बॉलीवुड की कुछ ऐसी फिल्में रही हैं जो हमेशा अपनी विषय, कहानी और निर्देशन की वजह से खूब सुर्खियां बटोरती हैं। उनमें एक साल 2009 में आई फिल्म देव डी थी। देव डी का निर्देशन अनुराग कश्यप ने किया था। इस फिल्म में अभिनेता अभय देओल, कल्कि केकलां और माही गिल मुख्य भूमिका में थीं। यह फिल्म जब सिनेमाघरों में रिलीज हुई तो इसने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। अब फिल्म के 11 साल बाद अभय देओल देव डी के किरदार को लेकर खुलासा किया है।
अभय देओल ने 11 साल पुरानी अपनी फिल्म देव डी को किया याद, अनुराग कश्यप के साथ किया था काम
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अभय देओल सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। उन्होंने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर फिल्म देव डी का पोस्टर साझा किया है। पोस्टर के साथ उन्होंने इस फिल्म के किरदारों के बारे में भी बताया है। अभय देओल ने अपने पोस्ट में लिखा, 'देव डी 2009 में रिलीज हुई थी। अनुराग कश्यप से पहले मैंने इस फिल्म के बारे में कई लोगों से बात की थी। जब मैं लोगों को इस फिल्म की कहानी को सुनाता था, तो वह इसे काफी आर्ट फिल्म बताते थे। मैं सौभाग्यशाली था कि मुझे अनुराग कश्यप मिले'।
अभय देओल ने पोस्ट में आगे लिखा, 'मैंने जब किताब पढ़ी और अपने किरदार के बारे में जाना कि वह कितना अराजकवादी, मिथ्यावादी, हकदार और अभिमानी था। फिर भी वह दशकों से रोमांटिक था! वहीं महिला किरदार मजबूत और ईमानदार थे, अपने पति से प्यार करें, चाहे कुछ भी हो। मैं इस फिल्म के इस नजरिए को बदलना चाहता था। मैं उन महिला किरदारों को अच्छी और समर्पित महिला की छवि देना चाहता था। मैं उन्हें फिल्म में एक आजाद महिला दिखाना चाहता था जो सिर्फ आदमी के प्यार तक ही सीमित नहीं थी। जो कि आज तक बाकी कहानियों में दिखाया गया है। यही कारण है कि पारो देव के अवगुणों को दूर करती है और उसे एक अलग जगह पर रखती है।'
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अभय ने लिखा है कि उनकी कहानी में फिल्म का मुख्य किरदार देव एक ड्रग डीलर बन जाता है और पारो के घर के सामने पुलिस के हाथों मारा जाता है। उन्होंने लिखा, 'चंदा भी कभी देव से प्यार नहीं करती और ना ही उसे इस बात का अफसोस होता है कि वह पूर्वी यूरोप की एक हाई क्लास वेश्या है। चंदा का किरदार इन तीनों किरदारों में सबसे मजबूत था। उसे देव के साथ हमदर्दी थी। वह जानना चाहती थी कि देव की हालत आखिर ऐसी कैसे हो गई। मेरी कहानी में चंदा को एक सोने के समान दिल वाली वेश्या के रूप में दिखाया जाना था।'
'देव डी' की कहानी अभय के हिसाब से कुछ और थी लेकिन जैसे ही इस कहानी में अनुराग कश्यप की बतौर निर्देशक एंट्री हुई तो पूरी कहानी बदल गई। अभय ने लिखा, 'अनुराग ने जब यह कहानी सुनी तो उन्होंने इस फिल्म के अंत को बदल दिया। उन्होंने सोचा कि फिल्म में अगर खुशी-खुशी अंत हो तो उसे दर्शक ज्यादा पसंद करेंगे। और उनका सबसे बड़ा बदलाव तो यही था कि देव और चंदा एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं। मेरी कहानी बहुत अलग थी लेकिन बाद में जो हुआ वह इतिहास है।' अभय देओल के बारे में अनुराग कश्यप भी सोशल मीडिया पर काफी कुछ लिख चुके हैं। अनुराग ने लिखा है कि देव डी की शूटिंग के समय अभय देओल यूनिट के साथ सस्ते होटल में रुकने की बजाय फाइव स्टोर होटल में रहा करते थे और भी तमाम बातें अनुराग इस बारे में लिख चुके हैं।