे के जुर्म में भागेदारी बन गए।
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