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UP: चार साल से गुरुग्राम की कंपनियों में काम कर रहे थे युवराज, सॉफ्टवेयर इंजीनियर को लेकर दोस्तों ने खोले राज
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 21 Jan 2026 03:15 PM IST
सार
ग्रेटर नोएडा के इंजीनियर युवराज की मौत के चार दिन बार पुलिस ने एनडीआरएफ की मदद से पानी से कार को बाहर निकाला। एनडीआरएफ की टीम को 6 घंटे से अधिक समय की मशक्कत के बाद सफलता मिली।
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Noida techie death
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
ग्रेटर नोएडा में हादसे का शिकार हुए युवराज ने ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया कॉलेज से 2022 में बीटेक की पढ़ाई की थी। पहली नौकरी लगने के बाद वह नवंबर 2024 तक गाजियाबाद में रहे थे। वहां से वह रोजाना मेट्रो के जरिए गुरुग्राम स्थित अपने ऑफिस जाते थे। मेट्रो कनेक्टिविटी होने की वजह से उनका सफर आसान था। मगर ग्रेटर नोएडा शिफ्ट होने के बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं होने के कारण अपनी कार से ही सप्ताह में एक से दो बार ऑफिस जाना पड़ता था।
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कार समेत डूब गया सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज
- फोटो : अमर उजाला
दोस्तों ने कहा- युवराज नहीं चलाते थे तेज गाड़ी
युवराज पिछले चार साल से गुरुग्राम की अलग-अलग कंपनी में काम कर रहे थे। हालांकि करीब दो महीने पहले ही नई कंपनी जॉइन की थी। युवराज अपने काम को लेकर बेहद ईमानदार थे। वह अपने काम का एक्सपर्ट थे। जिस डाटा स्टोर की कंपनी में वर्तमान में काम कर रहे थे।
युवराज पिछले चार साल से गुरुग्राम की अलग-अलग कंपनी में काम कर रहे थे। हालांकि करीब दो महीने पहले ही नई कंपनी जॉइन की थी। युवराज अपने काम को लेकर बेहद ईमानदार थे। वह अपने काम का एक्सपर्ट थे। जिस डाटा स्टोर की कंपनी में वर्तमान में काम कर रहे थे।
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इंजीनियर युवराज की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
वहां भी लोग से उसके काम से खुश थे। युवराज की बहन यूके में रहती हैं। युवराज भी शादी के बाद यूके रहना चाहते थे। युवराज मेहनती, जिम्मेदार और परिवार के प्रति बेहद संवेदनशील थे
नोएडा के सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल स्थित पानी से मृतक युवराज की कार को क्रेन से निकाला गया
- फोटो : अमर उजाला
छह घंटे की मशक्कत के बाद निकाली जा सकी कार
ग्रेटर नोएडा के इंजीनियर युवराज की मौत के चार दिन बार पुलिस ने एनडीआरएफ की मदद से पानी से कार को बाहर निकाला। एनडीआरएफ की टीम को 6 घंटे से अधिक समय की मशक्कत के बाद सफलता मिली। इसमें सोनार (साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग सिस्टम) तरंगों की मदद मिली। हालांकि इस दौरान भी लापरवाही दिखी। कार को बाहर निकालने में प्रयोग की गई बेल्ट पुरानी थी, जो कार का वजन नहीं झेल सकी। उसके बाद लोहे की चेन की मदद से कार को बाहर निकाला गया।
ग्रेटर नोएडा के इंजीनियर युवराज की मौत के चार दिन बार पुलिस ने एनडीआरएफ की मदद से पानी से कार को बाहर निकाला। एनडीआरएफ की टीम को 6 घंटे से अधिक समय की मशक्कत के बाद सफलता मिली। इसमें सोनार (साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग सिस्टम) तरंगों की मदद मिली। हालांकि इस दौरान भी लापरवाही दिखी। कार को बाहर निकालने में प्रयोग की गई बेल्ट पुरानी थी, जो कार का वजन नहीं झेल सकी। उसके बाद लोहे की चेन की मदद से कार को बाहर निकाला गया।
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नोएडा के सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल स्थित पानी से मृतक युवराज की कार को क्रेन से निकाला गया
- फोटो : अमर उजाला
घटना 16 जनवरी की रात करीब 12 बजे की है। करीब दो घंटे बाद युवराज पानी में डूब गया। उसके करीब दो घंटे बाद शव को बाहर निकाला गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, लेकिन घटना के तीन दिन बाद भी कार को बाहर नहीं निकाला गया। इस पर भी किरकिरी होने के बाद मंगलवार को पुलिस व प्रशासन ने एनडीआरएफ टीम की मदद से कार की तलाश शुरू की।