वाइन पीने वालों के लिए बुरी खबर है। अब वाइन बनाने के लिए एल्कोहॉल का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
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वाइन पीने वालों के लिए बुरी खबर, अब इसमें नहीं होगा 'नशा'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 15 Jul 2018 09:09 AM IST
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अभी तक वाइन में नशे की मात्रा बढ़ाने के लिए एल्कोहॉल मिलाई जाती थी, लेकिन अब स्वास्थ्य के मद्देनजर ऐसा नहीं किया जाएगा। उत्तराखंड के लिए प्रस्तावित प्रावधान में कहा गया है कि वाइन में एल्कोहॉल की जगह चीनी व स्टार्च की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। बुधवार को हुई कैबिनेट में भी वाइनरी संशोधित नीति पेश की गई थी लेकिन यह पारित नहीं हो पाई। अब इसे अगली कैबिनेट की बैठक में लाने की तैयारी है।
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राज्य में पर्वतीय क्षेत्रों में बाजार न मिलने के कारण तकरीबन 35 फीसद फल खराब हो जाते हैं। इससे किसानों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए वाइनरी नीति बनाई गई है। 2013 में फल उत्पादकों को फायदा पहुंचाने के लिए फल आधारित वाइनरी लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया था।
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- फोटो : डेमो
इस नीति के तहत पहाड़ में वाइनरी प्लांट लगाने वालों को बिजली, पानी व परिवहन आदि में सब्सिडी मिलेगी। नेशनल फूड मिशन के तहत मिलने वाली सब्सिडी का लाभ भी वाइनरी प्लांट लगाने वाले को मिलेगा। राज्य सरकार इसके लिए जल्द बड़ा निवेश सम्मेलन करने जा रही है। जिसमें निवेशकों के सामने वाइनरी नीति की रूपरेखा रखी जाएगी।
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इसमें यह ध्यान रखा जाएगा कि वाइन पारंपरिक तरीके से बनाई जाएगी। इसमें केवल फलों का ही इस्तेमाल होगा। अधिक से अधिक इसमें चीनी और थोड़ा स्टार्च मिलाया जा सकता है। इसमें एल्कोहॉल का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। यह भी ध्यान रखा जाएगा कि एफएल-टू से निकासी के दौरान वर्ष 2014-15 में जो कर लगाया गया था, उसे भी कम किया जाएगा।