चारा घोटाले के दोषी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के समर्थकों ने देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स में जमकर उत्पात मचाया। सोमवार दोपहर लालू यादव को डिस्चार्ज कराने को लेकर उठे विवाद में 8-10 लोगों ने मिलकर कैथ लैब में तोड़फोड़ की और वहां मौजूद सुरक्षा गार्डों से मारपीट भी की। इस घटना में एम्स के एक गार्ड को चोटें भी आई हैं।
PICS: 7-8 लोगों के साथ एम्स डायरेक्टर का पीछा करते कैथलैब पहुंचे लालू, तोड़ा गेट गार्ड को किया घायल
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सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, झड़प के वक्त लालू प्रसाद यादव और एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया मौजूद थे। बहरहाल काफी गहमा-गहमी के बीच लालू शाम करीब चार बजे एम्स से रांची रिम्स के लिए रवाना हुए। एम्स प्रबंधन ने इस मामले में लिखित शिकायत दिल्ली पुलिस को दी है। हालांकि पुलिस ने सोमवार देर शाम तक मामला दर्ज नहीं किया था।
पुलिस को दी शिकायत में एम्स के उप मुख्य सुरक्षा अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि सोमवार दोपहर करीब 12:45 बजे लालू प्रसाद यादव के 8 से 10 समर्थकों ने कर्मचारियों के साथ गलत व्यवहार किया। वे लालू यादव को डिस्चार्ज करने के खिलाफ अस्पताल परिसर में नारेबाजी करने लगे। लालू यादव करीब एक महीने से एम्स के ओल्ड प्राइवेट वार्ड में भर्ती थे। इन लोगों ने पैथ लैब का दरवाजा तोड़ा। इन्हें रोकने के प्रयास में सुरक्षा गार्ड खुर्शीद आलम घायल हो गया। दीपक कुमार ने पुलिस से मुकदमा दर्ज करने की मांग की है, जबकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच करने के बाद ही मुकदमा दर्ज किया जा सकेगा।
शनिवार को भेज रहे थे रांची
रांची रिम्स से दिल्ली एम्स पहुंचने के बाद लालू प्रसाद यादव का उपचार मेडिकल बोर्ड की निगरानी में चल रहा था। बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर शनिवार को एम्स से उन्हें डिस्चार्ज करना था। लालू यादव ने सोमवार को रांची भेजने की अपील की। इसके बाद एम्स प्रबंधन ने उन्हें 30 अप्रैल को रांची भेजने के लिए कागजी कार्यवाही की थी। प्रबंधन के मुताबिक, मेडिकल बोर्ड ने लालू यादव की सेहत में सुधार आने के बाद उन्हें वापस रिम्स जाकर क्रोनिक संबंधी परेशानी का उपचार कराने की सलाह दी थी। फिलहाल उनकी सेहत स्थिर है और वे दिल्ली से रांची की यात्रा के लिए फिट हैं।
तबियत खराब हुई तो एम्स जिम्मेदार
एम्स से रैफर होने की जानकारी मिलने के बाद लालू यादव ने निदेशक को राष्ट्रीय जनता दल के लेटरहेड पर शिकायत देकर कहा कि रांची में किडनी का उपचार नहीं होता है। उन्हें किडनी क्रोनिक बीमारी अभी भी है। दिल्ली से रांची पहुंचने में करीब 16 घंटे लगते हैं। ऐसे में अगर उन्हें डिस्चार्ज किया जाता है और रास्ते में उन्हें किसी भी तरह की तकलीफ होती है तो इसकी जिम्मेदारी एम्स प्रबंधन की होगी। इस शिकायत पर एम्स प्रबंधन ने संज्ञान न लेते हुए उन्हें तत्काल रांची भेजने का निर्णय लिया।