ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी में जमींदोज हुई दो इमारतों में 16 परिवारों के लगभग 30-40 लोग दब गए हैं। प्रशासन, पुलिस और बिल्डरों की मिलीभगत और नियमों की अनदेखी के चलते हुए इस दर्दनाक हादसे ने कई जिंदगियां छीन लीं। तस्वीर में दिख रहे मलबे के नीचे दबे एक शख्स के पैर को देखकर ही आप ये समझ सकते हैं कि यह कितनी भयावह त्रासदी है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पीड़ितों ने कैसे बयां किया है अपना दुख... (सभी फोटोः लाल सिंह, जेपी शर्मा, सुनील शर्मा, राजेश भाटी)
मलबे में जिंदगी की तलाशः सामने आईं हादसे की दर्दनाक तस्वीरें, अब भी दबीं हैं दर्जनों लाशें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
'घर खरीदने का वादा पूरा किया, अब विदेश कौन ले जाएगा’ घर खरीदने के बाद विदेश घूमाने का वादा किया था। घर का वादा तो पूरा कर दिया, लेकिन विदेश लेकर कौन जाएगा। यह दर्द एक बेबस बुजुर्ग पिता का था, जो बुधवार को शाहबेरी में गिरी इमारत के पास बैठे हुए थे और उन्हें अपने बेटे शिव, पत्नी राजकुमारी, बड़े बेटे की पत्नी प्रियंका व पोती पंखुड़ी के मलबे में जिंदा होने की उम्मीद थी। लेकिन देर रात शिव, राजकुमारी, प्रियंका और पंखुड़ी के शव मलबे से निकाल लिए गए।
मैनपुरी के उद्देतपुर अबई गांव निवासी सुरेन्द्र त्रिवेदी के छोटे बेटे शिव कुमार त्रिवेदी ने कुछ दिन पहले ही शाहबेरी में गिरी इमारत की चौथी मंजिल पर फ्लैट लिया था। शिव कुमार दिल्ली के कोटला स्थित एक कंपनी में जॉब करते थे। शनिवार (14 जुलाई) को उन्होंनेे फ्लैट में गृह प्रवेश किया था। गृह प्रवेश के दौरान परिवार के सभी सदस्यों के साथ-साथ दोस्तों को भी बुलाया था। दो दिन उसके घर का माहौल काफी खुशनुमा था, लेकिन किसी को नहीं पता था कि दो दिन बाद ही उनकी यह खुशी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। गृह प्रवेश का कार्यक्रम पूरा होने के बाद सभी लोग अपने-अपने घर चले गये थे। फ्लैट पर शिव कुमार के साथ उसकी मां राजकुमारी, भाभी प्रियंका और भतीजी पंखुडी रुके थे।
टीवी पर खबर देखकर पहुंचे शाहबेरी बुधवार को टीवी पर खबर देखकर परिजन परेशान हो गये और उन्होंने शिव कुमार से संपर्क किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। उसके बाद शिव कुमार के दोस्त शाहबेरी पहुंचे तो नजारा देखकर दंग रह गये। उसे परिवार के सदस्यों को जानकारी दी। उसके बाद परिवार मौके पर पहुंचा। परिवार की सदस्य नेहा ने बताया कि रात में शिव ने अपने दोस्त से विडियो कॉलिंग पर बात की थी।
दिन भर अपनों के लिये तड़पता रहा त्रिवेदी परिवार
इमारत का मलबा पड़ा हुआ था और उसमें परिवार के चार सदस्य दबे हो तो रुह कांप जाती है। ऐसा ही हाल त्रिवेदी परिवार का था। बार-बार मलबे के पास जा रहे थे और उसे दबे परिवार के सदस्यों को खोज रहे थे। दोपहर में कपड़े और अन्य सामान मिलने पर खलबली मच गयी। परिवार को लगा कि अभी सभी जिंदा है और बचाव कार्य को तेज करने की गुहार लगायी। सुबह से दोपहर तक जब परिवार को नहीं निकाला जा सके तो उनका धैर्य जवाब दे गया और पुलिस व प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जाहिर किया। कई बार काफी नोंकझोक भी हुयी। मुख्यमंत्री कार्यालय में फोन मिलाकर शिकायत भी की। डीएम से लेकर एनडीआरएफ जवानों से गुहार लगायी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।