राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए द्वारा रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक पदार्थ रखने के मामले में संलिप्तता के संदेह में मुंबई पुलिस के पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एवं शिवसेना नेता प्रदीप शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में शर्मा का नाम दूसरे आरोपी जूनियर साथी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट सचिन वाजे के साथ जोड़ा जा रहा है।
एंटीलिया मामला : कौन हैं प्रदीप शर्मा, कैसे बने एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और क्यों है सलाखों के पीछे, यहां पढ़ें
कभी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को मुंबई में अपराधियों के लिए मौत का दूसरा नाम माना जाता था। शर्मा के एनकाउंटर के आंकड़ों की संख्या 150 के आसपास बताई जाती है।आइए जानते हैं शर्मा के जीवन से जुड़े कुछ अनसुने पहलू और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट से राजनीति और फिर सलाखों के पीछे तक का सफर एक नजर में ...
आगरा में मुंबई का सफर
पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एवं शिवसेना नेता प्रदीप शर्मा का उत्तर प्रदेश से एक खास कनेक्शन हैं। उत्तर प्रदेश की ताजनगरी आगरा से गहरा जुड़ाव है। मूल रूप से शर्मा के पिता आगरा के ही रहने वाले हैं। प्रदीप शर्मा का जन्म भी आगरा में हुआ। शर्मा के पिता अंग्रेजी के प्रोफेसर थे। वे नौकरी के लिए महाराष्ट्र चले गए थे।
फिर वहीं, शर्मा ने एमएससी तक पढ़ाई की और 1983 में महाराष्ट्र पुलिस सेवा के लिए चुने गए। मुंबई के माहिम थाने में शुरुआती पोस्टिंग के बाद शर्मा का तबादला जुहू की स्पेशल ब्रांच में कर दिया गया था। इसके बाद से इंस्पेक्टर शर्मा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
ऐसे पाई थी शोहरत
1990 के दशक और 2000 की शुरुआत में जब मुंबई में गैंगवार अपनी चरम पर हुआ करते थे। तब महाराष्ट्र सरकार ने स्पेशल टीम गठित की थी। इसमें प्रदीप शर्मा समेत क्राइम ब्रांच के प्रमुख अधिकारियों को शामिल किया गया था। इस टीम ने अंडरवर्ल्ड के कई अपराधियों को ताबड़तोड़ एनकाउंटर करते हुए ठिकाने लगाया।
हालांकि, इनमें से कई एनकाउंटर विवादित भी रहे। तब से ही शर्मा भी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर पहचाने जाने लगे। लगभग 25 साल सेवा के बाद तब शर्मा को मुंबई पुलिस की क्राइम इंटेलीजेंस यूनिट में सीनियर इंस्पेक्टर बना दिया गया। शर्मा और उनके साथियों ने सुभाष मकाडवाला और रवि पुजारी के गुरु श्रीकांत मामा को भी मुठभेड़ में ढेर किया था।
फर्जी एनकाउंटर में निलंबित रहे, फिर वापसी की
हालांकि, 2008 में प्रदीप शर्मा को लखन भैया फर्जी एनकाउंटर मामले और माफिया के साथ संबंध रखने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। इस मामले में 13 अन्य पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी भी हुई थी। हालांकि, बाद में 2013 में उन्हें क्लीन चिट मिल गई।
लंबे समय तक निलंबित रहने के बाद 2016 में उन्होंने पुलिस बल में वापसी की। कहा जाता है कि तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार शर्मा को फिर से नौकरी पर रखने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन राजनीति में उतरने की धमकी के बाद उन्हें सेवा में वापस ले लिया गया। प्रदीप शर्मा को अंडरवर्ल्ड में अपने नेटवर्क के लिए भी जाना जाता है।
दाऊद के भाई को पकड़ा, शिवसेना से चुनाव लड़े
2017 में ठाणे एंटी एक्सटॉर्शन सेल (रंगदारी वसूली विरोधी प्रकोष्ठ) के प्रमुख के तौर पर शर्मा ने माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम के छोटे भाई इकबाल कासकर को गिरफ्तार कर मुंबई व ठाणे में जबरन वसूली के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया था।
शर्मा ने लगभग 35 साल की सेवा के बाद जुलाई 2019 में ठाणे एंटी एक्सटॉर्शन सेल (रंगदारी वसूली विरोधी प्रकोष्ठ) के प्रमुख के पद से इस्तीफा देते हुए ऐच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था। जिसे फडणवीस सरकार ने मंजूर कर लिया था।
इसके बाद, 2019 में ही शर्मा ने राजनीति में प्रवेश किया और शिवसेना का दामन थाम लिया। उन्होंने 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना के टिकट पर मुंबई के नालासोपारा से चुनाव भी लड़ा था, मगर शर्मा को जीत नसीब नहीं हुई।