दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के साध नगर इलाके में बुधवार को लगी भीषण आग की तपिश गुरुवार को 36 घंटे बीत जाने के बाद भी महसूस की जा सकती थी। अमर उजाला की टीम ने घटनास्थल के पास बने एक घर में जाकर देखा कि जली हुई इमारत की लपटें और गर्मी अभी भी बनी हुई थी। बचाव कार्य के लिए बनाए गए छेद के अंदर झांकने पर सब कुछ जला हुआ और राख में बदल चुका था। इस को ध्यान में रखते हुए फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (एफएसएल) टीम एहतियात बरत रही थी। ताकि कहीं टीम को चोट न पहुंचे। दिनभर टीम ने हर मंजिल की सघन और गहन जांच की। सभी साक्ष्यों को पूरी तरह से सावधानीपूर्वक जांचकर महफूज किया।
36 घंटे बाद भी तप रही मौत की इमारत: बचाव के लिए बनाए गए छेद से दिखाई दे रहा तबाही का मंजर, तस्वीरें गवाह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद शुरुआत में लपटें सीमित थीं, लेकिन जैसे ही यह शोरूम तक पहुंची, स्थिति अचानक बिगड़ गई। शोरूम में रखे ज्वलनशील पदार्थों ने आग को तेजी से भड़काया, जिससे पूरी इमारत धुएं और आग की चपेट में आ गई।
शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जद्दोजहद करती रही पुलिस
जांच के दौरान टीम ने आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया और सभी नमूनों को सुरक्षित तरीके से इकट्ठा किया। इसके अलावा, सीढ़ियां लगाकर उस जगह की भी जांच की गई, जहां स्थानीय लोगों ने शार्ट सर्किट होने का बड़ा दावा किया है। यह दौर पूरे दिन जारी रहा। इस दौरान पुलिस टीम भी इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जद्दोजहद करती दिखी। वहीं, सोलर पेनल से जुड़े विशेषज्ञों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सोलर पैनल सिस्टम में यदि वायरिंग या मेंटेनेंस में कोई कमी हो, तो शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में समय-समय पर जांच और सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है। यह घटना सोलर पैनल जैसी आधुनिक तकनीकों के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर भी नए सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों ने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सख्त सुरक्षा नियमों और नियमित निरीक्षण की आवश्यकता है।
जले हुए कमरे, फर्नीचर और बिस्तर आग की भयानक ताकत की गवाही दे रहे
इसके अलावा, वीरान पड़ी इमारत में हर तरफ सिर्फ राख ही दिखाई दे रही थी। जले हुए कमरे, फर्नीचर और बिस्तर आग की भयानक ताकत की गवाही दे रहे थे। इस दौरान उस भयावह मंजर को साफ देखा जा सकता था, जो मृतक व पीड़ितों ने महसूस किया। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हुई और एक खुशहाल परिवार पूरी तरह तबाह हो गया। स्थानीय लोग और पड़ोसी बताते हैं कि आग लगने के समय परिवार के लोग अंदर फंसे थे। धुएं और लपटों की वजह से घर के अंदर निकलना मुश्किल हो गया था। कई लोगों ने बच्चों और बुजुर्गों को बचाने की कोशिश की, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर थी। हादसे ने यह स्पष्ट कर दिया कि इमारत में अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और समय पर बचाव कार्य की कमी कितनी घातक हो सकती है। पड़ोसियों का कहना है कि यह आग हादसा प्रशासन और लोगों के लिए चेतावनी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा और आपात व्यवस्था को मजबूत करना बहुत जरूरी है।
नीचे लगे सोलर पैनल में बिजली बॉक्स से शार्ट सर्किट की वजह से लगी आग, दावा
दर्दनाक आग हादसे को लेकर स्थानीय लोग और प्रत्यक्षदर्शियों की ओर से अहम दावा किया है। लोगों को कहना है कि इमारत की छत पर सोलर पैनल लगे हुए है। ऐसे में इसके बिजली बॉक्स से शार्ट सर्किट की वजह से आग लगने के तमाम दावे गुरुवार को किए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हल्की सी चिंगारी उठने के बाद लपटें तेजी से पूरी बिल्डिंग में फैल गईं। शुरुआत में आग छत तक सीमित थी, लेकिन कुछ समय में यह ऊपर की मंजिलों तक फैल गई। जांच में इसकी अगर यह पुष्टि होती है, तो दिल्ली में सोलर पैनल से आग लगने का यह पहला मामला माना जाएगा। प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते पूरी इमारत धुएं और आग की चपेट में आ गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, अभी तक आग लगने के कारण की पुष्टि नहीं हुई।
ज्वलनशील सामान बना आग का बड़ा कारण, मिनटों में फैली लपटें
भीषण आग हादसे में एक बड़ा कारण सामने आया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इमारत में कॉस्मेटिक शोरूम के ज्वलनशील सामान ने आग को तेजी से फैलाने में अहम भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि थिनर, नेल पॉलिश रिमूवर, नेल पॉलिश और अन्य केमिकल उत्पादों ने आग को कुछ ही मिनटों में विकराल रूप दे दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद शुरुआत में लपटें सीमित थीं, लेकिन जैसे ही यह शोरूम तक पहुंची, स्थिति अचानक बिगड़ गई। शोरूम में रखे ज्वलनशील पदार्थों ने आग को तेजी से भड़काया, जिससे पूरी इमारत धुएं और आग की चपेट में आ गई। लोगों को बाहर निकलने का समय भी नहीं मिल पाया।