'हरीश बचपन में बहुत शरारती था। मैं उसे डांटती तो किसी कोने में जाकर छिप जाता। थोड़ी देर बाद फिर आकर चुपचाप मेरे गले लग जाता। मेरे चेहरे को सहलाने लगता। पहला बच्चा था, इसलिए घर में सबसे ज्यादा लाड़-प्यार उसी को मिला।' यह कहना है उनकी मां निर्मला देवी का।
रोते हुए जो बोली हरीश की मां, सुन कलेजा फट जाए: 13 साल से सोते-सोते हो गए बेडसोर, बेटे की तकलीफ देखी नहीं जाती
अंतिमा सिंह, अमर उजाला, गाजियाबाद
Published by: विकास कुमार
Updated Sat, 14 Mar 2026 09:23 PM IST
सार
'हरीश बचपन में बहुत शरारती था। मैं उसे डांटती तो किसी कोने में जाकर छिप जाता। थोड़ी देर बाद फिर आकर चुपचाप मेरे गले लग जाता। मेरे चेहरे को सहलाने लगता। पहला बच्चा था, इसलिए घर में सबसे ज्यादा लाड़-प्यार उसी को मिला।'
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