आज ही के दिन सन 1973 में दुनिया छोड़ गए मशहूर अभिनेता बलराज साहनी ने निधन से बस एक दिन पहले अपनी आखिरी फिल्म गरम हवा की डबिंग पूरी की। उनकी आखिरी रिकॉर्डेड लाइन रही, “इंसान कब तक अकेला जी सकता है?” महात्मा गांधी के आशीर्वाद से बीबीसी रेडियो में नौकरी पाने वाले बलराज साहनी ने रबींद्र नाथ टैगोर के शांति निकेतन में अपनी पत्नी दमयंती के साथ अध्यापन भी किया और बाद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की युवा इकाई के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने। उनके तमाम किरदारों में सर्वहारा के संकट के सिनेमाई प्रतिबिंब खूब दिखाई देते हैं। कम लोग ही जानते होंगे कि गुरुदत्त निर्देशित देव आनंद की मशहूर फिल्म बाजी बलराज साहनी ने ही लिखी थी। आइए आज आपको बताते हैं उनके 10 कालजयी किरदारों के बारे में।
बलराज साहनी की इस फिल्म ने जीता था फिल्मफेयर का पहला बेस्ट फिल्म अवॉर्ड, ये हैं 10 यादगार फिल्में
किरदार: निरंजन
फिल्म: धरती के लाल (1946)
ख्वाजा अहमद अब्बास के निर्माण और निर्देशन में बनी यह फिल्म उस समय की दुनिया में सबसे ज्यादा सराही गई फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में बलराज साहनी ने गरीब किसान के एक बेटे का किरदार निभाया है। वह उसूलों का इतना पक्का होता है कि वह भूखे मरने और भीख मांगने के लिए तैयार है, लेकिन अपनी जमीन को बेचने के लिए तैयार नहीं है। वह धरती को अपनी इज्जत समझता है। पूरे सोवियत संघ में देखी जाने वाली यह पहली भारतीय फिल्म है। इस फिल्म को 1943 में बंगाल में पड़े अकाल को केंद्र में रखकर बनाया गया है, जिसमें लगभग 15 लाख लोगों की जान गई थी।
किरदार: शम्बू महतो
फिल्म: दो बीघा जमीन (1953)
महान फिल्म निर्माता और निर्देशक बिमल रॉय की बनाई इस फिल्म में भी बलराज साहनी एक गरीब किसान शम्भू महतो के रूप में नजर आए। शम्भू अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए खेती-बाड़ी करता है और साथ ही रिक्शा भी खींचता है। गरीब इंसान की वैसे ही बहुत परेशानियां होती हैं। शम्भू की परेशानी और बढ़ जाती हैं, जब उसके यहां सूखा पड़ जाता है। सूखे से तो उबरने के बाद उसके सामने एक नई परेशानी आती है जब, उसके गांव का जमीदार उसकी दो बीघा जमीन को भी हथियाने के लिए जुट जाता है। बलराज साहनी के साथ इस फिल्म में निरूपा रॉय और रतन कुमार मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म ने कान फिल्मफेस्टिवल में धूम मचा दी। इस फिल्म ने फिल्फेयर का पहला बेस्ट फिल्म और बेस्ट डायरेक्टर अवार्ड भी जीता।
किरदार: रतन लाल
फिल्म: भाभी (1957)
कृष्णन पंजू के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक पारिवारिक ड्रामा फिल्म है। इसमें बलराज साहनी एक परिवार के मुखिया रतन लाल के रूप में नजर आए। रतन लाल अपने बच्चों के अमानवीय बर्ताव से परेशान हो जाता है, जिसके बाद घर का बड़ा होने की वजह से उसे कुछ ऐसे बलिदान देने पड़ते हैं, जो उसके लिए बिल्कुल आसान नहीं थे। वह अपनी पत्नी के मर जाने के बाद भी अपने घर को बहुत अच्छे से संभालने की कोशिश करता है। इस फिल्म में बलराज साहनी के साथ नंदा, डेजी ईरानी आदि ने मुख्य भूमिका निभाई है।
किरदार: राजेंद्र
फिल्म: छोटी बहन (1959)
जैसा कि फिल्म के शीर्षक से पता चल रहा है कि यह फिल्म एक छोटी बहन पर ही आधारित है। इसके बड़े भाई का किरदार बलराज साहनी ने राजेंद्र के रूप में निभाया है। राजेंद्र अपनी स्कूल की अध्यापिका से प्यार करता है लेकिन वह प्रण लेता है, कि जब तक उसकी छोटी बहन की शादी नहीं हो जाती तब तक वह शादी नहीं करेगा। छोटी बहन का जीवन संवारते संवारते वह अंत तक अपनी खुशी इकट्ठा नहीं कर पाता। मशहूर निर्देशक एल वी प्रसाद के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बलराज साहनी के साथ नंदा, धूमल, महमूद, रहमान आदि ने मुख्य भूमिका निभाई है।
