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कौन है लड़कों के स्कूल में पढ़ने वाली ये अकेली लड़की

Fri, 29 Jun 2018 10:40 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Fri, 29 Jun 2018 10:40 AM IST
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know about this girl study in Colonel Brown Cambridge School boarding school for boys
shekinah mukhiya

किसी भी स्कूल में या तो सिर्फ लड़के पढ़ते हैं या लड़कियां या तो दोनों साथ-साथ। लेकिन क्या ऐसे स्कूल के बारे में सुना है जहां 250 लड़कों के बीच में सिर्फ एक लड़की पढ़ती हो? देहरादून का कर्नल ब्राउन क्रेम्ब्रिज स्कूल ऐसा ही स्कूल है। और स्कूल में छठी क्लास में पढ़ने वाली शिकायना वो लड़की हैं। 12 साल की उम्र में शिकायना इस बात से बेहद खुश हैं। उनको इसमें कुछ भी नया नहीं लगता। बीबीसी से बातचीत में शिकायना ने कहा, 'थोड़ा अलग अनुभव जरूर है। पर लड़कियां सब कुछ कर सकती हैं तो फिर मैं ब्वॉयज स्कूल में क्यों नहीं पढ़ सकती।'

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shekinah mukhiya

कैसा था स्कूल का पहला दिन?
इस सवाल के जवाब में शिकायना ने बेहद मजेदार किस्सा सुनाया। 'जब मैं पहले दिन क्लास में जाकर बैठी, क्लास में घुसते ही टीचर ने अपने पुराने अंदाज में कहा - गुड मॉर्निंग ब्वॉयज। लेकिन जैसे ही उनकी नजर मुझ पर पड़ी, तुरंत उन्होंने खुद को सही किया और कहा - अब मुझे गुड मार्निंग स्टूडेंट्स बोलने की आदत डालनी पड़ेगी।' ये किस्सा सुनाते ही शिकायना जोर-जोर से हंसने लगीं। उसकी बिंदास हंसी इस बात का सबूत थी कि स्कूल में शिकायना को कोई दिक्कत नहीं है।

लेकिन 250 लड़कों के बीच अकेले पढ़ने का फैसला शिकायना ने अपनी मर्जी से नहीं लिया। इसके लिए कुछ तो हालात जिम्मेदार थे और कुछ उसकी किस्मत। शिकायना गाना बहुत अच्छा गाती हैं। टीवी पर कई शो में हिस्सा भी ले चुकी हैं। &TV पर आने वाले शो वॉयस ऑफ इंडिया में शिकायना ने पिछले सीजन में हिस्सा लिया था और वो फाइनल राउंड तक भी पहुंची थीं। इसके लिए सितंबर 2017 से फरवरी 2018 तक उसे अपने पुराने स्कूल से छुट्टी लेनी पडी थी।

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shekinah mukhiya

जब रिएलिटी शो के फाइनल में हिस्सा लेने के बाद शिकायना वापस लौटीं तो स्कूल ने उन्हें अगली क्लास में भेजने से मना कर दिया। इसके बाद शिकायना के पिता के पास बेटी को स्कूल से निकालने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं था। शिकायना के पिता देहरादून के कर्नल ब्राउंन केम्ब्रिज स्कूल में संगीत के टीचर हैं। उन्होंने शिकायना के लिए दो-तीन दूसरे स्कूलों में फॉर्म भरा, पर शिकायना को कहीं दाखिला नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने अपने ही स्कूल में शिकायना को दाखिला देने के लिए बात की। शिकायना के पिता विनोद मुखिया ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि ऐसा नहीं था कि स्कूल प्रशासन ने एक बार में ही उनकी बात मान ली।

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shekinah mukhiya

उनके मुताबिक, 'स्कूल ने शिकायना के बारे में अपना फैसला सुनाने में 15-20 दिन का वक्त लिया। केवल शिकायना का एडमिशन ही एकमात्र समस्या नहीं थी। स्कूल को इस एडमिशन से उठने वाले कई दूसरे सवालों पर भी विचार करना था।'

लेकिन वो दूसरी समस्याएं क्या थीं?
शिकायना के पिता विनोद बताते हैं, 'आखिर स्कूल में शिकायना की ड्रेस क्या होगी? टॉयलेट रूम कहां होगा? अगर दूसरे टीचर भी ऐसी ही मांग करना चाहेंगे तो क्या होगा - स्कूल प्रशासन को इन मसलों का हल ढूंढना था।' 20 दिन बाद स्कूल प्रशासन ने अपना फैसला विनोद को सुनाया जो शिकायना के पक्ष में था। शिकायना अपने पुराने स्कूल में ट्यूनिक पहनती थीं। लेकिन नए स्कूल में वो लड़कों जैसा ही यूनिफॉर्म पहन कर जा रही हैं। यूनीफॉर्म पर यूनिफॉर्म तय करने की प्रक्रिया भी कम मजेदार नहीं थी। स्कूल प्रशासन ने शिकायना के माता-पिता से ही पूछा कि शिकायना क्या पहन कर स्कूल आना पसंद करेगी। उसके लिए नए स्टाइल का कुर्ता डिजाइन करने पर भी बात चली। शिकायना से भी इस बारे में पूछा गया। फिर अंत में इस नतीजे पर पहुंचा गया कि लडके स्कूल में जो ड्रेस पहनकर आते हैं वही ड्रेस शिकायना भी पहनेगी।

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शिकायना को भी इस पर कोई आपत्ति नहीं थी। शिकायना के क्लास में 17 लड़के हैं और उनके बीच पैंट शर्ट और बेल्ट लगा कर वो भी उनमें से एक ही दिखती हैं। फर्क बस उनके लंबे बालों का है। क्या शिकायना के आने से उनके साथी लड़कों के जीवन में भी कुछ बदला है? इस सवाल को बीच में ही काटते हुए वो एक किस्सा सुनाने लगती हैं। 'अब क्लास में कोई लड़का शैतानी करता है तो उसके लिए हर टीचर लड़कों को यही कहती हैं - क्लास में एक लड़की है तुम कुछ तो शर्म करो।' इसलिए लड़कों को लगने लगा है कि मेरी वजह से उनको डांट ज्यादा पडती है।'

शिकायना के एडमिशन के बाद एक दूसरी समस्या गर्ल्स टॉयलेट की भी थी। लेकिन स्कूल प्रशासन ने नया बंदोबस्त करने के बजाए शिकायना को टीचर टॉयलेट इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी। पर एक स्कूल में केवल ड्रेस और टॉयलेट ही नहीं - बच्चों को कई और चीजों की भी जरूरत होती है। जैसे खेलने और दिल की बात करने के लिए साथी की। लड़कों और लड़कियों के लिए खेल भी अमूमन अलग होते हैं और दोस्त भी। साथ ही बात करने के विषय भी।

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