प्राइवेट बिल्डरों के सामने राज्य सरकार जल्द ही एक फार्मूला पेश करने जा रही है। फार्मूले की भावना लोगों को सस्ता घर मुहैया कराने से जुड़ी है। सरकार एक पेशकश करने जा रही है। इसमें वह प्राइवेट बिल्डरों को ऑफर करेगी कि वह अपने प्रोजेक्टों में सस्ते घरों का कोटा बढ़ाए।
सस्ते घर दिलाने के लिए सरकार ने निकाला नया फार्मूला, जानिए
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बदले में उसे राज्य सरकार से दो तरह के फायदे मिलेंगे। एक, लैंडयूज चेंज करते हुए उससे संबंधित फीस में ज्यादा से ज्यादा छूट दी जाएगी। ये फीस पूरी तरह से माफ भी की जा सकती है। दो, राज्य सरकार प्राइवेट बिल्डर के प्रोजेक्ट पर अपनी मुहर लगाकर भरोसे की गारंटी भी लेगी।
इस तरह की व्यवस्था महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे प्रदेशों में है। सरकार इन राज्यों की इस तरह की पालिसी को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रही है। मामला जल्द ही कैबिनेट में आ सकता है।
ये है राज्य सरकार की योजना
-प्राइवेट प्रोजेक्ट के साथ ये अनिवार्य शर्त वर्तमान में भी लागू है कि उसमें 35 प्रतिशत घर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए तैयार किए जाएंगे। सरकार की योजना ये है कि प्राइवेट बिल्डर इस बात के लिए तैयार हों, कि सस्ते घरों का कोटा 35 फीसदी से बढ़कर 50 या फिर 60 फीसदी तक पहुंच जाए। इसके बदले में लैंडयूज से संबंधित फीस पर उसे अधिकतम छूट दी जाएगी। ये छूट 50 से 80 फीसदी या फिर सौ फीसदी तक भी हो सकती है। सरकार चाहती है कि पांच लाख रुपये तक में लोगों को अपना घर मुहैया हो जाए।
सरकार ने ये महसूस किया है कि प्राइवेट बिल्डरों पर लोगों का एतबार काफी कम है। पूर्व में धोखाधड़ी, जालसाजी के कई मामले सामने आने के बाद पब्लिक और प्राइवेट बिल्डरों के बीच भरोसे का रिश्ता बहुत कमजोर हुआ है। प्राइवेट प्रोजेक्ट के साथ सरकार का ज्वाइंट वेंचर होगा, जिसमें वह खुद कुछ खर्च नहीं करेगी, लेकिन गारंटी पूरी तरह से लेगी। इससे लोगों को भी फायदा होगा और प्राइवेट बिल्डर की भरोसे से जुड़ी दिक्कत भी कम होगी।