67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में मनोज बाजपेयी को भोंसले के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवॉर्ड मिला है। देवाशीष मखीजा द्वारा लिखित और निर्देशित ड्रामा फिल्म भोसले में मनोज बाजपेयी की भूमिका को लेकर उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया गया है। मनोज बाजपेयी ने तीसरी बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता है। इससे पहले उन्हें साल 2000 में रिलीज फिल्म सत्या में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का और पिंजर के लिए स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड के सम्मान से नवाजा जा चुका है।
मनोज बाजपेयी को मिला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
मनोज बाजपेयी ने अपने काम से हमेशा साबित किया है कि जब दर्शक कला की कद्र करते हैं तो फिर सफलता पीछे नहीं रहती है। बॉलीवुड में फैले नेपोटिजम के बीच मनोज ने अपनी अदायगी का जादू चलाया है। वह समझते है कि लोगों के प्यार और सरकार से मिला ये सम्मान कितना ज्यादा महत्व रखता है तभी वह स्टेज को चुमते हुए अवॉर्ड लेने गए।
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मनोज बाजपेयी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मनोज बाजपेयी ने पिछले पांच साल में हिंदी सिनेमा में काफी संघर्ष किया है। साल 2016 में उनकी ‘अलीगढ़’ और ‘बुधिया सिंह- बॉर्न टू रन’ जैसी काबिले तारीफ फिल्में रिलीज हुईं लेकिन ‘ट्रैफिक’ और ‘सात उचक्के’ की तरह इन्हें भी बॉक्स ऑफिस सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद ‘नाम शबाना’, ‘सरकार 3’ और ‘रुख’ का भी यही हश्र हुआ।
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मनोज बाजपेयी
- फोटो : Instagram
साल 2018 मनोज बाजपेयी के लिए मिला जुला रहा। जहां निर्देशक नीरज पांडे की चर्चित फिल्म ‘अय्यारी’ के फ्लॉप हो जाने से उनकी ब्रांडिग को काफी नुकसान हुआ वहीं, ‘बागी 2’ और ‘सत्यमेव जयते’ में उन्हें लोगों ने काफी पसंद किया। इसी साल बनी फिल्म ‘भोसले’ ने उन्हें तीसरा नेशनल फिल्म अवार्ड दिलाया। मनोज बाजपेयी मानते भी हैं कि उनकी यात्रा फूलों की सेज कभी नहीं रही। लोग उनके बारे में सिर्फ उतना जान पाते हैं जितना वह एक छोटे से इंटरव्यू में बता पाते हैं। मनोज कहते हैं, “किसी दिन मैं अपनी आत्मकथा लिखूंगा तब सबको सब पता चलेगा कि ये यात्रा कैसी रही। मैंने अपने करियर में बहुत उतार चढ़ाव देखे हैं। और, जहां अब मैं हूं वहां आना मेरे जैसे बिना फिल्म बैकग्राउंड के कलाकार के लिए आसान नहीं रहा।”
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मनोज बाजपेयी
- फोटो : Instagram
मनोज बाजपेयी का अगला सपना खुद कैमरे के पीछे रहकर दूसरे कलाकारों से अभिनय कराना है। वह निर्देशक बनना चाहते हैं। मनोज कहते हैं, ‘मुझे एक ऐसी कहानी की तलाश है जिसे लेकर मैं निर्देशन में उतर सकूं। ऐसी कहानी की खोज मुझे काफी अरसे से रही है और ये खोज अब भी जारी हैं। जैसा कि आप जानते ही हैं रघुवीर यादव हम तमाम लोगों के अभिनय के आदर्श रहे हैं। मैं सीधा, सच्चा और सरल रास्ता ही अभिनय का रास्ता मानता रहा हूं। ये ऐसा अभिनय है, जहां पर वास्तविकता भी है लेकिन एक खास तरह का ड्रामा भी है। ये सच है कि उनको वह मुकाम नहीं मिला जो उन्हें मिलना चाहिए था।’
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67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन विज्ञान भवन में किया गया। विजेताओं को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने स्वर्ण कमल एवं रजत कमल, शॉल और ईनाम की राशि देकर सम्मानित किया। मनोज बाजपेयी, कंगना रणौत और धनुष को बेहतरीन अभिनय के लिए सम्मानित किया गया। छिछोरे को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला। सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म छिछोरे के निर्देशक नितेश तिवारी को सम्मानित किया गया। 67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा मार्च 2021 में की गई थी। कंगना अपने मां और पिता के साथ अवॉर्ड लेने पहुंचीं।