बिल्डर की हत्या: सोसायटी के अंदर दाखिल होना बेहद टेढ़ी खीर, घर के भेदी बिना संभव नहीं वारदात को अंजाम देना
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पुलिस का मानना है कि इतने सुरक्षित इलाके में बिना किसी अपने या जानकार की मिलीभगत के इतनी बड़ी वारदात को अंजाम नहीं दिया जा सकता। पुलिस के मुताबिक राम किशोर अग्रवाल अपने परिवार के साथ कोठी नंबर-1, राम किशोर अग्रवाल मार्ग, सिविल लाइंन इलाके में रहते थे। इनके परिवार में बेटा विशाल अग्रवाल, बेटी, बहू और एक पोती है। राम किशोर की गिनती दिल्ली के बड़े बिल्डरों में होती थी। कोठी के ग्राउंड फ्लोर पर राम किशोर अकेले रहते थे, जबकि इनके बच्चे ऊपरी फ्लोर पर रहते हैं। राम किशोर बिल्डर होने के साथ-साथ समाजसेवी भी। इसलिए उनके घर के सामने वाली सड़क का नाम उनके ही नाम पर रखा हुआ था।
रविवार सुबह 6.40 बजे अचानक घर की डोर बेल बजी दरवाजे पर सोसायटी का सुरक्षा गार्ड नागेश शोर मचा रहा था। उसका कहना था कि दो लड़के कोठी में घुसकर लूटपाट कर ले गए हैं। तुरंत बेटा विशाल पिता के कमरे की ओर बढ़ा तो उसके होश उड़ गए। राम किशोर अग्रवाल फर्श पर खून से लथपथ पड़े थे। उनका गला रेतने के अलावा उनके पेट और कमर पर चाकू के कई घाव थे। बाकी लोगों की मदद से विशाल पिता को अस्पताल ले गया, जहां उनको मृत घोषित कर दिया गया। विशाल ने ही रास्ते से 6.52 बजे पुलिस को कॉल कर मदद मांगी। खबर मिलते ही तमाम वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए। राम किशोर के शव को कब्जे में लेकर सब्जी मंडी मोर्चरी भेज दिया गया।
सोसायटी के गार्ड नागेश ने बताया कि सुबह करीब 5.45 बजे बाइक सवार दो संदिग्ध लड़कों को सोसायटी में अंदर घुसने पर उसने टोका गया था। वह मंदिर जाने की बात कर रहे थे। गार्ड ने उनको यहां मंदिर न होने की बात बताई थी। इसके बाद वह चले गए थे। इस बीच सुबह करीब 6.30 बजे नागेश घूमता हुआ राम किशोर अग्रवाल की कोठी पर पहुंचा तो एक बाइक सवार बाहर खड़ा था जबकि दूसरा गेट के पास दीवार फांदकर बाहर आ रहा था। टोकने पर एक बदमाश ने पिस्टल तान दी। इसके बाद दोनों वहां से कुछ बैग लेकर फरार हो गए। इसके बाद ही नागेश ने घर डोर बेल बजाई थी, जिसके बाद विशाल उठा और पिता के कमरे में पहुंचा।