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आख़िर रजनीकांत का 'इश्क' लोगों के सिर चढ़कर क्यों बोलता है, 2.0 की बंपर कमाई है सबूत
बीबीसी हिंदी
Updated Sun, 09 Dec 2018 08:01 PM IST
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रजनीकांत और अक्षय कुमार जैसे अभिनेताओं से सजी फिल्म 2.0 को दुनियाभर में रिलीज हुए 10 दिन हो चुके है। यह फ़िल्म तमिल, तेलुगू, हिंदी समेत कई भाषाओं में रिलीज़ हुई है। दुनिया भर के 10 हज़ार स्क्रीन्स पर यह फ़िल्म रिलीज़ हुई। बंपर शुरुआत के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि यह भारत की सबसे बड़ी हिट फ़िल्म साबित हो सकती है।
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यहां तक की भाषा की सीमाओं को तोड़ते हुए देश के कई हिस्सों में इससे उनके प्रशंसक बने।"कई फ़िल्मों में उनके द्वारा किए गए स्टंट पर विश्वास नहीं किया जा सकता था लेकिन लोगों ने इसका आनंद लिया क्योंकि ये रजनीकांत ने किए थे। सारा कहती हैं कि रजनीकांत इस बात का भी लुत्फ़ लेते हैं कि उन्हें 'हीरो का भी हीरो' कहा जाता है। कई बॉलीवुड और टॉलीवुड के स्टार हीरो कह चुके हैं कि रजनीकांत उनके पसंदीदा हीरो हैं।
शाहरुख़ ख़ान ने लुंगी डांस गाने को रजनीकांत को समर्पित किया था और इसको व्यापारिक नज़रिए से लिया गया फ़ैसला नहीं कहा जा सकता है। सारा सुब्रमण्यम मानती हैं कि लोगों के बीच उनकी प्रसिद्धी के कारण ऐसा हुआ। सारा का मानना है, "हालांकि, भारत के दूसरे हिस्सों में भी रजनीकांत के प्रशंसक हैं लेकिन इसको लेकर शंका है कि राजनीति में उनकी एंट्री और उनके बयानों के बाद क्या उनकी फ़ैन फॉलोइंग वैसी ही रहेगी जैसे पहले थी।
यह अभी तक साफ़ नहीं है कि उनके बड़े प्रशंसकों ने उनके बयानों को कैसे लिया है।" सारा को लगता है कि देश और दुनिया भर में उनकी फ़िल्म को लेकर उम्मीदें हैं लेकिन तमिलनाडु में 2।0 की रिलीज़ से पहले हुई टिकटों की बुकिंग उम्मीदों के अनुरूप नहीं है जैसा कि रजनीकांत की फ़िल्मों को लेकर पहले देखा जाता रहा है। साथ ही सोशल मीडिया में भी फ़िल्म को लेकर बहुत चर्चाएं नहीं हैं।
शाहरुख़ ख़ान ने लुंगी डांस गाने को रजनीकांत को समर्पित किया था और इसको व्यापारिक नज़रिए से लिया गया फ़ैसला नहीं कहा जा सकता है। सारा सुब्रमण्यम मानती हैं कि लोगों के बीच उनकी प्रसिद्धी के कारण ऐसा हुआ। सारा का मानना है, "हालांकि, भारत के दूसरे हिस्सों में भी रजनीकांत के प्रशंसक हैं लेकिन इसको लेकर शंका है कि राजनीति में उनकी एंट्री और उनके बयानों के बाद क्या उनकी फ़ैन फॉलोइंग वैसी ही रहेगी जैसे पहले थी।
यह अभी तक साफ़ नहीं है कि उनके बड़े प्रशंसकों ने उनके बयानों को कैसे लिया है।" सारा को लगता है कि देश और दुनिया भर में उनकी फ़िल्म को लेकर उम्मीदें हैं लेकिन तमिलनाडु में 2।0 की रिलीज़ से पहले हुई टिकटों की बुकिंग उम्मीदों के अनुरूप नहीं है जैसा कि रजनीकांत की फ़िल्मों को लेकर पहले देखा जाता रहा है। साथ ही सोशल मीडिया में भी फ़िल्म को लेकर बहुत चर्चाएं नहीं हैं।
