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भारतीय प्रशासनिक सेवा : कैसे बनते हैं आईएएस अधिकारी? पढ़िए चयन, प्रशिक्षण, नियुक्ति व पदोन्नति प्रक्रिया

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Wed, 16 Jun 2021 07:38 PM IST
सार

संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित की जानी वाली सिविल सेवा परीक्षा में शीर्ष रैंक (लगभग शीर्ष 100 रैंक) हासिल करने वाले उम्मीदवार ही भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बन पाते हैं।

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Indian Administrative Service : How to become an IAS officer? Know the selection, training, appointment and promotion process
आईएएस : भारतीय प्रशासनिक सेवा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service) को देश का सबसे अहम सरकारी सेवा विभाग माना जाता है। इसमें चयन संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित की जानी वाली सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE - Civil Service Examination) के माध्यम से होता है। हर साल लाखों युवा इस परीक्षा में शामिल भी होते हैं, लेकिन कुछ की ही मेहनत सफल हो पाती है और वे चयनित हो पाते हैं।


भारत सरकार के करीब 24 सेवा विभागों में संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित की जानी वाली सिविल सेवा परीक्षा के जरिये नियुक्तियां होती हैं। इसी परीक्षा से आईएफएस और आईपीएस भी बनते हैं। लेकिन इनमें सबसे अहम पद है आईएएस ऑफिसर यानी भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी का। आईएएस यानी इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस से ही ब्यूरोक्रेसी यानी नौकरशाही में प्रवेश होता है। आईएएस में चयनित अभ्यर्थी विभिन्न मंत्रालयों में सचिव, विभागों या जिलों के प्रशासनिक अधिकारी/ जिलाधिकारी/ कलेक्टर बनते हैं।
एक आईएएस अधिकारी ही भारतीय नौकरशाही के सबसे बड़े पद कैबिनेट सचिव तक भी पहुंच सकता है। मंत्रालयों में सचिव, उप सचिव, सहायक सचिव, अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव जैसे पद आईएएस अधिकारी को ही मिलते हैं। आइए जानते हैं आईएएस बनने के लिए क्या करना पड़ता है और बनने के बाद कौनसे पद मिलते हैं, क्या हैं अधिकार और तनख्वाह एवं सुविधाएं... 

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UPSC - फोटो : social media

आईएएस कैसे बनते हैं?

  • आईएएस बनने के लिए उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/ संस्थान से स्नातक होना अनिवार्य है। 
  • इसके बाद उसे संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित सिविल सेवा परीक्षा पास करनी होती है।
  • इस परीक्षा के जरिये भारत सरकार के करीब 24 सेवा विभागों में नियुक्तियां रैंक के आधार पर मिलती हैं।
  • इस परीक्षा में शीर्ष रैंक (लगभग शीर्ष 100 रैंक) हासिल करने वाले उम्मीदवार ही भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बन पाते हैं।
  • चयन के बाद अधिकारियों की तीन महीने की शुरुआती ट्रेनिंग लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में ही होती है। 
  • ट्रेनिंग पूरी होने के बाद भी आईएएस अधिकारी को एक मेडल दिया जाता है।   

 

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लाल बहादुर शास्त्री नेशनल अकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन

आईएएस प्रशिक्षण व्यवस्था

  • शुरुआती प्रशिक्षण यानी फाउंडेशन कोर्स - 16 सप्ताह (एलबीएसएनए, मसूरी, उत्तराखंड )
  • व्यावसायिक प्रशिक्षण (प्रथम चरण ) - 26 सप्ताह (मसूरी)
  • राज्य स्तर पर प्रशिक्षण (जिला प्रशिक्षण) - 52 सप्ताह  
  • संस्थागत प्रशिक्षण (प्रथम चरण) - 3 सप्ताह
  • विभिन्न विभागों में व्यावहारिक प्रशिक्षण (जिला प्रशिक्षण) - 45 सप्ताह
  • संस्थागत प्रशिक्षण (दूसरा चरण) - 4 सप्ताह
  • व्यावसायिक प्रशिक्षण (दूसरा चरण) - 9 सप्ताह

 

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IAS Training - फोटो : amar ujala

आईएएस प्रशिक्षण की प्रक्रिया

  • आधारभूत प्रशिक्षण के बाद 26 सप्ताह का आईएएस व्यावसायिक प्रशिक्षण (प्रथम चरण) शुरू होता है। इसमें आवश्यक अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान से भी रूबरू कराया जाता है।
  • प्रशिक्षु अधिकारियों को विभिन्न समूहों में दो सप्ताह के लिए भारत भ्रमण कराया जाता है। जिससे ये देश की सांस्कृतिक वैविध्य से परिचित हो सकें। 
  • इन्हें देश की संसदीय व्यवस्था का व्यावहारिक ज्ञान भी कराया जाता है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री से मिलने का अवसर भी मिलता है।
  • इन चरणाों के पश्चात आवंटन के आधार पर राज्य में भेजा जाता है। जहां 52 सप्ताह यानी एक वर्ष का जिला स्तरीय प्रशिक्षण शुरू होता है।  
  • इस दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को राज्य प्रशासनिक अकादमी में राज्य प्रशासन तंत्र का तीन सप्ताह का संस्थागत प्रशिक्षण मिलता है।
  • इसके बाद इनकी प्रशिक्षु अधिकारी के तौर पर जिला विभागों और नगरीय निकायों में नियुक्ति मिलती है। जहां इन्हें सामान्य कानून एवं नियम, कार्मिक प्रशासन, वित्तीय प्रशासन, राजस्व प्रशासन, भू-सुधार, नियोजन एवं विकास आदि का सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान मिलता है।
  • प्रशिक्षण अवधि के दौरान इन्हें व्यावहारिक स्तर पर आने वाली समस्याओं तथा शंकाओं का समाधान जिलाधिकारियों के निर्देशन में होता है।
  • राज्य स्तरीय प्रशिक्षण के आखिरी चरण में पुनः राज्य प्रशासन अकादमी में दूसरे चरण का चार सप्ताह का संस्थागत प्रशिक्षण मिलता है।
  • इसके बाद वापस लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी लौटते हैं और वहां छह सप्ताह के व्यावसायिक प्रशिक्षण का दूसरा चरण शुरू होता है।
  • इसका उद्देश्य आईएएस अधिकारी के रूप में उन्हें शारीरिक-मानसिक तौर पर तैयार करना, उनमें एनालिसिस, राइटिंग तथा संवाद क्षमता बढ़ाना, कंप्यूटर और राजभाषा में कार्य दक्षता और आत्मविश्वास से संपन्न श्रेष्ठ अधिकारी बनाना है।
  • इसके बाद इन्हें यूपीएससी और अकादमी द्वारा आयोजित एक और लिखित परीक्षा से गुजरना पड़ता है। इसमें सफल रहने तथा राज्य कैडर सेवा पूर्ण कर लेने के बाद ही स्थायी नियुक्ति मिलती है।
  • हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों को सेवाकाल के दौरान आवश्यकतानुसार कई बार संक्षिप्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होना पड़ता है। 

 

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IAS Rena Jamil - फोटो : social media

नियुक्ति कहां और कैसे होती है?

  • आईएएस अधिकारी का नियुक्ति के पहले वर्ष में लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलते रहते हैं। इसके पश्चात् उन्हें एक उपखंड (Sub-division) सौंप दिया जाता है। 
  • शुरुआती तौर पर आईएएस को सब डिवीजनल ऑफिसर (SDO), सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट (SDM), चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर (CDO) जैसे पदों पर नियुक्त किया जाता है। 
  • प्रत्येक दो वर्ष कार्य कर लेने के बाद उनका ट्रांसफर एक जिले से दूसरे जिले में किया जाता है। वहीं, अवर सचिव (Under Secretary) के तौर पर प्रशिक्षण के लिए 18 माह के लिए सचिवालय भेजा जाता है। 
  • इसके बाद जिलाधीश या जिलाधिकारी (District Magistrate), जिला कलेक्टर, डिप्टी कमिश्नर (DC) या डिवीजनल कमिश्नर के पद पर नियुक्ति मिलती है।
  • हालांकि, आईएएस की नियुक्ति किसी स्वायत्त संगठन, सार्वजनिक उपक्रम, वर्ल्ड बैंक, एशियाई डेवलपमेंट बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी की जा सकती है। वहीं, केंद्रीय मंत्री के सचिव के रूप में भी कार्य करते हैं।

 

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