प्रद्युम्न मर्डर केस: रायन स्कूल के खिलाफ एक के बाद एक बड़ा एक्शन, अब हो गई ये कार्रवाई
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शाहदरा में निजी स्कूल में पांच वर्षीय बच्ची के यौन शोषण व गुडगांव स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल में सात वर्षीय बच्चे की हत्या के बाद उपराज्यपाल ने तय नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया था। परिवहन विभाग ने इसी के बाद यह अभियान शुरु किया है। परिवहन विभाग की 12 टीमों ने शुक्रवार को अपना निशाना मुख्य रूप से नोएडा यूपी से दिल्ली आने वाली स्कूली बसों को बनाया। विभाग अधिकारियों ने यूपी के बार्डर पर विशेष निगरानी करते हुए करीब 101 बसों को जब्त कर लिया। यमुना पार के शाहदरा, दिलशाद गार्डन इत्यादि क्षेत्रों के अलावा दिल्ली के अन्य स्थानों पर भी कार्रवाई की। पहले दिन रियान की 9 बसों सहित 121 बसों को जब्त किया तो दूसरे दिन रियान की दो बसों सहित 124 बसों को जब्त किया था।
विभाग की कार्रवाई को देख पूर्वी दिल्ली स्थित रियान स्कूल ने आज अपनी बसों को सड़को पर नहीं उतारा। विभाग अधिकारियों ने स्कूल में जाकर बसों का निरीक्षण किया। यूपी से आने वाली अधिकांश बसों के चालकों के पास रिफरेसर कोर्स का प्रमाणपत्र नहीं मिला। परिवहन विभाग प्रवर्तन टीम ने जांच के दौरान पाया कि कुछ ड्राइवरों के पास सार्वजनिक सेवा वाहन (पीएसवी) बैज नहीं था और कुछ कंडक्टर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए पाए गए। उन्होंने कहा तय नियमों के अनुसार स्कूल बस के कंडक्टर के पास लाईसेंस होने के साथ 10 वीं पास होना चाहिए।
दिल्ली सरकार ने स्कूलों में बच्चों के परिवहन सहित सुरक्षा पहलुओं पर नजर रखने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने हालही में कहा था कि बच्चों की सुरक्षा और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा और भविष्य में कड़े कदम उठाए जाएंगे। शिक्षा निदेशालय निदेशक की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय कमेटी ने स्कूलों से बच्चों को ले जाने वाली बसों और टैक्सी के लिए स्कूलों को जवाबदेय बनाने के लिए स्कूल टैक्सी नीति 2007 में संशोधन करने का प्रस्ताव दिया है।
परिवहन विभाग के अनुसार राजधानी में स्कूल के बच्चों को लाने-लेजाने के लिए दस हजार से अधिक निजी बसों और कैब को किराए पर लिया गया है। इन वाहनों द्वारा बड़े तादाद में तय नियमों के उल्लंघन की शिकायतों के देखते हुए ही अभियान चलाया जा रहा है।
बच्चों को हुई परेशानी बसों के खिलाफ कार्रवाई के कारण अभिभावकों को काफी परेशानी हुई। बसें जब्त होने के कारण उन्हें स्कूल में बच्चों को जाकर लाना पड़ा। कई स्थानों पर तो बसों के जब्त होने के कारण बीच रास्ते में ही बच्चों को उतार दिया गया और बच्चों को पैदल ही स्कूल ले जाया गया।