अभिषेक बच्चन अब वह अभिषेक बच्चन नहीं रहे जो वह अपने करियर की शुरूआत में हुआ करते थे। अब उन्होंने अपना नाम अभिषेक ए बच्चन कर लिया है और पूरी कोशिश इस बात की कर रहे हैं कि लोग उन्हें उनके नाम की बजाय उनके काम से जानें। अभिषेक बच्चन से अमर उजाला के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल की खास मुलाकात।
EXCLUSIVE: अपने बदले किरदारों पर बोले अभिषेक ए बच्चन, ‘होश तो एक समय गुजरने के बाद ही आता है!’
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपने करियर की पटरी बदलना कितना रास आ रहा है इन दिनों? काफी चुन चुन के रोल कर रहे हैं आप?
हां, और प्रयास भी यही है कि अब जो भी मैं कर रहा हूं वह पहले से अलग भी हो और मेरी उम्र के हिसाब से भी हो। जवानी में सबसे गलतियां होती हैं। उस समय जोश में काम होता है। होश तो एक समय गुजरने के बाद ही आता है। तो मैं इन दिनों वैसा ही कुछ काम कर रहा हूं जिसमें जोश से ज्यादा होश की जरूरत होती है।
लेकिन, किरदारों के नाम तो आपके पहले भी काफी मशहूर हुए। ‘युवा’ का लल्लन लोग अब भी नहीं भूले हैं, ‘गुरु’ का गुरुकांत देसाई लोगों को याद है...
एक कलाकार को बस यही चाहिए होता है। और, उसे ज्यादा कुछ चाहिए भी नहीं होता। एक कलाकार को उसके किरदारों के नाम से लोग याद रखें यही उसके अभिनय का सबसे बड़ा इनाम होता है। मैं इरादतन ऐसे किरदार करना चाहता हूं जिसे लिखते समय सबसे पहले लेखक के मन में ही आए कि इस किरदार के साथ कोई न्याय कर सकता है तो वह होगा, अभिषेक बच्चन।
तो कभी किसी किरदार को करते समय ऐसा भी कुछ ख्याल जेहन में आता है कि ये किरदार कुछ कुछ मेरे उस फिल्म के किरदार जैसा है तो उसमें जो छूट गया हो, उसे इस फिल्म में पूरा करने की कोशिश रहती हो? जैस ‘युवा’ का लल्लन और ‘दसवीं’ का गंगाराम चौधरी!
नहीं, लल्लन और गंगाराम के किरदार एकदम अलग हैं। दोनों की शख्सियत पूरी तरह जुदा है। दोनों की कहानियों का भी एक दूसरे से कोई लेना देना नहीं है। तो इसमें किसी पहले के किरदार को बेहतर करने वाली बात नहीं है। लेकिन, हां। अगर हम किसी सीक्वल की बात करें तो ऐसा हो सकता है। पहली ‘धूम’ में जय दीक्षित का किरदार करते समय मुझसे जो चीजें छूट गईं उन्हें हमने इसकी सीक्वल में पूरा करने की कोशिश जरूर की है।
मुझे याद है कि ‘धूम’ का ट्रेलर देखने के बाद आपके पिता अमिताभ बच्चन ने ये फिल्म बनाने वाली कंपनी के मालिक यशराज चोपड़ा के सामने आपकी तारीफ की थी। कितने अच्छे समालोचक हैं आपके पिता आपके काम के बारे में?
मेरा अपने पिता से रिश्ता मित्रवत है। हम एक दूसरे के काम के बारे में आराम से बातें कर सकते हैं। वह मेरा काम देखते हैं और ऐसा नहीं है कि हर बार तारीफ ही करते हों। जहां उन्हें मेरे काम में कमी दिखती है, वह टोकते भी हैं। पास बिठाकर बताते भी हैं कि यहां कुछ ऐसा किया जाता तो बेहतर हो सकता था। वह एक अच्छे सकारात्मक समालोचक हैं। उनकी सलाह मैं मानता भी हूं।
और, माताजी?
मां तो बस मां ही होती है। उनको मेरा सारा काम अच्छा ही अच्छा लगता है।