NEET Toppers Story 2026: नीट यूजी 2026 के परिणाम घोषित होने के बाद देशभर के टॉप रैंक हासिल करने वाले छात्रों की सफलता की कहानियां चर्चा में हैं। किसी ने रोज 16-17 घंटे पढ़ाई कर ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की, तो किसी ने सेल्फ स्टडी, अनुशासन और सीमित मोबाइल इस्तेमाल को अपनी सफलता का आधार बनाया। इन छात्रों ने कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों के बावजूद अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा। आइए जानते हैं NEET 2026 के कुछ टॉपर्स की तैयारी, उनकी रणनीति और सफलता के पीछे की प्रेरक कहानियों के बारे में।
NEET Toppers Story: जिद, जज्बा और सेल्फ स्टडी... किसी ने नहीं मानी हार, न छोड़ा लक्ष्य; ऐसे बने नीट के टॉपर्स
NEET UG 2026: नीट यूजी के नतीजों के साथ कई प्रेरक सफलता की कहानियां भी सामने आई हैं। किसी ने रोज 16-17 घंटे पढ़ाई कर AIR 1 हासिल की, तो किसी ने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर टॉप रैंक पाई। जानिए देश के टॉप रैंकर्स ने किस रणनीति और मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया।
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टॉपर्स आर्यन गुप्ता : दादी की याद ने दिया डॉक्टर बनने का लक्ष्य
पंजाब के आर्यन गुप्ता ने NEET-UG 2026 में 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त की है। आर्यन ने बताया कि इस सफलता के लिए उन्होंने रोजाना 16-17 घंटे पढ़ाई की और कड़ी मेहनत की। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं और रिजल्ट आने के बाद पूरा परिवार बेहद खुश है। आर्यन भविष्य में कैंसर विशेषज्ञ (ऑन्कोलॉजिस्ट) बनना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि जब वह तीसरी कक्षा में थे, तब उनकी दादी का कैंसर से निधन हो गया था। उसी समय उन्होंने कैंसर के मरीजों की मदद करने और इस क्षेत्र में डॉक्टर बनने का सपना देखा था।
उपलक्ष्य गोयल: पहले प्रयास में NEET पास करने का था लक्ष्य
NEET-UG 2026 में AIR 3 हासिल करने वाले उपलक्ष्य गोयल के पिता मुकेश गोयल ने कहा कि 11वीं कक्षा में उपलक्ष्य ने उनसे पूछा था कि उसे कौन सा करियर चुनना चाहिए। उन्होंने बेटे से कहा कि वह वही क्षेत्र चुने जिसमें उसकी रुचि हो। इसके बाद उपलक्ष्य ने डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय कर लिया और पूरी मेहनत के साथ तैयारी में जुट गया। उनके अनुसार, बेटे ने कभी किसी चीज की मांग नहीं की और न ही घूमने-फिरने की इच्छा जताई। उसका पूरा ध्यान सिर्फ NEET में सफल होने पर था। वह पहले ही प्रयास में परीक्षा पास करना चाहता था और इसके लिए एक साल का गैप भी नहीं लेना चाहता था। पुनर्परीक्षा के बाद उसने पहले से एक अंक अधिक हासिल किया, जिससे परिवार की खुशी और बढ़ गई।
उपलक्ष्य की मां अनुराधा गोयल ने कहा कि बेटे ने अपने इस सपने के लिए बहुत कुछ त्याग दिया। उन्होंने बताया कि उसकी पूरी जिंदगी और दिनचर्या इसी लक्ष्य के आसपास रही। वह लगातार अपने सपने को पूरा करने के लिए मेहनत करता रहा और आज उसकी मेहनत का नतीजा पूरे देश के सामने है।
आयुष भालोतिया: सेल्फ स्टडी और अनुशासन से हासिल की AIR 4
NEET UG 2026 में अखिल भारतीय रैंक (AIR) 4 हासिल करने वाले कोटा के आयुष भालोतिया ने 710 अंक प्राप्त किए। उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान वे रोजाना करीब पांच से सात घंटे सेल्फ स्टडी करते थे और इसके अलावा लगभग छह घंटे कोचिंग क्लास में बिताते थे। उनके अनुसार, नियमित पढ़ाई और समय का सही उपयोग उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह रहा।
मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर आयुष ने कहा कि वे रोजाना दो से चार घंटे फोन का उपयोग करते थे, लेकिन केवल पढ़ाई और दोस्तों से संपर्क के लिए। वे यूट्यूब पर शैक्षणिक वीडियो देखते थे और व्हाट्सएप व टेलीग्राम के जरिए पढ़ाई से जुड़े साथियों के संपर्क में रहते थे। उन्होंने बताया कि वे इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं करते थे, जिससे उनका पूरा ध्यान पढ़ाई पर बना रहा।
700 से 705 तक का सफर, री-नीट ने दिलाई AIR 16
री-नीट 2026 में अखिल भारतीय रैंक (AIR) 16 हासिल करने वाले कार्तिक चौधरी ने बताया कि यह परीक्षा उनके लिए पहले प्रयास की तुलना में अधिक अनुकूल रही। उन्होंने कहा कि पहले NEET में उनके 700 अंक आए थे, जबकि री-नीट में उन्होंने 705 अंक हासिल किए। कार्तिक के अनुसार, 705 अंकों के साथ AIR 16 मिलना उनके लिए बहुत अच्छी उपलब्धि है। उन्होंने यह भी कहा कि पहला प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत आसान था।