फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

EXCLUSIVE: “नुसरत साहब से मिलने के लिए मैं अमेरिका में लाइन में लगा था”: ए आर रहमान

Sat, 17 Apr 2021 09:33 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 17 Apr 2021 09:33 PM IST
विज्ञापन
A R Rahman speaks to Pankaj Shukla his music journey lata mangeshkar nusrat fateh ali khan dhanush
ए आर रहमान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अल्ला रखा रहमान यानी ए आर रहमान आमतौर पर निजी बातचीत में भी बहुत कम बोलते हैं। हर क्रिएटिव इंसान की तरह उनका भी काम करने का अपना अलग तरीका है। संगीत को उन्होंने इबादत समझा है। लेकिन, अपना करियर शुरू करन के लंबे अरसे तक न उन्हें नुसरत फतेह अली खान के बारे में ज्यादा कुछ पता था और न हिंदी सिनेमा के कई मशहूर संगीतकारों के बारे में। लता मंगेशकर से उनका कनेक्शन थोड़ा इसलिए अलग है क्योंकि रहमान के पिता आर के शेखर रोज सुबह उठकर लता की एक तस्वीर निहारा करते थे। ऐसी तमाम निजी यादें ए आर रहमान ने साझा की हैं, ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल के साथ इस एक्सक्लूसिव बातचीत में।

A R Rahman speaks to Pankaj Shukla his music journey lata mangeshkar nusrat fateh ali khan dhanush
ए आर रहमान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

आमतौर पर कोई कलाकार या तकनीशियन फिल्म निर्माता तब बनता है जब उसे लगता है कि कोई दूसरा उसकी सोच को हूबहू परदे पर नहीं उतार पाएगा, आप निर्माता क्यों बने?

फिल्म ’99 सॉन्ग्स’ बनाने का मूल विचार नए भावों को व्यक्त करने का रहा। मैं पिछले 20 साल में 160 फिल्मों में संगीत दे चुका हूं। खूब घूमा हूं। दूसरी संस्कृतियों के लोगों से मिला हूं। तो मेरे भीतर कहीं ये एहसास भी रहा कि मुझे संगीत में और गहरी डुबकी लगानी ही चाहिए। और, ऐसा करने का मेरे पास एक ही तरीका था कि अपनी फिल्म की कहानी खुद लिखूं। अपनी चुनौतियां खुद रचूं और ऐसी ही एक फिल्म का निर्माण करूं।





A R Rahman speaks to Pankaj Shukla his music journey lata mangeshkar nusrat fateh ali khan dhanush
ए आर रहमान - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

और, ‘मां तुझे सलाम’ बनाने के पीछे भी ऐसी ही किसी प्रेरणा ने काम किया होगा?

भारत का मूल भाव है ‘वंदे मातरम्’। और, उस समय बिंदु पर ऐसा गाना बनाने के लिए हमें किसी ने कहा नहीं और ना ही किसी ने हम पर दबाव डाला। हमने ये गीत अपने गर्व के साथ बनाया। महबूब ने इसे लिखा। भरतबाला और कनिका का जुनून इसके वीडियो में तब्दील हुआ। 90 के दशक में एक नए भारत का जन्म हुआ था। एक विकासशील देश का जन्म हुआ था।

विज्ञापन
विज्ञापन
A R Rahman speaks to Pankaj Shukla his music journey lata mangeshkar nusrat fateh ali khan dhanush
ए आर रहमान, करीमा बेगम - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

दर्जनों फिल्मफेयर, छह नेशनल अवार्ड, दो ऑस्कर और बाफ्टा पुरस्कार सब आपको मिले हैं। लेकिन, ‘मां तुझे सलाम’ सुनने के बाद अपनी मां करीमा बेगम से मिली झप्पी के आगे इन सबका क्या मोल है?

हर इंसान को ये समझना जरूरी है कि उसका जन्म क्यों हुआ है? हमारे जीवन में जो कुछ होता है उसके पीछे कुछ न कुछ संदेश होता है। मेरी फिल्म पहली फिल्म 1992 में ही क्यों रिलीज हुई? या कि जैसे 2009 मेरे जीवन का अहम साल है। (इस साल रहमान की पहली हॉलीवुड फिल्म रिलीज हुई और टाइम पत्रिका ने उन्हें दुनिया के सौ प्रभावशाली लोगों में शामिल किया)। मुझे लगता है कि कोई तो शक्ति है और वह शक्ति हम सबको एक देखना चाहती है। जब मैं खुद से ये सारे सवाल करता हूं तो मुझे अपने सारे गुजरे साल याद आते हैं। हमारे विवेक से आगे जाकर हर वस्तु में एक संबंध है। कहीं एक ऐसी पवित्र अवस्था है जहां न कोई हिंदू है, न मुस्लिम, न ईसाई, ईश्वर को न मानने वाला भी। हमारी आत्माओं के बीच भी ऐसी ही एक पवित्र डोर खिंची हुई और मेरा भरोसा है कि जब मैं संगीत बनाता हूं तो ये उस पवित्र अवस्था के भी आगे निकल जाता है। वो कहते हैं न कि एक जगह होगी जहां न कुछ अच्छा होगा और न कुछ बुरा, मैं तुम्हें वहां मिलूंगा। वह जगह दरअसल संगीत है।

विज्ञापन
A R Rahman speaks to Pankaj Shukla his music journey lata mangeshkar nusrat fateh ali khan dhanush
ए आर रहमान - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

आपके न्यूयार्क में हुए लाइव शो में मैं मौजूद था, वहां एक अमेरिकी महिला से मैंने उनके वहां होने का सबब पूछा तो उनका उत्तर था, ‘संगीत। मैंने ऐसा संगीत पहले सुना नहीं है।‘ भारतीय संगीत का दूत बनकर कहीं जाना कितनी बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं आप?

शुरू से हम जो करते हैं, उसके पीछे हमारी नीयत होती है। ‘रोजा’ रिलीज होने से 10 साल पहले तक मैंने दुनिया का हर तरह का संगीत सुना। चीन, रूस, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका सबका। मैं ये देखना चाहता था कि कैसे हम वहां की अच्छी चीजें अपनी संस्कृति में ला सकते हैं और कैसे हम अपनी संस्कृति को दूसरे देशों तक पहुंचा सकते हैं। जब हम दूसरों के लिए कुछ बाहर लेकर जाना चाहते हैं तो हमें ये ख्याल रखना होता है कि हमारी संवेदनाएं एक स्तर पर होनी चाहिए। एक साझा स्थान होना चाहिए। अगर आप मेरी शैली देखेंगे तो मैंने अपनी पहली फिल्म में दक्षिण भारत से होने के बावजूद हिंदुस्तानी राग पनाए हैं। जब हमारा साक्षात्कार किसी दूसरी संस्कृति से होता है तो हम या तो उस पर तरस खाते हैं या उसके आभामंडल से प्रभावित हो जाते हैं। लेकिन, अगर हम सही संतुलन बना लें और दोनों संस्कृतियों का एक साझा सहमति बिंदु खोज लें तो फिर वह आपसे बहुत कुछ सीखना चाहते हैं। संगीत एक आम भाषा है। आपने जैसे कि कहा मुझे भारतीय संगीत का सांस्कृतिक दूत समझा जाता है, तो मुझे लगा कि क्यों न ऐसा ही प्रयोग मैं सिनेमा में भी करूं।




अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed