फिल्म इंडस्ट्री पर बीते 52 सालों से राज करने वाले बॉलीवुड के 'शहंशाह' अमिताभ बच्चन सोमवार को 79 साल के हो गये हैं। इंडस्ट्री के तमाम दिग्गज अभिनेता और अभिनेत्रियां अमिताभ बच्चन को उनके जन्मदिन पर ढेरों बधाई दे रही हैं। फिल्म, उद्योग और राजनीति जगत के दिग्गज अमिताभ को बर्थडे विश कर रहे हैं। अमिताभ के फैंस भी उनके जन्मदिन पर खूब प्यार बरसा रहे हैं। 11 अक्तूबर 1942 में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (प्रयागराज) में पैदा हुए अमिताभ ने फिल्म इंडस्ट्री में एक लंबी जर्नी तय की है। उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दी, तो लगातार फ्लॉप फिल्मों का दबाव भी झेला। फिल्म से लेकर राजनीतिक तक का सफर तय किया। विवादों में भी रहे, लेकिन कभी अपनी प्रतिष्ठा पर कोई आंच नहीं आने दी।
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मजबूत बनना और लक्ष्य पर डटे रहना
अमिताभ ने अपने जीवन में कड़ी मेहनत की है। युवा पीढ़ी उनसे मजबूत रहना सीख सकती है। अमिताभ से सीखा जा सकता है कि किस तरह से विपरित परिस्थितियों का भी मजबूती से सामना करना चाहिए और अपने लक्ष्य पर अडिग रहना चाहिए। सभी जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले अमिताभ बच्चन को ऑल इंडिया रेडियो ने उनकी आवाज के लिए रिजेक्ट कर दिया था। लेकिन बाद में ये ही आवाज अमिताभ बच्चन की पहचान बनी और भारी-भरकम आवाज में बोले गये उनके संवाद फिल्म प्रेमियों की जुबान पर चढ़ गये। अमिताभ संघर्ष करते रहे और पीछे नहीं हटे, तभी इंडस्ट्री के शहंशाह, बिग बी और महानायक जैसे खिताब उन्हें मिल पाये हैं।
ऐसा नहीं है कि फिल्मों में डेब्यू के बाद अमिताभ का संघर्ष कम हुआ, उल्टा उन्हें कई फ्लॉप फिल्मों का दबाव झेलना पड़ा। लेकिन वह हमेशा मजबूत और दृढ़ रहे।
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उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना
अमिताभ से सीखा जा सकता है कि हर परिस्थितियों में उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। अमिताभ ने 80 के दशक में अपार सफलता हासिल की और एक ऐसा दौर भी आया कि वह तमाम तरह की उलझनों में उलझ गये। कानूनी लड़ाई से लेकर बोफोर्स घोटाले तक, अमिताभ की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही थी। लेकिन उन्होंने उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ा। 1987 में जब बहुचर्चित बोफोर्स घोटाले को लेकर देशभर में हड़कंप मचा हुआ था, उस वक्त अमिताभ इलाहाबाद से सांसद थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर साल 1984 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी और हेमवती नंदन बहुगुणा को हराया था।
बोफोर्स घोटाला जब सुर्खियों में आया अमिताभ का भी नाम उछला। उन्हें ‘बोफोर्स दलाल’ तक कहा गया। इससे दुखी होकर उन्होंने राजनीति से इस्तीफा दे दिया और बाद में उन्होंने राजनीति में उतरना अपनी भूल बताया और फिर फिल्मों की तरफ सक्रिय हुए, उम्मीद नहीं हारी और कई सुपरहिट फिल्में दीं।
अनुशासन
अमिताभ बच्चन के बारे में कहा जाता है कि वह बेहद अनुशासित हैं। सूट के वक्त सेट पर हमेशा ही वक्त पर पहुंचते हैं। अनुशासन को ही सफलता की कुंजी बताया गया है। ऐसे में युवा पीढ़ी अमिताभ बच्चन से अनुशासन सीख सकती है। अनुशासन में ही रहकर अमिताभ बच्चन ने यह मुकाम हासिल किया है।
हार्ड वर्क
अमिताभ बच्चन को फिल्म इंडस्ट्री में कड़ी मेहनत के लिए जाना जाता है। वह अपने किरदार पर फोकस करने के लिए बेहद मेहनत करते हैं। एक वक्त ऐसा भी था कि उनकी 12 फिल्में फ्लॉप हो गईं थी लेकिन अमिताभ पीछे नहीं हटे और कड़ी मेहनत कर सफलता हासिल की।अमिताभ खुद कहते हैं कि बिना परिश्रम के सांस नहीं ली जा सकती। वह अपने किरदार को बड़ी लगन के साथ काम करते हैं। युवा पीढ़ी उनसे हार्ड वर्क करना सीख सकती है।
