सब्सक्राइब करें

EXCLUSIVE: अपने बदले किरदारों पर बोले अभिषेक ए बच्चन, ‘होश तो एक समय गुजरने के बाद ही आता है!’

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 27 Mar 2021 08:25 AM IST
विज्ञापन
Abhishek Amitabh Bachchan speaks to Pankaj Shukla on his second innings as reformed actor new films
अभिषेक बच्चन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अभिषेक बच्चन अब वह अभिषेक बच्चन नहीं रहे जो वह अपने करियर की शुरूआत में हुआ करते थे। अब उन्होंने अपना नाम अभिषेक ए बच्चन कर लिया है और पूरी कोशिश इस बात की कर रहे हैं कि लोग उन्हें उनके नाम की बजाय उनके काम से जानें। अभिषेक बच्चन से अमर उजाला के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल की खास मुलाकात।

Abhishek Amitabh Bachchan speaks to Pankaj Shukla on his second innings as reformed actor new films
अभिषेक बच्चन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अपने करियर की पटरी बदलना कितना रास आ रहा है इन दिनों? काफी चुन चुन के रोल कर रहे हैं आप?
हां, और प्रयास भी यही है कि अब जो भी मैं कर रहा हूं वह पहले से अलग भी हो और मेरी उम्र के हिसाब से भी हो। जवानी में सबसे गलतियां होती हैं। उस समय जोश में काम होता है। होश तो एक समय गुजरने के बाद ही आता है। तो मैं इन दिनों वैसा ही कुछ काम कर रहा हूं जिसमें जोश से ज्यादा होश की जरूरत होती है।

Abhishek Amitabh Bachchan speaks to Pankaj Shukla on his second innings as reformed actor new films
अभिषेक बच्चन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

लेकिन, किरदारों के नाम तो आपके पहले भी काफी मशहूर हुए। ‘युवा’ का लल्लन लोग अब भी नहीं भूले हैं, ‘गुरु’ का गुरुकांत देसाई लोगों को याद है...
एक कलाकार को बस यही चाहिए होता है। और, उसे ज्यादा कुछ चाहिए भी नहीं होता। एक कलाकार को उसके किरदारों के नाम से लोग याद रखें यही उसके अभिनय का सबसे बड़ा इनाम होता है। मैं इरादतन ऐसे किरदार करना चाहता हूं जिसे लिखते समय सबसे पहले लेखक के मन में ही आए कि इस किरदार के साथ कोई न्याय कर सकता है तो वह होगा, अभिषेक बच्चन।

विज्ञापन
विज्ञापन
Abhishek Amitabh Bachchan speaks to Pankaj Shukla on his second innings as reformed actor new films
अभिषेक बच्चन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

तो कभी किसी किरदार को करते समय ऐसा भी कुछ ख्याल जेहन में आता है कि ये किरदार कुछ कुछ मेरे उस फिल्म के किरदार जैसा है तो उसमें जो छूट गया हो, उसे इस फिल्म में पूरा करने की कोशिश रहती हो? जैस ‘युवा’ का लल्लन और ‘दसवीं’ का गंगाराम चौधरी!
नहीं, लल्लन और गंगाराम के किरदार एकदम अलग हैं। दोनों की शख्सियत पूरी तरह जुदा है। दोनों की कहानियों का भी एक दूसरे से कोई लेना देना नहीं है। तो इसमें किसी पहले के किरदार को बेहतर करने वाली बात नहीं है। लेकिन, हां। अगर हम किसी सीक्वल की बात करें तो ऐसा हो सकता है। पहली ‘धूम’ में जय दीक्षित का किरदार करते समय मुझसे जो चीजें छूट गईं उन्हें हमने इसकी सीक्वल में पूरा करने की कोशिश जरूर की है।  

विज्ञापन
Abhishek Amitabh Bachchan speaks to Pankaj Shukla on his second innings as reformed actor new films
धूम - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

मुझे याद है कि ‘धूम’ का ट्रेलर देखने के बाद आपके पिता अमिताभ बच्चन ने ये फिल्म बनाने वाली कंपनी के मालिक यशराज चोपड़ा के सामने आपकी तारीफ की थी। कितने अच्छे समालोचक हैं आपके पिता आपके काम के बारे में?
मेरा अपने पिता से रिश्ता मित्रवत है। हम एक दूसरे के काम के बारे में आराम से बातें कर सकते हैं। वह मेरा काम देखते हैं और ऐसा नहीं है कि हर बार तारीफ ही करते हों। जहां उन्हें मेरे काम में कमी दिखती है, वह टोकते भी हैं। पास बिठाकर बताते भी हैं कि यहां कुछ ऐसा किया जाता तो बेहतर हो सकता था। वह एक अच्छे सकारात्मक समालोचक हैं। उनकी सलाह मैं मानता भी हूं।

और, माताजी?
मां तो बस मां ही होती है। उनको मेरा सारा काम अच्छा ही अच्छा लगता है।

 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed