बुराड़ी में एक जुलाई 2018 को चूण्डावत परिवार के 11 लोगों की सामूहिक आत्महत्या की झकझोर देने वाली घटना को चार साल हो गए हैं। संत नगर की गली नंबर चार में आज भी वह घटना लोगों में जिंदा हैं। हालांकि, लोगों का कहना है कि वह मार्मिक घटना को दोबारा याद नहीं करता चाहते। क्योंकि, घटना को याद करते हुए उनका दिल बैठ जाता है व जुबां खामोश हो जाती है।
बुराड़ी कांड के चार साल: आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं दर्दनाक यादें, पढ़ें- उस मकान को मिले नए मालिक की जुबानी
मकान में रह रहे मोहन ने बताया कि पहले उनकी बुराड़ी मुख्य रोड पर डायग्नोस्टिक लैब थी। वह परिवार को अच्छी तरह जानते थे और उनके अच्छे संबंध थे, लेकिन परिवार में क्या चल रहा है, इसे लेकर किसी भी अन्य शख्स को जानकारी नहीं थी। परिवार की मौत के एक साल बाद उन्होंने घर के निचला हिस्सा किराए पर ले लिया। अब उसी मकान में मोहन डायग्नोस्टिक लैब व एक किराना की दुकान चला रहे हैं।
मोहन बताते हैं कि शुरुआत में डर की वजह से लोग दुकान से सामान भी खरीदना पसंद नहीं करते थे। लेकिन, वक्त के साथ-साथ चीजें सामान्य होती गईं और दुकान भी चलने लगी। साथ ही डायग्नोस्टिक लैब भी चल रही है। मोहन कहते हैं कि आज भी वह घटना को याद करते हुए मन भर आता है। पूरा जीवन चाहकर भी इस दर्दनाक घटना को भुलाया नहीं जा सकता है।
मोहन के पड़ोसी व बीते 14 सालों से संत नगर में रहे रविंद्र ने बताया कि परिवार काफी मिलनसार था। परिवार के जाने से बाद से पूरी गली के लोगों को धक्का लगा। घटना के बाद कई दिनों तक गली में मातम पसरा रहता था। शाम को बच्चों के खेल का शोर, गाड़ियों की आवाजाही व गली में रेहड़ी पटरी वालों का आना-जाना तक बंद हो गया था।
हमें कई दिनों तक लगता नहीं था कि हम उसी इलाके में रह रहे हैं, हालांकि समय के साथ-साथ गली के हालात तो बदल गए, लेकिन आज भी आंखों में वह दर्दनाक तस्वीर और परिवार की यादें दिल में जिंदा है। जब भी 30 जून को याद करते हैं तो मोहल्ले में चुप्पी सध जाती है।