अमिताभ बच्चन और रेखा की जोड़ी कम समय ही परदे पर दिखाई दी लेकिन जब-जब दिखी फैंस ने जमकर सराहा। दोनों की जोड़ी एक समय में सुपरहिट मानी जाती थी। अगर अमिताभ और रेखा की बात करें तो दोनों की जिंदगी में नजदीकियों का सिलसिला दरअसल दूरियों से शुरू होता है। रेखा और अमिताभ की कई फिल्में ऐसी हैं जो लोगों की यादों में अभी भी ताजा हैं और कहीं न कहीं ये फिल्में दोनों के अधूरे रिश्ते को भी बयां करती हैं। 1981 में आई फिल्म सिलसिला भी कुछ ऐसी ही थी। आज इस फिल्म को रिलीज हुए 38 साल हो गए हैं।
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Amitabh Bachchan and Rekha
साल 1981 में रिलीज हुई अमिताभ बच्चन की 55वीं फिल्म थी। दर्शकों को आकर्षित करने के लिए फिल्म में जो चीजें जरूरी होती हैं सिलसिला में वे कुछ ज्यादा ही थी। सौम्य बंदोपाध्याय ने अपनी किताब 'अमिताभ बच्चन' में सिलसिला की कास्टिंग और फिल्म से जुड़ी कई बातें बताई हैं। कहते हैं ये अमिताभ के बारे में बताती एकमात्र ऑथेंटिक बायोग्राफी है।
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फिल्म में अमिताभ बच्चन, रेखा और जया बच्चन की तिकड़ी काम कर रही थी। साथ में शशि कपूर और संजीव कुमार भी थे। अमिताभ जया से शादी कर चुके थे लेकिन उनकी और रेखा की नजदीकियों की खबरें हर दिन छपती थी। ऐसी कोई पत्रिका नहीं थी जिसमें दोनों के अफेयर की खबरें न छपी हों। यह अफवाह भी फैली थी कि रेखा के कारण बच्चन परिवार में बेहद अशांति फैली है। शादीशुदा आदमी से प्यार करने के अपराध के कारण रेखा उस वक्त विलेन बनी हुई थीं।
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यश चोपड़ा की फिल्म 'सिलसिला' के लिए जावेद अख्तर ने पहली बार कोई फिल्मी गाना लिखा था। उस समय जावेद अख्तर केवल कविता लिखने के लिए ही फेमस थे। ये गाना था 'देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए...' ये गाना बहुत पसंद किया गया, जिसके बाद से जावेद अख्तर ने लिरिक्स भी लिखने शुरू कर दिए। 'सिलसिला' फिल्म महंगी थी साथ ही इसके स्टार कास्ट ने इस फिल्म को और महंगा बना दिया था। मेकर्स को उम्मीद थी कि सिनेमाघरों में ये अच्छा परफॉर्म करेगी लेकिन फिल्म नहीं चली।
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यश चोपड़ा ने फिल्म को हिट कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मगर सबको चौंकाते हुए सिलसिला बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर पड़ी। ऐसा क्यों हुआ ये आज तक नहीं पता। अमिताभ बच्चन इस फिल्म की फ्लॉप की वजह इसकी कहानी को मानते हैं जिसमें उनकी प्रेमिका (रेखा) वापस अपने पति का पास चली जाती है। अगर वह अपने प्रेमी (अमिताभ) के पास वापस आती तो शायद ये फिल्म चल सकती थी। सिलसिला में खर्च किए गए पैसे वसूल हुए या नहीं ये बड़ी बात नहीं। यश चोपड़ा के लिए हताशा ही सबसे बड़ी बात थी। ऐसी हताशा उन्हें किसी और फिल्म से नहीं मिली थी।