यहां होली से पहले रामलीला शुरू हो गई है। जानिए इसके पीछे की वजह..
जानिए यहां होली से पहले क्यों शुरू हो गई रामलीला, बेहद खास है इसके पीछे की वजह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीलक्ष्मीनारायण की पूजा-अर्चना और आराधना के साथ ही डिम्मर गांव की 100वीं रामलीला का मंगलवार से आगाज हो गया। हालांकि यह इत्तेफाक ही है कि इस बार यह होली से पहले ही शुरू हो गई है। हर बार यह बाद में मनाई जाती थी।
भगवान बदरीनाथ के पुजारियों के गांव डिम्मर में रामलीला को ईष्टपूजा के रूप में माना जाता है। यहां हर वर्ष भगवान बदरीविशाल के कपाट खुलने से पूर्व रामलीला का आयोजन किया जाता है। माना जाता है कि गांव और चारधाम यात्रा के सफल संचालन के लिए राम की आराधना के लिए रामलीला का आयोजन किया जाता है। यहां तक कि भगवान बदरीविशाल के कपाटोद्घाटन तय होने की तिथि बसंत पंचमी के दिन ही गांव में रामलीला आयोजन की तिथि का निर्धारण होता है।
शताब्दी समारोह के रूप में मनाई जा रही रामलीला को लेकर ग्रामीणों ने चौंरी (गांव का धार्मिक स्थल) आदिगुुरु शंकराचार्य, बदरीविशाल और राम की पूजा कर हवन किया। महिलाओं ने गांव के प्राकृतिक स्रोत से चौंरी तक जलकलश यात्रा निकाली। मंगलवार सुबह पुजारी गणेश खंडूड़ी, सत्य प्रसाद खंडूड़ी ने श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर में पूजा शुरू की।
चौंरी में धार्मिक कार्यक्रम के बाद गांव के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने और रामलीला को 100 साल तक पहुंचाने में योगदान करने वालों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में मोहन प्रसाद डिमरी, द्वारिका प्रसाद डिमरी, विशंभर दत्त, शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित ममता डिमरी, कलाकारी के क्षेत्र में सतीश खंडूड़ी, सुरेश कुमार, संजय डिमरी, चक्रधर डिमरी को आयोजन समिति ने स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मोहन प्रसाद डिमरी और रामलीला समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रसाद डिमरी ने शताब्दी समारोह की स्मारिका का विमोचन भी किया।