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रजनीकांत की अगली फ़िल्म पेट्टा का निर्देशन करने वाले युवा निर्देशक कार्तिक सुब्बुराज कहते हैं, "रजनीकांत के साथ फ़िल्म बनाना मेरा सपना था। देश में कई और लोगों की तरह मैं भी रजनीकांत की फ़िल्म देखते हुए बड़ा हुआ हूं।" "वह निश्चित रूप से देश के बड़े स्टारों में से एक हैं और कई सालों से दर्शकों में उनका जादू बरकरार है।
उनकी अद्भुत स्टाइल, डायलॉग डिलीवरी समेत काफ़ी कुछ चीज़ों ने प्रशंसकों को बांधे रखा है।" कार्तिक सुब्बुराज कहते हैं, "उनका तेज़ एक्शन और डायलॉग डिलीवरी किसी से नहीं मिलती है। ऐसा अभिनेता ढूंढना मुश्किल है जो कई सालों से प्रसिद्ध हो। उनकी लोकप्रियता और करिश्मे के बावजूद वो बेहद साधारण और ज़मीन से जुड़े हुए हैं। यह रजनीकांत का एक दूसरा आश्चर्यजनक पहलू है।"
उनकी अद्भुत स्टाइल, डायलॉग डिलीवरी समेत काफ़ी कुछ चीज़ों ने प्रशंसकों को बांधे रखा है।" कार्तिक सुब्बुराज कहते हैं, "उनका तेज़ एक्शन और डायलॉग डिलीवरी किसी से नहीं मिलती है। ऐसा अभिनेता ढूंढना मुश्किल है जो कई सालों से प्रसिद्ध हो। उनकी लोकप्रियता और करिश्मे के बावजूद वो बेहद साधारण और ज़मीन से जुड़े हुए हैं। यह रजनीकांत का एक दूसरा आश्चर्यजनक पहलू है।"
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रजनीकांत के आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी काफ़ी प्रशंसक हैं। तेलुगू में डब हुई उनकी तमिल फ़िल्मों को तेलुगू प्रशंसकों के बीच काफ़ी सराहा जाता रहा है। हालांकि, यह सवाल भी उठता है कि आंध्र प्रदेश में काफ़ी चर्चित स्टार होते हुए भी वह एक ख़ास हीरो क्यों हैं? रजनीकांत की कथनयग और कुसेलन जैसी फ़िल्मों के निर्माता अश्विनी दत्त कहते हैं, "रजनीकांत एक बहुमुखी अभिनेता हैं। उनकी अभिनय योग्यता और बॉडी लैंग्वेज अनोखी है।
यही चीज़ उन्हें आम दर्शकों से जोड़ती है। वह इकलौते अभिनेता हैं जिससे सभी उम्र के लोग जुड़ाव महसूस करते हैं।" वो कहते हैं कि उनका स्टाइल चाहे स्क्रीन पर हो या शूटिंग करने की जगह पर हमेशा लुभाता है। अश्विनी का कहना है, "अच्छी अभिनय शैली के अलावा रजनीकांत की ख़ासियत उनका साधारण होना है। इन ख़ासियतों ने उन्हें भारत के अलग-अलग हिस्सों में लोगों के बीच लोकप्रियता दिलाई।
इसने उनके प्रशंसक तैयार किए और आंध्र में भी उनके बहुत प्रशंसक हैं।" तमिलनाडु से इतर क्या रजनीकांत की जनता पर पकड़ है? इस सवाल पर फ़िल्म समीक्षक प्रोफ़ेसर रामासामी कहते हैं, "रजनीकांत की भारत और तमिलनाडु की जनता पर पकड़ मानी जा सकती है। लेकिन दूसरे देशों में उनकी लोकप्रियता की बात है तो वह उन देशों में रह रहे तमिलों के कारण है।"
यही चीज़ उन्हें आम दर्शकों से जोड़ती है। वह इकलौते अभिनेता हैं जिससे सभी उम्र के लोग जुड़ाव महसूस करते हैं।" वो कहते हैं कि उनका स्टाइल चाहे स्क्रीन पर हो या शूटिंग करने की जगह पर हमेशा लुभाता है। अश्विनी का कहना है, "अच्छी अभिनय शैली के अलावा रजनीकांत की ख़ासियत उनका साधारण होना है। इन ख़ासियतों ने उन्हें भारत के अलग-अलग हिस्सों में लोगों के बीच लोकप्रियता दिलाई।
