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तुगलकाबाद अग्निकांड: किस्तों से खड़ा किया घर, चंद मिनटों में राख हुआ सब कुछ; बहन-भाई और नानी की दर्दनाक मौत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Fri, 12 Jun 2026 09:54 PM IST
सार

परिवार की सबसे बड़ी त्रासदी यह भी है कि मां गुड्डी देवी न सुन सकती हैं और न बोल सकती हैं। पति की मौत के बाद उन्होंने अपने बच्चों के सहारे जीवन को आगे बढ़ाया। परिजन नीलम बताती हैं कि वह बेहद शांत स्वभाव की हैं। बच्चों की खुशी ही उनकी दुनिया थी। सोनी की शादी की चर्चा से वह सबसे ज्यादा खुश थीं। पति के निधन के बाद यह परिवार के लिए पहली बड़ी खुशी थी। 

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Tughlakabad Fire tragic deaths of brother sister and grandmother
तुगलकाबाद में तीन की मौत - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन की 50 गज की उस इमारत में तीसरी मंजिल पर बना छोटा-सा फ्लैट पंकज और उनके परिवार के लिए सिर्फ एक मकान नहीं था, बल्कि बेहतर भविष्य का सपना था। यह घर एकमुश्त रकम से नहीं खरीदा गया था। हर महीने कमाई से बचाए गए पैसों और किस्तों के सहारे यह आशियाना खड़ा हुआ था। परिवार को उम्मीद थी कि अब जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट आएगी। लेकिन गुरुवार रात लगी आग ने उस सपने को हमेशा के लिए राख कर दिया।

Tughlakabad Fire tragic deaths of brother sister and grandmother
मौके पर दिल्ली पुलिस व फॉरेंसिक की टीम जांच करते हुए। - फोटो : अमर उजाला

पिता के बाद पंकज थी आखिरी आश
पंकज परिवार के इकलौते बेटे थे। पिता का दो साल पहले निधन हो चुका था। इसके बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। मां, दो बहनों और बुजुर्ग नानी की देखभाल से लेकर घर की किस्त भरने तक का सारा बोझ वही उठाते थे। परिजनों का कहना है कि पंकज कभी अपनी जरूरतों की बात नहीं करते थे। उनकी हर चिंता परिवार से शुरू होकर परिवार पर ही खत्म हो जाती थी।

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पंकज के मामा और पंकज परिवार के साथ - फोटो : अमर उजाला

मामा बोले-भांजे ने भांजी की शादी के लिए दिन रात मेहनत की...आज दोनों की अर्थी उठ रही
घर में इन दिनों शादी की तैयारियों की बातें चल रही थीं। 24 वर्षीय सोनी के लिए लड़का देखा जा रहा था। परिवार में लंबे समय बाद खुशियों ने दस्तक दी थी। रिश्तेदार मनीष बताते हैं कि मां गुड्डी और भाई पंकज, दोनों सोनी की शादी को लेकर बेहद उत्साहित थे। योजना थी कि पहले बहन की डोली विदा होगी, फिर पंकज के घर बसाने की बात आगे बढ़ेगी। ...लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था, यह कहते-कहते सोनी के मामा की आंखें भर आती हैं। वह कहते हैं, मेरे भांजे ने बहन की शादी के लिए दिन-रात मेहनत की थी। आज दोनों की अर्थी उठ रही है। इससे बड़ा दुख क्या होगा? हादसे की रात तक सब कुछ सामान्य था। किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ घंटों बाद खुशियों से भरा घर चीखों और मातम में बदल जाएगा।

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परिवार संग पंकज - फोटो : अमर उजाला

जिम्मेदार बेटा, अधूरे रह गए सपने
पंकज के दोस्त साहिल बताते हैं कि वह बेहद जिम्मेदार और मेहनती इंसान थे। अक्सर कहते थे, पहले बहन की शादी अच्छे से कर दूं, फिर अपने बारे में सोचूंगा। उन्होंने अपनी इच्छाओं को हमेशा परिवार की जरूरतों के पीछे रखा। आज वह नहीं हैं। घर की दीवारें धुएं से काली पड़ चुकी हैं। सामान राख में बदल चुका है। सबसे बड़ा नुकसान यह है कि परिवार का सहारा छिन गया है। आग ने केवल तीन जिंदगियां नहीं लीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य की नींव हिला दी है।

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पंकज के परिजन - फोटो : अमर उजाला

अपने दम पर पहचान बनाना चाहती थी सोनी
सोनी पास के एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। वह परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी हाथ बंटाती थी। सुबह काम पर जाती और शाम को घर लौटकर मां के काम में हाथ बंटाती। परिजनों के मुताबिक वह अपने काम को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि अपने हुनर और पहचान का जरिया मानती थी। शादी की बात चल रही थी, लेकिन वह आत्मनिर्भर बने रहना चाहती थी। उसका सपना था कि शादी के बाद भी काम जारी रखे और अपने पैरों पर खड़ी रहे। आग ने उसके सारे सपने अधूरे छोड़ दिए।

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