राजधानी के सफदरजंग अस्पताल में इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां लेबर रूम के गेट के बाहर प्रसव पीड़ा से कराहती एक महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया। सोमवार रात उत्तर प्रदेश के दादरी की रहने वाली 21 वर्षीय गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा के दौरान अस्पताल में भर्ती होने के लिए पहुंची थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने बजाय महिला को भर्ती करने के उसे टरका दिया। महिला रात भर अस्पताल में लेबर रूम के दरवाजे पर दर्द से कराहती रही और आखिर सुबह के समय उसने लेबर रूम के बाहर ही सड़क पर बच्चे को जन्म दिया।
सफदरजंग में इंसानियत शर्मसार: कूड़ेदान के पास महिला ने दिया बच्चे को जन्म, मामले ने तूल पकड़ा तो अस्पताल ने दी ये सफाई
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार सुबह नौ बजकर 45 मिनट पर पीड़ित महिला अस्पताल के लेबर रूम के बाहर बुरी तरह से दर्द से कराहने लगी। इस दौरान परिजनों ने आसपास मौजूद लोगों से मदद मांगी की। मौके पर मौजूद महिलाओं ने साड़ी के कपड़े का पर्दा बनाकर महिला को प्रसव कराने में मदद की। लेबर रूप के बाहर मची चीख पुकार के बीच अस्पताल की नर्स मौके पर पहुंची और नवजात को हाथों में लेकर परिसर में चली गई।
इस दौरान पीड़ित की जेठानी सुमन ने आरोप लगाते हुए कहा कि वे सोमवार रात को अपनी भाभी को डिलीवरी करवाने के लिए पहुंची थी, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी भाभी को दर्द की शिकायत व नर्स के न होने के हवाला देते हुए लेबर रूम में लेने से मना कर दिया। सुमन का आरोप है कि वह सोमवार रात से ही अस्पताल परिसर में लेबर रूम के बाहर मौजूद रहे और उनकी भाभी दर्द से कराहती रही। मंगलवार सुबह दर्द बढ़ने पर महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। परिजन डॉक्टरों से प्रसव कराने के लिए कहते रहे, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
अस्पताल प्रशासन का बयान
वहीं, इस मामले में सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने बयान जारी करते हुए कहा है कि महिला को दादरी से सफदरजंग अस्पताल में रेफर किया गया था। चूंकि, अस्पताल इलाज के लिए किसी भी मरीज को मना नहीं करने की नीति पर काम करता है, ऐसे में सोमवार शाम पांच बजकर 45 मिनट पर वरिष्ठ डॉक्टर द्वारा मरीज को देखा गया था। इसके बाद महिला को दाखिला दे दिया गया था, लेकिन महिला दाखिले के कागजों के साथ वापस नहीं लौटी। मंगलवार सुबह ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों को पता चला कि महिला बाहर प्रसव कर रही है। ऐसे में तुरंत टीम को भेजकर प्रसव करवाया। मरीज को लेबर रूम में भर्ती किया गया है वहीं, बच्चा का वजन 1.4 किलोग्राम है, जोकि सामान्य से कम है। ऐसे में बच्चे को अस्पताल के नर्सरी रूम में डॉक्टरों की देखरेख में रखा गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि प्रसूति व स्त्री रोग विभाग में छह डॉक्टरों की टीम तैनात है, जिसमें दो वरिष्ठ डॉक्टर हैं। वहीं, बीते 24 घंटे में 101 मरीजों को डॉक्टरों द्वारा देखा गया है।
महिला की मदद के लिए अस्पातल प्रशासन से उलझी महिलाएं
अस्पताल परिसर में जिस समय पीड़िता बच्चे को प्रसव पीड़ा से गुजर रही थी, उस समय वहां पास से पेशे से वकील रबिया सिंह और निजी कंपनी में कार्यरत नीता मलिक मौजूद थी। महिला को प्रसव पीड़ा से कराहता देख दोनों महिलाएं मामले को लेकर अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंची, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने दोनों को अधिकारियों से मिलने से मना कर दिया। महिलाओं द्वारा काफी देर तक बहस करने और कानून का हवाला देने के बाद हंगामा बढ़ने पर दोनों की मुलाकात वरिष्ठ अधिकारियों से हुई, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने महिलाओं के साथ एक वरिष्ठ अधिकारी को घटनास्थल पर भेजा। रबिया ने बताया कि वह दुर्घटना में पीड़ित एक लड़की को लेकर अस्पातल पहुंची थी। इस दौरान अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। वहीं, लेबर रूम को लेकर हालात बहुत बदतर थे। लेबर रूम में मौजूद गर्भवती महिलाओं की एक ही बिस्तर पर कई महिलाओं के मौजूद होने व अव्यवस्था को लेकर शिकायत थी।
पुलिस ने शिकायत मिलने से किया मना
सफदरजंग अस्पताल की घटना को लेकर दक्षिण-पश्चिम पुलिस उपायुक्त मनोज सी का कहना है कि फिलहाल पीड़ित परिवार की ओर से इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि परिवार की ओर से कोई शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो जो भी कानूनी कार्रवाई होगी वह पुलिस की ओर से की जाएगी।