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Sudhir Phadke: बड़े पर्दे पर उतरेगी ‘गीत रामायण’ रचने वाले स्वर गंधर्व की कहानी, संघ के लिए समर्पित संगीतकार

Wed, 26 Jul 2023 10:37 AM IST
साक्षी पांडेय अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: साक्षी पांडेय Updated Wed, 26 Jul 2023 10:37 AM IST
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a biopic announced on Sudhir Phadke composer Geet Ramayana named Swargandharv Sudhir Phadke read
सुधीर फडके बायोपिक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई

मराठी सिनेमा के दिग्गज संगीतकार, गायक सुधीर फडके की बायोपिक 'स्वरगंधर्व सुधीर फडके' बनने जा रही है। इस फिल्म का मुहूर्त  मंगलवार की शाम उनके जन्मदिन के अवसर पर मुंबई के दादर स्थिति स्वातंत्र्यवीर सावरकर स्मारक सभागृह, शिवाजी पार्क में उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक के हाथों संपन्न हुआ। सुधीर फडके न सिर्फ मराठी सिनेमा के काफी लोकप्रिय गायक और संगीतकार रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी ताउम्र जुड़े रहे।

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सुधीर फडके बायोपिक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई

मराठी सिनेमा में सुधीर फडके को स्वरगंधर्व के नाम से पहचाना जाता है। सुधीर फड़के का जन्म 25 जुलाई 1919 को कोल्हापुर में हुआ। फडके ने कोल्हापुर में वामनराव पाध्ये से शास्त्रीय संगीत में गायन की प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की। उनका जन्म का नाम राम फड़के था, लेकिन बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर सुधीर रख लिया। मराठी फिल्म इंडस्ट्री में सुधीर फडके को बाबूजी के नाम से भी जाना जाता है। साल 1941 में एचएमवी के साथ अपना करियर शुरू करने के बाद सुधीर फडके ने साल 1946 में प्रभात फिल्म कंपनी की फिल्म 'गोकुल' से संगीत निर्देशक के रूप में करियर की शुरुआत की। अपने जीवनकाल में उन्होंने 111 फिल्मों में संगीत दिया जिनमें से हिंदी फिल्में भी शामिल है।

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सुधीर फडके बायोपिक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई

कवि जीडी माडगुलकर के छंदों पर आधारित 56 गीतों वाली 'गीत रामायण' सुधीर फडके की सबसे लोकप्रिय कृतियों में से एक है। इन गीतों को सुधीर फडके ने माणिक वर्मा, ललिता देउलकर, लता मंगेशकर, वसंतराव देशपांडे, राम फाटक, उषा अत्रे और खुद की आवाज में रिकॉर्ड किया था। 'गीत रामायण' का पहला प्रसारण ऑल इंडिया रेडियो पुणे पर 1 अप्रैल 1955 को रामनवमी के दिन किया गया और एक साल  तक प्रत्येक रविवार को 'गीत रामायण' का एक नया गीत प्रसारित किया गया। यह उस समय के सबसे लोकप्रिय कार्यक्रमों में से एक था। 'गीत रामायण' का नौ  भाषाओं असमिया, बांग्ला, अंग्रेजी, हिंदी, कन्नड़, कोंकणी, सिंधी, तेलुगु और मलयालम अनुवाद हो चुका है।

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सुधीर फडके बायोपिक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई

अपने जीवन के अंतिम दिनों में सुधीर  फडके ने भारतीय स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के जीवन पर एक हिंदी फिल्म का भी निर्माण किया। वीर सावरकर का सुधीर फडके के जीवन में काफी प्रभाव रहा है, देशभक्ति के लिए उनसे प्रेरित रहे। गोवा स्वतंत्रता आंदोलन और भारत की स्वतंत्रता के बाद की लड़ाई में भी वह सक्रिय रूप से शामिल थे। वह 60 वर्षों से अधिक समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे। इंडिया हेरिटेज फाउंडेशन के मुख्य प्रेरणास्रोत और संस्थापक सदस्य सुधीर फडके का 29 जुलाई 2002 को ब्रेन हेमरेज की वजह से  मुंबई में उनका निधन हो गया। और, उनके पार्थिव शरीर को दादर स्थित वीर सावरकर स्मारक में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था।

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सुधीर फडके बायोपिक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई

सुधीर फडके की बायोपिक का निर्देशन योगेश देशपांडे कर रहे हैं। योगेश देशपांडे कहते हैं, 'बाबूजी इतने बड़े हस्ती थे कि उनको मैंने संगीतकार और गायक की हैसियत से देखा है। मेरी उनसे पहली मुलाकात पुणे में हुई थी जब वह सावरकर पर फिल्म बना रहे थे। उस समय मेरी उम्र 11 -12 साल रही होगी। बाबूजी को बचपन से सुनते आ रहा हूं। किसी पारिवारिक कार्यक्रम में लोग  बाबूजी के ही गाने गाते हैं । जब मैंने उनके बारे में जानना शुरू किया, तब जब मुझे पता चला कि 15 वर्ष की उम्र से लेकर 25 वर्ष के उम्र तक का उनका सफर कितना कठिन था। तब गाना गाने के बदले उनको दो रुपये मिलते थे। ऐसे करते- करते वह कोलकाता (कलकत्ता) पहुंच गए। जहां पर उनको एचएमवी में पहला ब्रेक मिलने वाला था लेकिन घर की कुछ समस्या की वजह से उन्हें वापस आना पड़ा।' 
 

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