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चंद्र ग्रहण 2018: सुपर मून आज, जानिए क्यों नजरे लगाए बैठे हैं जापान के वैज्ञानिक

Wed, 31 Jan 2018 06:15 PM IST
गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल
गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल Updated Wed, 31 Jan 2018 06:15 PM IST
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scientist close vigil on chandra grahan 2018
Blue Moon - फोटो : Demo Photo

150 वर्षों में पहली बार 31 जनवरी को पड़ रहे विशेष चंद्रग्रहण सुपर ब्लू ब्लड मून पर नैनीताल में नया इतिहास बनने जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें...


 

scientist close vigil on chandra grahan 2018
देहरादून - फोटो : self
विश्व में पहली बार चांद के अध्ययन की नई तकनीक का यहां परीक्षण होगा जिससे बाद में अन्य ग्रहों के परीक्षण और अंतरिक्ष के नए रहस्यों को उजागर करने की राह खुलेगी। इस तकनीक के परीक्षण को जापान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों सहित दिल्ली विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान एरीज पहुंच चुके हैं।

 
scientist close vigil on chandra grahan 2018
चांद
एरीज में मुख्यत: सूर्य संबंधी अध्ययन किया जाता है। सूर्यग्रहण के अवसरों पर यहां विशेष अध्ययन किए जाते रहे हैं लेकिन चंद्रग्रहण के अवसर पर यहां कोई अध्ययन नहीं किया गया। इस वर्ष पहली बार यहां से चंद्रग्रहण के विशेष प्रेक्षण के साथ ही विश्व में चांद के प्रकाश के अध्ययन की नई तकनीक का परीक्षण भी किया जाएगा जो जापान के वैज्ञानिकों ने विकसित की है।

 
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scientist close vigil on chandra grahan 2018
सुपर मून - फोटो : self
इस तकनीक के परीक्षण के लिए जापान के निशिहामा एस्ट्रोनॉमिकल वेधशाला के वैज्ञानिक प्रोफेसर आइतो के नेतृत्व में टीम यहां पहुंच चुकी है। एरीज के निदेशक डॉ. अनिल पांडे ने बताया कि जापान के अलावा दिल्ली विवि के प्रोफेसर एचपी सिंह की टीम भी यहां आई है। एरीज जापान के सहयोग से कार्य कर रहा है। इसी के चलते जापान के वैज्ञानिकों ने चांद के प्रकाश के अध्ययन की नई पोलेरीमीटर तकनीक के परीक्षण के लिए एरीज को चुना।

 
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scientist close vigil on chandra grahan 2018
SUPER BLUE BLOOD MOON - फोटो : self
यह परीक्षण एक ही समय पर जापान व नैनीताल में किया जाएगा। डॉ. पांडे ने बताया कि इसका उद्देश्य ग्रहण के दौरान विभिन्न लेटीट्यूडीनल एटमॉसफियर के सापेक्ष चांद के प्रकाश के अंतर को मापना है। उन्होंने बताया कि इस परीक्षण के सफल होने पर इस तकनीक से अन्य ग्रहों का भी अध्ययन किया जाएगा जो भविष्य में अंतरिक्ष के अनसुलझे रहस्यों को सुलझाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

 
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