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Delhi: नेशनल साइंस सेंटर में वर्चुअल रियलिटी थिएटर का उद्घाटन, अब अंतरिक्ष को और करीब से महसूस करेंगे दर्शक
संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Sat, 17 Jan 2026 11:08 PM IST
सार
दिल्ली के राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र में शनिवार को एक अत्याधुनिक वर्चुअल रियलिटी थिएटर का उद्घाटन किया गया। इस नई सुविधा के साथ, विज्ञान और अंतरिक्ष प्रेमी अब अंतरिक्ष को पहले से कहीं अधिक करीब से महसूस कर सकेंगे।
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वर्चुअल रियलिटी थिएटर का उद्घाटन
- फोटो : अमर उजाला
अंतरिक्ष को समझने और महसूस करने की जिज्ञासा अब किताबों और तस्वीरों तक सीमित नहीं रही। राजधानी के राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र में शनिवार को अत्याधुनिक वर्चुअल रियलिटी यानी वीआर थिएटर के उद्घाटन के साथ विज्ञान और अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए एक नया अनुभवात्मक संसार खुल गया है। इसी अवसर पर ‘पृथ्वी से कक्षा तक: अंतरिक्ष की एक साथ खोज’ विषय पर आधारित 30 पैनलों की विशेष प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया गया।
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वर्चुअल रियलिटी थिएटर का उद्घाटन
- फोटो : अमर उजाला
वीआर थिएटर में तकनीक के जरिये अंतरिक्ष की सैर
कार्यक्रम की शुरुआत नवस्थापित वर्चुअल रियलिटी थिएटर के उद्घाटन के साथ हुई। यह थिएटर उच्च गुणवत्ता वाले वीआर हेडसेट और मोशन-आधारित सीट्स से लैस है, जो दर्शकों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में जीवन जैसे वास्तविक अनुभवों से रूबरू कराता है। इसके अलावा यहां प्रदर्शित की जाने वाली पांच मिनट की इमर्सिव फिल्म दर्शकों को माइक्रोग्रैविटी, अंतरिक्ष में रहन-सहन और पृथ्वी के दृश्य जैसे अनुभव देती है। खास बात यह है कि दर्शक अपनी पसंद की भाषा और कंटेंट का चयन स्वयं कर सकते हैं। थिएटर में कुल 19 वीआर स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिससे एक साथ कई आगंतुक इस अनुभव का लाभ उठा सकते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत नवस्थापित वर्चुअल रियलिटी थिएटर के उद्घाटन के साथ हुई। यह थिएटर उच्च गुणवत्ता वाले वीआर हेडसेट और मोशन-आधारित सीट्स से लैस है, जो दर्शकों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में जीवन जैसे वास्तविक अनुभवों से रूबरू कराता है। इसके अलावा यहां प्रदर्शित की जाने वाली पांच मिनट की इमर्सिव फिल्म दर्शकों को माइक्रोग्रैविटी, अंतरिक्ष में रहन-सहन और पृथ्वी के दृश्य जैसे अनुभव देती है। खास बात यह है कि दर्शक अपनी पसंद की भाषा और कंटेंट का चयन स्वयं कर सकते हैं। थिएटर में कुल 19 वीआर स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिससे एक साथ कई आगंतुक इस अनुभव का लाभ उठा सकते हैं।
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वर्चुअल रियलिटी थिएटर का उद्घाटन
- फोटो : अमर उजाला
धरती से कक्षा तक भारत की वैज्ञानिक यात्रा
वीआर थिएटर के बाद अतिथियों ने ‘पृथ्वी से कक्षा तक: अंतरिक्ष की एक साथ खोज’ प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में भारत की प्राचीन खगोलशास्त्रीय परंपराओं, वैज्ञानिक सोच और आधुनिक अंतरिक्ष अभियानों की क्रमबद्ध झलक प्रस्तुत की गई है। वहीं, इस प्रदर्शनी के पैनल इसरो की प्रमुख उपलब्धियों के साथ-साथ भारत की भावी अंतरिक्ष योजनाओं और वैज्ञानिक महत्वाकांक्षाओं को भी रेखांकित करते हैं। बता दें, कि आम दर्शकों के लिए यह प्रदर्शनी 30 जनवरी 2026 तक राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र में खुली रहेगी।
वीआर थिएटर के बाद अतिथियों ने ‘पृथ्वी से कक्षा तक: अंतरिक्ष की एक साथ खोज’ प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में भारत की प्राचीन खगोलशास्त्रीय परंपराओं, वैज्ञानिक सोच और आधुनिक अंतरिक्ष अभियानों की क्रमबद्ध झलक प्रस्तुत की गई है। वहीं, इस प्रदर्शनी के पैनल इसरो की प्रमुख उपलब्धियों के साथ-साथ भारत की भावी अंतरिक्ष योजनाओं और वैज्ञानिक महत्वाकांक्षाओं को भी रेखांकित करते हैं। बता दें, कि आम दर्शकों के लिए यह प्रदर्शनी 30 जनवरी 2026 तक राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र में खुली रहेगी।
वर्चुअल रियलिटी थिएटर का उद्घाटन
- फोटो : अमर उजाला
छात्रों से संवाद: अंतरिक्ष के भीतर और बाहर की जिंदगी
कार्यक्रम के अंतिम चरण में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने दिल्ली एनसीटी के 22 स्कूलों से आए छात्रों से संवाद किया। उन्होंने अंतरिक्ष मिशनों के चयन और प्रशिक्षण की कठिन प्रक्रिया, अंतरिक्ष यात्रा से पहले की तैयारी और माइक्रोग्रैविटी में शरीर व मन पर पड़ने वाले प्रभावों को सरल भाषा में समझाया। इस दौरान, उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में रक्त संचार, संतुलन और शारीरिक संरचना में कैसे बदलाव आते हैं।
पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखने के अनुभव और दृश्य साझा करते हुए उन्होंने छात्रों को विज्ञान के प्रति और अधिक जिज्ञासु बनने के लिए प्रेरित किया। संवाद के दौरान छात्रों ने अंतरिक्ष में सोने, खाने और दैनिक जीवन को लेकर उत्साहपूर्वक सवाल पूछे। वहीं अभिभावकों ने बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और अंतरिक्ष विज्ञान में करियर की संभावनाओं को लेकर मार्गदर्शन मांगा। ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने बताया, कि अंतरिक्ष यात्री बनना उनका प्रारंभिक लक्ष्य नहीं था, बल्कि योग्यता, प्रशिक्षण और सही अवसरों ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
युवा ही भविष्य की वैज्ञानिक शक्ति
मीडिया से बातचीत में राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र के निदेशक विजय शंकर शर्मा ने कहा, कि इस तरह की पहल युवाओं को विज्ञान और तकनीक से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वहीं ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि भारत के युवाओं में अपार क्षमता है और आने वाले वर्षों में यही युवा देश की अंतरिक्ष और वैज्ञानिक उपलब्धियों को नई ऊंचाई देंगे।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने दिल्ली एनसीटी के 22 स्कूलों से आए छात्रों से संवाद किया। उन्होंने अंतरिक्ष मिशनों के चयन और प्रशिक्षण की कठिन प्रक्रिया, अंतरिक्ष यात्रा से पहले की तैयारी और माइक्रोग्रैविटी में शरीर व मन पर पड़ने वाले प्रभावों को सरल भाषा में समझाया। इस दौरान, उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में रक्त संचार, संतुलन और शारीरिक संरचना में कैसे बदलाव आते हैं।
पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखने के अनुभव और दृश्य साझा करते हुए उन्होंने छात्रों को विज्ञान के प्रति और अधिक जिज्ञासु बनने के लिए प्रेरित किया। संवाद के दौरान छात्रों ने अंतरिक्ष में सोने, खाने और दैनिक जीवन को लेकर उत्साहपूर्वक सवाल पूछे। वहीं अभिभावकों ने बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और अंतरिक्ष विज्ञान में करियर की संभावनाओं को लेकर मार्गदर्शन मांगा। ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने बताया, कि अंतरिक्ष यात्री बनना उनका प्रारंभिक लक्ष्य नहीं था, बल्कि योग्यता, प्रशिक्षण और सही अवसरों ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
युवा ही भविष्य की वैज्ञानिक शक्ति
मीडिया से बातचीत में राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र के निदेशक विजय शंकर शर्मा ने कहा, कि इस तरह की पहल युवाओं को विज्ञान और तकनीक से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वहीं ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि भारत के युवाओं में अपार क्षमता है और आने वाले वर्षों में यही युवा देश की अंतरिक्ष और वैज्ञानिक उपलब्धियों को नई ऊंचाई देंगे।