सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त

किसी ने नहीं दी थी नौकरी, खोल दी खुद की 20 कंपनियां

टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 23 Aug 2016 10:24 AM IST
विज्ञापन
success story of mannam madhusudan rao

बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए मधुसूदन राव के माता-पिता 18 घंटे मजदूरी करते थे। इसके बाद भी वो परिवार को भरपेट खाना नहीं खिला पाते थे। आज मधुसूदन राव 20 कंपनियां चला रहे हैं। वो MMR ग्रुप के फाउंडर हैं। मधुसूदन का जन्म आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था। 

Trending Videos

बंधुआ मजदूर के बेटे को किसी ने नहीं दी थी नौकरी, खोल दी खुद की 20 कंपनियां

success story of mannam madhusudan rao

उनका पूरा नाम मन्नम मधूसूदन राव है। वे पिछड़ी जाति के हैं। जब वे थोड़े बड़े हुए तो उन्हें घर की हालत देखकर रोना आता था। उनके माता-पिता को काम न मिलने और गरीबी का एक कारण उनका पिछड़ी जाति का होना भी था। उनकी पिता एक जमींदार के पास बंधुआ मजदूरी करते थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

बंधुआ मजदूर के बेटे को किसी ने नहीं दी थी नौकरी, खोल दी खुद की 20 कंपनियां

success story of mannam madhusudan rao

मधुसूदन की मां एक तंबाकू फैक्ट्री में काम करती थीं। घर चलाने के लिए बड़ी बहन भी मां के साथ काम करने जाती थीं। गांव में नियम था कि पिछड़ी जाति के लोग घुटनों से नीचे तक धोती नहीं पहनेंगे। इसी से उनकी पहचान होती थी। ऐसे माहौल में माता-पिता के लिए बच्चों को पढ़ाना बहुत मुश्किल था।

बंधुआ मजदूर के बेटे को किसी ने नहीं दी थी नौकरी, खोल दी खुद की 20 कंपनियां

success story of mannam madhusudan rao

परिवार की हालत सुधारने के लिए मधुसूदन ने पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया। मधु पढ़ाई में काफी होशियार थे। इसलिए टीचर्स उन पर खास ध्यान देते थे।  वे हमेशा एग्जाम में अच्छे नंबर लाते। उन्होंने 10वीं और12वीं की परीक्षा पास की। 12वीं के बाद एंट्रेंस एग्जाम पास कर पॉलिटेक्निक कॉलेज में दाखिला लिया। उनके पॉलिटेक्निक डिप्लोमा करने के पीछे मंशा थी कि उन्हें जल्द से जल्द सरकारी नौकरी मिल जाए। लेकिन अफसोस उनकी नौकरी नहीं लगी। 

विज्ञापन

बंधुआ मजदूर के बेटे को किसी ने नहीं दी थी नौकरी, खोल दी खुद की 20 कंपनियां

success story of mannam madhusudan rao

उन्हें पिछड़ी जाति और घर की हालत का हवाला देकर कोई नौकरी नहीं देता था। काफी समय तक नौकरी नहीं मिली तो वे बहुत निराश हो गए। आखिर में वे भी भाई के साथ मजदूरी करने लगे। इसके साथ ही वे चौकीदारी का भी काम किया करते थे। ओवरटाइम करके वे घर वालों का खर्चा उठाते

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Education News in Hindi related to careers and job vacancy news, exam results, exams notifications in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Education and more Hindi News.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed