हिंदी फिल्मों के पोस्टर पर अगर आप नजर डालें तो गिनती के होंगे ऐसे जिनमें हीरो हीरोइन के अलावा किसी दूसरे किरदार का चेहरा नजर आता हो। लेकिन, एक वक्त ऐसा भी रहा जब लोग हिंदी सिनेमा में अपनी दमदार भूमिकाओं के लिए मशहूर ओम प्रकाश का चेहरा पोस्टर पर देख फिल्म देखने चले जाते थे। पांच दशक तक पर्दे पर अपनी कलाकारी दिखाने वाले ओम प्रकाश ने अपनी कॉमिक टाइमिंग से अच्छे अच्छे कॉमेडियनों को भी पीछे छोड़ दिया था। ओम प्रकाश को फिल्मफेयर पुरस्कारों में लगातार अनदेखा किया गया, लेकिन वह जिद के पक्के थे और अपनी अदाकारी को फिल्म दर फिल्म बेहतर करते हुए ये पुरस्कार लेकर ही माने। उनकी पुण्यतिथि पर हम आपको आज उनके कुछ बेहतरीन किरदारों से अवगत कराते हैं।
दिलीप कुमार का बड़ा भाई बनकर रुलाया इस अभिनेता ने, फिल्मफेयर को कर दिया पुरस्कार देने पर मजबूर
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किरदार : मोतीलाल
फिल्म : आजाद (1955)
अपने समय सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक 'आजाद' में ओम प्रकाश का रूप एक हवलदार के रूप में नजर आया। शोभा (मीना कुमारी) के गुम हो जाने के बाद पुलिस शोभा की गुमशुदगी की जांच करती है, जिसमें हवलदार मोतीलाल भी संलिप्त रहता है। अपनी बुद्धिमत्ता हर सूझ बूझ से मोतीलाल शोभा का पूरी ईमानदारी से पता लगाता है, और पुलिस का नाम ऊंचा करता है। इस फिल्म ओम प्रकाश ने दिलीप कुमार के साथ काम किया, जो उनकी अभिनय कला से बहुत प्रभावित हुए।
किरदार : नकड़ौ
फिल्म : मिस मैरी (1957)
फिल्म में नकड़ौ के रूप में ओम प्रकाश एक धोखेबाज इंसान है, जो लोगों से छोटी मोटी ठगी करता है। कहानी में एक परेशान लड़की मैरी (मीना कुमारी) है, जो अपने पिता के कर्जे चुकाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार है। अरुण (जैमिनी गणेशन) और मैरी मिलकर नकड़ौ को अपने नौकर के रूप में दिखावे के लिए नौकरी देते हैं, और नकड़ौ अपने काम को बखूबी अंजाम देता है। मुख्य भूमिका न होने पर ओम प्रकाश की इस फिल्म में खूब तारीफें हुईं।
किरदार : श्यामू तांगेवाला
फिल्म : हावड़ा ब्रिज (1958)
यह फिल्म अपने संगीत के लिए बहुत याद की जाती है, जिसमें मधुबाला ने 'आइए मेहरबान' जैसे प्रतिष्ठित गाने पर प्रस्तुति दी है। ओम प्रकाश का किरदार इस फिल्म में एक भरोसेमंद तांगेवाला श्यामू का है जो प्रेम (अशोक कुमार) को उसके लिए नए शहर कोलकाता में रास्ता दिखाने का काम करता है। शक्ति सामंता के निर्देशन में बनी इस थ्रिलर ड्रामा फिल्म में ओम प्रकाश ने दर्शकों का पर्दे पर खूब मनोरंजन किया।
किरदार : गोकुलचंद
फिल्म : दस लाख (1966)
ओम प्रकाश ने इस फिल्म से ऊंचाइयां पाना शुरू कीं। जब इंसान को अपने बाप दादा की संपत्ति मिलती है, तो उसकी जिंदगी में कितने बदलाव आ जाते हैं, यही इस फिल्म का सार है। गोकुलचंद को पैतृक संपत्ति मिलती है, जिससे वह अपना कश्मीर घूमने जाने का सपना पूरा करने जाता है। फिर उसे दो विदेशियों ने अपने चंगुल में फंसा लिया और उसकी पूरी संपत्ति हड़पने की कोशिश करते हैं। इस फिल्म में ओम प्रकाश ने बेहतरीन अभिनय किया जिसके लिए उन्हें अपनी जिंदगी का एकमात्र फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।