फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

नए चिकित्सीय कानून के खिलाफ दिल्ली में हुई डॉक्टरों की महापंचायत, सरकार के खिलाफ गुस्से की झलक  

Mon, 26 Mar 2018 10:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 26 Mar 2018 10:25 AM IST
विज्ञापन
anger shown against the new medical law during doctor's mahapanchayat
doctors protest - फोटो : जी पॉल

नए चिकित्सीय कानून नेशनल मेडिकल कमिशन बिल के खिलाफ आयोजित महापंचायत में देश के 16 राज्यों से करीब 20 हजार डॉक्टर शामिल हुए। इससे पहले महापंचायत में देश का भ्रमण करके लौटी साइकिल यात्रा का समापन भी हुआ। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेड़कर ने कहा कि महापंचायत ने मौजूदा एमसीआई में कुछ बदलाव सुझाए हैं। लेकिन सरकार अगर इसे नहीं मानती है और मौजूदा एनएमसी बिल को ही कैबिनेट में पास किया जाता है तो देशभर के 10 लाख डॉक्टर और तीन लाख मेडिकल के छात्र काम बंद कर देंगे


(सभी फोटो - जी पाल / अमर उजाला)


 
anger shown against the new medical law during doctor's mahapanchayat
doctors protest - फोटो : जी पॉल

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के बैनर तले हुई डॉक्टरों की इस महापंचायत के दौरान जहां केंद्र सरकार के विरुद्घ गुस्सा और विरोध देखने को मिला। वहीं लोकसभा के निर्देश पर बनी स्थायी समिति की सिफारिशों को भी बेबुनियाद बताया गया। इतना ही नहीं डॉक्टरों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही एनएमसी कानून में बदलाव नहीं किए तो 2 अप्रैल से देश भर में लाखों डॉक्टर भूख हड़ताल पर बैठेंगे। 

anger shown against the new medical law during doctor's mahapanchayat
doctors protest - फोटो : जी पॉल

डॉ. वानखेड़कर का कहना है कि लोकसभा ने समिति को एनएमसी के विवादित बिंदुओं के संशोधन की जिम्मेदारी दी थी। लेकिन समिति की सिफारिशों को देख लग रहा है कि ये डॉक्टरों की और भी ज्यादा मुसीबत बढ़ा सकती हैं। ब्रिज कोर्स को राज्य सरकारों पर छोडना सही नहीं है और न ही एमबीबीएस अंतिम वर्ष की परीक्षाओं में प्रश्न पत्र को बढ़ाना। 

विज्ञापन
विज्ञापन
anger shown against the new medical law during doctor's mahapanchayat
doctors protest - फोटो : जी पॉल

देश में नए चिकित्सीय कानून नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) पर अब डॉक्टरों ने गुस्सा दिखाकर सरकार को राजी करने का मन बना लिया है। जिसकी एक झलक रविवार को इंदिरा गांधी स्टेडियम में दिखाई भी दी।महापंचायत में मौजूद डॉक्टरों ने ये तक कहा है कि सरकार की ज्यादात्तर सेवाएं प्राइवेट डॉक्टरों के भरोसे चल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आयुष और डेंटल को बढ़ावा देना चाहती है तो फिर प्राइवेट डॉक्टर एलोपैथी प्रैक्टिस करना ही बंद कर देते हैं? ताकि सरकार को भी समझ आ सके कि इस देश में एलोपैथी डॉक्टरों की भूमिका क्या है? 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed