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जम्मू-कश्मीर : अभी भी लागू है अनुच्छेद-370! तो फिर हटाया क्या था? कैसे अलग है अनुच्छेद-371 से? यहां समझें

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Thu, 24 Jun 2021 12:50 PM IST
सार

सरकार ने कई दफा कहा है कि अनुच्छेद-370 अभी भी लागू है! तो फिर हटाया क्या था और लागू क्या है? आइए समझते हैं कि क्या थे अनुच्छेद-370 और 35ए? क्या हैं इनके खात्मे के मायने? कितना अलग है अनुच्छेद-371 से? और क्या है इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन ... 

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Jammu and Kashmir :What is Article 370? abolition of Article 370? How is it different from Article-371?
जम्मू और कश्मीर से जुुड़े सवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

हाल ही में एक बार फिर जम्मू-कश्मीर से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज हुई है। गुरुवार, 24 जून, 2021 को दिल्ली में प्रधानमंत्री के साथ कश्मीरी नेताओं की बड़ी बैठक भी हुई है। इससे पहले भी सरकार ने कई दफा कहा है कि अनुच्छेद-370 अभी भी लागू है! तो फिर हटाया क्या था और लागू क्या है? आइए समझते हैं कि क्या थे अनुच्छेद-370 और 35ए? क्या हैं इनके खात्मे के मायने? कितना अलग है अनुच्छेद-371 से? और क्या है इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन ... 



अभी अनुच्छेद-370 का खंड-1 ही लागू है
अब राज्य में अनुच्छेद-370 का खंड-1 ही लागू है। यह कहता है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न राज्य है और संसद को जम्मू-कश्मीर के लिए कानून बनाने का अधिकार है। बाकी अनुच्छेद-370 और 35ए के जो प्रावधान यहां के नागरिकों को कुछ अधिकार और सुविधाएं देते थे, जो देश के अन्य हिस्सों से अलग थे। वे सभी प्रावधान निरस्त कर दिए गए थे। लगभग 22 महीने पहले, पांच अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति के एक अध्यादेश के जरिये जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद-370 के खंड एक को छोड़कर शेष प्रावधानों को निरस्त कर दिया था। आगे पढ़ने के लिए कृपया अगली स्लाइड देखें। 

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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
  • इसके बाद केंद्र सरकार ने संसद के जरिये जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 पहले राज्यसभा और फिर लोकसभा में पारित कराया था।
  • इस अधिनियम के तहत उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था। 
  • इनमें जम्मू-कश्मीर को विधानसभा युक्त केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। जबकि लद्दाख बगैर विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बना।  
  • इससे यहां की राजनीतिक और भौगोलिक तस्वीर ही बदल गई। 


कैसे लागू हुआ था अनुच्छेद-370? 
आजादी के बाद कश्मीर का भारत में विलय हो चुका था। 1949 में तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार ने इसका ड्राफ्ट पेश किया था। विचार-विमर्श और संशोधनों के बाद 27 मई, 1949 को संविधान सभा में अनुच्छेद-306 ए (बाद में 370 कहलाया) पारित हुआ। 17 अक्तूबर, 1949 को अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान का हिस्सा बन गया। हालांकि, इसमें टेम्परेरी शब्द जोड़ा गया था, जो इसके अंतरिम या अस्थायी होने का प्रमाण था। वहीं, नवंबर 1956 में जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान का काम पूरा हुआ था। इसके बाद, 26 जनवरी, 1957 को राज्य में विशेष संविधान लागू कर दिया गया। 
 

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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

अनुच्छेद-370 के प्रावधान कैसे हटाए गए?
अनुच्छेद-370 के खंड तीन में इसके खात्मे को लेकर दो प्रावधान रखे गए थे, राष्ट्रपति के आदेश से और जम्मू-कश्मीर संविधान सभा की सहमति। जब इसके प्रावधानों को निरस्त किया गया तो उस वक्त जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू था और विधानसभा भंग थी। ऐसे में राज्यपाल की सलाह ही जम्मू-कश्मीर संविधान सभा की सलाह मानी जाती है। इसलिए, अनुच्छेद-370 और 35ए के प्रावधानों को निरस्त करने के लिए राष्ट्रपति का अध्यादेश ही काफी था। 

तो फिर आईओए यानी इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन क्या है?
आजादी के वक्त देश का विभाजन हुआ था। अंग्रेजी सरकार ने सभी रियासतों को हिंदुस्तान और पाकिस्तान में से एक चुनने का विकल्प दिया था। इसके लिए इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन (IOA- Instrument of Accession) नामक विलय पत्र बनाया गया था। इस पर रियासतों के प्रमुख राजा या नवाब को अपने नाम, पते, रियासत का नाम और हस्ताक्षर के साथ सील लगाकर उसे सौंपना था। 
 

Jammu and Kashmir :What is Article 370? abolition of Article 370? How is it different from Article-371?
संसद में अनुच्छेद-370 पर बोलते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह - फोटो : Twitter

क्या कश्मीर का विलय सशर्त था?
नहीं, भारत में कश्मीर का विलय सशर्त नहीं था। दरअसल, पाकिस्तान के कबायली हमले के बाद कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी और 26 अक्तूबर, 1947 को भारत में विलय को लेकर एक संधि-पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। यह संधि पत्र भी इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन कहलाता है। 27 अक्तूबर, 1947 को भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने इसे स्वीकार कर लिया। उस समय कश्मीर के भारत में विलय को लेकर न कोई शर्त थी और न ही विशेष दर्जे जैसी कोई मांग। इसमें पाकिस्तान द्वारा कब्जाया क्षेत्र (पीओके) भी शामिल था। 
 

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जम्मू कश्मीर के राजा हरि सिंह, प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और शेख अबदुल्ला - फोटो : Amar Ujala

तो फिर अनुच्छेद-35ए कहां से आया?
कश्मीर में अनुच्छेद-35ए भी भारत सरकार की ही देन था। यह अनुच्छेद-35ए जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को कुछ विशेष शक्तियां प्रदान करता था। कश्मीर के भारत में विलय के बाद शेख अब्दुला को वहां का अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया था। 1952 में अब्दुला और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बीच दिल्ली में एक समझौता हुआ था। इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने अनुच्छेद-370(1)(डी) के तहत 14 मई, 1954 को एक आदेश पारित कर अनुच्छेद-35ए को लागू किया था। अनुच्छेद-35ए के तहत जम्मू-कश्मीर के लोगों को भूमि, कारोबार और रोजगार संरक्षण के विशेषाधिकार भी दिए गए। इससे राज्य में देश के दूसरे राज्यों के लोगों के लिए संपत्ति, कारोबार और रोजगार के अधिकार खत्म हो गए। हालांकि, इसे संसदीय प्रणाली के तहत संविधान संशोधन कर लागू नहीं किया गया था, इसलिए इसकी संवैधानिकता विवादित रही।  

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