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Four Years of Burari Case: मौत के 'आह्वान' को याद कर आज भी कांप जाती है रूह, पढ़ें- 11 सामूहिक खुदकुशी का पूरा किस्सा

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 01 Jul 2022 04:46 AM IST
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Four Years of Burari Case Know Full Story Of 11 mass suicide Deaths In Delhi News In Hindi
चुंडावत परिवार - फोटो : फाइल फोटो

बुराड़ी सामूहिक आत्महत्या कांड को आज पूरे चार साल हो गए। एक जुलाई साल 2018 की सुबह देश ही नहीं, बल्कि विदेशी मीडिया के लिए उत्तरी दिल्ली का बुराड़ी इलाका चर्चाओं का विषय बन गया था। यहां एक साथ घर के 10 लोग फंदे से लटके थे, जबकि घर की सबसे बुजुर्ग महिला का शव एक कमरे से बरामद हुआ था। एक साथ इतने लोगों की सामूहिक आत्महत्या को देखकर जांच दल के भी रोंगटे खड़े हो गए थे। मौके पर हालात देखकर पुलिस ने शुरुआत में इस संबंध में हत्या का मामला दर्ज कर मामले की जांच अपराध शाखा से करवाई।



जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि बुराड़ी के चुंडावत परिवार ने तंत्र-मंत्र के चक्कर में घर के 11 लोगों की जान दांव पर लगा दी, जिसके बाद सभी की मौत हो गई। मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी (पोस्टमार्टम) करवाने के बाद पता चला कि कोई भी आत्महत्या नहीं करना चाहता था। जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में केस की क्लोजर रिपोर्ट लगाकर इसको बंद करवा दिया था। इतने बड़े हादसे को नेटफ्लिक्स ने भी भुनाया। उसने घटना पर एक डॉक्योमेंट्री बना दी, जिसको खूब देखा गया।

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Delhi burari death case - फोटो : फाइल फोटो

बुराड़ी के संत नगर इलाके में चुंडावत परिवार दो मंजिला मकान में रहता था। परिवार में बुजुर्ग नारायणी देवी (77), इनके दो बेटे भावनेश भाटिया (50), ललित भाटिया (45), भावनेश की पत्नी सविता (48), ललित की पत्नी टीना (42), नारायणी देवी की विधवा बेटी प्रतिभा (57) और तीनों भाई-बहनों के बच्चे प्रियंका (33), नीतू (25), मोनू (23), ध्रुव (15) और शिवम (15) थे।

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burari death case - फोटो : फाइल फोटो

भावनेश उर्फ भुप्पी घर में ही किराने की दुकान चलाता था, जबकि ललित की लकड़ी की दुकान थी। भावनेश की दुकान के लिए तड़के दूध और ब्रेड आया था, लेकिन सात बजे तक जब न तो भावनेश की दुकान खुली और न ही ब्रेड-दूध उठा तो एक बुजुर्ग पड़ोसी घर के ऊपर पहुंचे। ऊपर पहुंचते ही उनके होश उड़ गए। पहली मंजिल पर पहुंचने पर अंदर छत पर लगे लोहे के जाल पर फंदे से पूरा परिवार लटका था। उनके हाथ-पैर बंधे थे। सभी की आंखों पर सफेद रंग की पट्टी भी बंधी हुई थी।

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Delhi burari death case - फोटो : फाइल फोटो

मामले की सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद घटना आग की तरह फैली और हड़कंप मच गया। फिर देशभर के अलावा कई दूसरे देशों की मीडिया वहां पहुंच गई। घर की छत पर परिवार का पालतू कुत्ता बंधा हुआ पाया गया। उसकी भी चंद दिनों बाद मौत हो गई।

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burari death case - फोटो : file photo

पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू की तो घर के अंदर से 13 रजिस्टर बरामद हुए। उनकी जांच करने पर पता चला कि यह कोई सामूहिक हत्या नहीं थी, बल्कि एक अनुष्ठान था। परिवार को लगता था कि ललित और भावनेश के पिता की आत्मा पूजा-पाठ के बाद उनके पास आती है।

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