इसने उनके प्रशंसक तैयार किए और आंध्र में भी उनके बहुत प्रशंसक हैं।" तमिलनाडु से इतर क्या रजनीकांत की जनता पर पकड़ है? इस सवाल पर फ़िल्म समीक्षक प्रोफ़ेसर रामासामी कहते हैं, "रजनीकांत की भारत और तमिलनाडु की जनता पर पकड़ मानी जा सकती है। लेकिन दूसरे देशों में उनकी लोकप्रियता की बात है तो वह उन देशों में रह रहे तमिलों के कारण है।"
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2.0 first song Tu Hi Re
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फ़िल्म 'मुत्थू' के कारण रजनीकांत के जापान में प्रसिद्ध होने के सवाल पर वह कहते हैं, "यह इस कारण हो सका क्योंकि मुत्थू फ़िल्म का किरदार दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में रहे राजा के जैसा था। रिपोर्ट थीं कि इसी वजह से फ़िल्म के रिलीज़ होने से पहले इसने दर्शकों को अपनी ओर खींचा। सांस्कृतिक समानता और किरदार के कारण फ़िल्म ने जापानी दर्शकों का ध्यान खींचा था।" रामासामी कहते हैं,
"रजनीकांत की बॉडी लैंग्वेज और स्टाइल फ़िल्मों में पूर्व नियोजित होता है। वह ऐसी एक्टिंग अपनाते हैं जिसमें बॉडी लैंग्वेज सबसे अधिक शामिल रहती है और वह फिर उसके अनुसार ख़ुद को मोड़ते हैं। वह साधारण बॉडी एक्शन को भी काफ़ी तोड़ते-मरोड़ते हैं और उसको ख़ुद के हिसाब से करते हैं।" "रजनीकांत की शैली ही सबसे पहले उनके प्रशंसकों को अपनी ओर खींचता है। उनकी शैली और बॉडी लैंग्वेज को फ़िल्मों में बेहद सतर्कता से किया जाता है।"
वो कहते हैं, "इस ख़ासियत के कारण बच्चे तक उनकी शैली और बॉडी लैंग्वेज की नक़ल करते हैं। इसी कारण रजनीकांत अपनी स्टाइल को पहले बनाते हैं। यह रजनीकांत की सबसे बड़ी और सकारात्मक छवि है।" "साथ ही राजनीतिक घोषणा और दूसरे भाषणों को लेकर उनकी एक ख़ास बॉडी लैंग्वेज होती है। अब यह उनका हिस्सा बन चुके हैं। बॉडी लैंग्वेज और स्टाइल को ध्यान में रखकर ही उनकी फ़िल्मों के डायलॉग लिखे जाते हैं।"
"रजनीकांत की बॉडी लैंग्वेज और स्टाइल फ़िल्मों में पूर्व नियोजित होता है। वह ऐसी एक्टिंग अपनाते हैं जिसमें बॉडी लैंग्वेज सबसे अधिक शामिल रहती है और वह फिर उसके अनुसार ख़ुद को मोड़ते हैं। वह साधारण बॉडी एक्शन को भी काफ़ी तोड़ते-मरोड़ते हैं और उसको ख़ुद के हिसाब से करते हैं।" "रजनीकांत की शैली ही सबसे पहले उनके प्रशंसकों को अपनी ओर खींचता है। उनकी शैली और बॉडी लैंग्वेज को फ़िल्मों में बेहद सतर्कता से किया जाता है।"
वो कहते हैं, "इस ख़ासियत के कारण बच्चे तक उनकी शैली और बॉडी लैंग्वेज की नक़ल करते हैं। इसी कारण रजनीकांत अपनी स्टाइल को पहले बनाते हैं। यह रजनीकांत की सबसे बड़ी और सकारात्मक छवि है।" "साथ ही राजनीतिक घोषणा और दूसरे भाषणों को लेकर उनकी एक ख़ास बॉडी लैंग्वेज होती है। अब यह उनका हिस्सा बन चुके हैं। बॉडी लैंग्वेज और स्टाइल को ध्यान में रखकर ही उनकी फ़िल्मों के डायलॉग लिखे जाते हैं।"